जी-20 में दिखेगा मोदी का जलवा! अमेरिका और जापान से होगी चीन को घेरने पर बात

ओसाका में होने वाली मोदी और ट्रंप की मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है. व्हाइट हाउस ने कहा है कि दोनों नेताओं की मुलाकात से भारत और अमेरिका के रिश्तों में और मजबूती आएगी.

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Updated: May 25, 2019, 10:09 AM IST
जी-20 में दिखेगा मोदी का जलवा! अमेरिका और जापान से होगी चीन को घेरने पर बात
पीएम मोदी के साथ डोनाल्ड ट्रंप (फ़ाइल फोटो)
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Updated: May 25, 2019, 10:09 AM IST
लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी अगले महीने जापान के दौरे पर जाएंगे. यहां वो ओसाका में 28 से 29 जून के बीच होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. इस बैठक में पीएम मोदी की मुलाकात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से होगी. इसके अलावा यहां जापान के भी बड़े नेता मौजूद रहेंगे.

ओसाका में होने वाली मोदी और ट्रंप की मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है. व्हाइट हाउस ने कहा है कि दोनों नेताओं की मुलाकात से भारत और अमेरिका के रिश्तों में और मजबूती आएगी. लोकसभा चुनाव में धमाकेदार जीत के बाद ट्रंप ने पीएम मोदी को फोन पर बधाई भी दी थी.



वैसे तो जी-20 की बैठक में 19 देशों और यूरोपियन यूनियन के नेता पहुंचेंगे, लेकिन इस बार यहां भारत-अमेरिका और जापान के बीच कई अहम मुद्दों पर बातचीत हो सकती है. व्हाइट हाउस ने भी इसको लेकर संकेत दिए हैं.

व्हाइट हाउस ने कहा, ''ओसाका में जी-20 की बैठक में दोनों नेता मुलाकात करेंगे. यहां अमेरिका, भारत और जापान के बीच हिंद प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र व्यापार के लिए बातचीत के लिए अपना विज़न रखेंगे.''

भारत-अमेरिका के बीच इन मुद्दों पर हो सकती है बात
> रक्षा के क्षेत्र में दोनों देश एक दूसरे का सहयोग करने पर बातचीत कर सकते हैं
> साझा सैन्य अभ्यास पर बातचीत
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> असैनिक परमाणु समझौता पर चर्चा. पिछले छह साल से ये समझौता अटका पड़ा है
> दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने पर भी चर्चा होगी. पिछले कुछ सालों से दोनों देशों के बीच छह गुना व्यापार बढ़ा है.

जी-20 का असली मुद्दा
> भारत, जापान और अमेरिका यहां हिंद प्रशांत क्षेत्र में व्यापार बढ़ाने पर बातचीत करेंगे.
> दक्षिण चीन सागर पर भी इस बैठक में चर्चा हो सकती है. ये इलाका  प्रशांत महासागर के पश्चिमी किनारे से लगा हुआ और एशिया के दक्षिण-पूर्व में स्थित है.
>दक्षिण चीन सागर के 90% हिस्से को चीन अपना मानता है. इसके जरिये करीब 3.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापार होता है. ऐसे में चीन और अमेरिका इस पर कब्जे की लड़ाई लड़ रहा है. हाल के दिनों में अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर को लेकर चल रही तनातनी के चलते यह मुद्दा काफी अहम हो गया है.

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