Global Warming: कनाडा की अंतिम साबुत बची हिमचट्टान भी टूट गई

Global Warming: कनाडा की अंतिम साबुत बची हिमचट्टान भी टूट गई
कनाडा की अंतिम साबुत बची हिमचट्टान भी टूट गई

कनाडा में साबुत बची अंतिम हिम चट्टान (Ice Cap)) का ज्यादातर हिस्सा गर्म मौसम और वैश्विक तापमान बढ़ने के चलते टूटकर (Ice Caps Broken) विशाल हिमशैल द्वीपों में बिखर गया है.

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टोरंटो. कनाडा में साबुत बची अंतिम हिम चट्टान (Ice Cap)) का ज्यादातर हिस्सा गर्म मौसम और वैश्विक तापमान बढ़ने के चलते टूटकर (Ice Caps Broken) विशाल हिमशैल द्वीपों में बिखर गया है. हिमचट्टानें बर्फ का एक तैरता हुआ तख़्ता होती हैं जो किसी ग्लेशियर (Glacier) या हिमचादर के ज़मीन से समुद्र की सतह पर बह जाने से बनता है.

देश की अंतिम चट्टान है मिलने 

वैज्ञानिकों के मुताबिक एलेसमेरे द्वीप के उत्तरपश्चिम कोने पर मौजूद कनाडा की 4,000 वर्ष पुरानी मिलने हिमचट्टान जुलाई अंत तक देश की अंतिम अखंडित हिमचट्टान थी जब कनाडाई हिम सेवा की बर्फ विश्लेषक एड्रीन व्हाइट ने गौर किया कि उपग्रह से ली गई तस्वीरों में दिखा कि इसका 43 प्रतिशत हिस्सा टूट गया है. उन्होंने कहा कि यह 30 जुलाई या 31 जुलाई के आस-पास हुआ.



55 वर्ग किलोमीटर का है सबसे बड़ा हिमशैल 
व्हाइट ने कहा कि इसके टूटने से दो विशाल हिमशैल (आइसबर्ग) के साथ ही छोटी-छोटी कई हिमशिलाएं बन गई हैं और इन सबका पहले से ही पानी में तैरना शुरू हो गया है. सबसे बड़ा हिमशैल करीब-करीब मैनहट्टन के आकार का यानि 55 वर्ग किलोमीटर है और यह 11.5 किलोमीटर लंबा है. इनकी मोटाई 230 से 260 फुट है.

सिर्फ 41 फीसदी चट्टान बची रह गई है

उन्होंने कहा कि यह बर्फ का विशाल, बहुत विशाल टुकड़ा है. उन्होंने कहा कि अगर इनमें से कोई भी तेल रिग (तेल निकालने वाला विशेष उपकरण) की तरफ बढ़ने लगे तो आप इसे हटाने के लिए कुछ नहीं कर सकते और आपको तेल रिग को ही हटाकर दूसरी जगह ले जाना होगा. 187 वर्ग किलोमीटर में फैली यह हिमचट्टान कोलंबिया जिले के आकार से ज्यादा बड़ी होती थी लेकिन अब यह महज 41 प्रतिशत यानी 106 वर्ग किलोमीटर ही शेष रह गयी है.

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ओटावा यूनिवर्सिटी के ग्लेशियर विज्ञान के प्राध्यापक ल्यूक कोपलैंड ने कहा कि क्षेत्र में मई से अगस्त की शुरुआत तक तापमान पांच डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया है जो 1980 से 2010 के औसत से ज्यादा गर्म है. यहां तापमान आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ रहे तापमान से भी ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है जो पहले ही विश्व के अन्य हिस्सों के मुकाबले ज्यादा तापक्रम वृद्धि का सामना कर रहा है.
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