कोरोना कहां से आया? वुहान लैब लीक थ्योरी में चीन से क्या जानना चाहती है दुनिया?

बीजिंग ने बार-बार दोहराया है कि कोरोना वायरस लैब से लीक नहीं हुआ है. (तस्वीर-Reuters)

G7 leaders proposes New probe in Coronavirus Origin: कुछ समय पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने इंटेलिजेंस एजेंसियों को कोरोना वायरस की उत्पत्ति का पता लगाने के लिए 90 दिनों का वक्त दिया था.

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    नई दिल्ली. कोरोना वायरस की उत्पत्ति कहां से हुई? इस बारे में जानने के लिए अमेरिका एक नई जांच की मांग को आगे बढ़ा रहा है. इसमें यह भी शामिल है कि क्या कोरोना वायरस वुहान लैब से लीक हुआ. अमेरिका की मांग के बाद सवाल उठने लगा है कि चीन ने अब तक क्या छुपा रखा है. जी-7 के सात बड़े नेता भी विश्व स्वास्थ्य संगठन की अगुवाई में कोरोना वायरस मामले में एक नई और पारदर्शी जांच चाहते हैं. ब्लूमबर्ग ने जी7 के ड्राफ्ट स्टेटमेंट के हवाले से जानकारी दी है. कुछ समय पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने इंटेलिजेंस एजेंसियों को कोरोना वायरस की उत्पत्ति का पता लगाने के लिए 90 दिनों का वक्त दिया था. और कहा था कि कोरोना मामले पर चीन के लिए चिन्हित सवालों के साथ आएं.

    बीजिंग ने बार-बार दोहराया है कि कोरोना वायरस लैब से लीक नहीं हुआ है, चीनी अधिकारी अपनी दलीलों में डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के हवाले से वायरस को प्राकृतिक बताते रहे हैं. हालांकि डब्ल्यूएचओ के डायरेक्टर जनरल तेद्रोस अधनोस घेब्रेयेसस ने कहा कि लैब लीक थियरी मामले में आगे की जांच के लिए वह तैयार हैं. उन्होंने कहा कि सितंबर 2019 के बायोलॉजिकल सैंपल सहित पूर्ण डाटा मिलने से वैज्ञानिकों को आसानी होगी. यूरोपियन यूनियन ने भी ऐसी ही मांग की है. आइए जानते हैं कि नई जांच में किन मुद्दों पर तहकीकात होनी चाहिए -

    वुहान लैब में रिसर्च पर विस्तृत जानकारी
    सबसे बड़ा सवाल अब तक ये है कि वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वॉयरोलॉजी में किस तरह का काम हो रहा था. शोधकर्ताओं को वुहान लैब के सभी आइसोलेट कोरोना वायरस और जीनोम सीक्वेंसिंग डाटा नहीं मिला है. साथ ही लॉग बुक और रिसर्च से जुड़े रिकॉर्ड्स भी नहीं मिले हैं. सवाल ये भी है कि क्या वुहान लैब में गेन ऑफ फंक्शन रिसर्च भी हो रही थी?

    लैब में काम करने वालों का मेडिकल रिकॉर्ड
    हाल में आई मीडिया रिपोर्ट्स में अमेरिकी इंटेलिजेंस के हवाले से कहा गया था कि नवंबर 2019 में वुहान लैब के तीन रिसर्चर्स बीमार पड़ गए थे और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था. कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि चीन सरकार ने दक्षिण पश्चिमी चीन स्थित एक कॉपर माइन में लोगों के आने जाने पर पाबंदी लगा दी थी. वुहान लैब ने 2012 में इस माइंस से कोरोना वायरस के सैंपल लिए थे, जिसके बाद 6 खननकर्मी "रहस्यमयी" सांस संबंधी बीमारी से पीड़ित पाए गए थे.

    शुरुआती मामलों पर ज्यादा जानकारी
    WHO टीम ने दिसंबर 2019 में वुहान में संक्रमण के मामलों की पहचान के लिए स्वास्थ्य रिकॉर्ड्स, मौत से जुड़े डाटा, दुकानों पर खांसी और जुकाम के दवाओं की बिक्री और सांस संबंधी बीमारी के साथ इंफ्लुएंजा जैसी बीमारी के पैटर्न की समीक्षा की थी. अंतरराष्ट्रीय जांचकर्ताओं ने 76 हजार से ज्यादा मामले और 200 से ज्यादा मेडिकल सेंटर्स को खंगाला था. इसके साथ ही चीन के शोधकर्ताओं ने 4500 के करीब मरीजों के अस्पतालों में रखे सैंपल की भी जांच की. WHO टीम ने अपनी जांच के बावजूद वुहान में अक्टूबर से नवंबर 2019 के बीच सांस संबंधी बीमारियों वाले मामलों में आगे जांच की सिफारिश की थी.

    वुहान मार्केट से जुड़े दस्तावेज
    चीन का दावा है कि कोरोना वायरस प्राकृतिक तौर पर पैदा हुआ है. लेकिन जांच के लिए वुहान गई WHO की टीम को इस बारे में पूरे दस्तावेज नहीं मिले कि वुहान मार्केट में कौन-कौन से जानवर बेचे जा रहे थे. चीन उन सबूतों को भी पेश करने में नाकाम रहा, जिनसे इस बात की पुष्टि हो सके कि वायरस जानवरों से इंसानों में फैला है. WHO टीम ने चमगादड़ों के साथ अन्य जंगली जानवरों की सैंपलिंग करने और आगे जांच के लिए कहा था.

    कोरोना के चीन के बाहर से पैदा होने के सबूत
    चीनी अधिकारी लगातार इस बात को दोहराते रहे हैं कि कोरोना वायरस दुनिया के किसी और हिस्से में पैदा हुआ और फ्रोजेन फूड के जरिए वुहान लाया गया या अमेरिका का मिलिट्री ऑपरेशन है. चीनी विदेश मंत्रालय अमेरिका से लगातार मैरीलैंड में फोर्ट डेट्रिक तक पहुंच की मांग करता रहा है. फोर्ट डेट्रिक अमेरिकी बायो डिफेंस एजेंसी का केंद्र है. WHO ने इस मामले में और रिसर्च की बात कही थी कि क्या वायरस फ्रोजेन फूड के जरिए इंसानों में फैल सकता है.

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