Hope Mars Mission: UAE के लिए ऐतिहासिक दिन, लाल ग्रह की कक्षा में पहुंचा अंतरिक्ष मिशन 'होप'

Hope Mars Mission (MOHAMMED BIN RASHID SPACE CENTRE)

Hope Mars Mission (MOHAMMED BIN RASHID SPACE CENTRE)

Hope Mars Mission: पिछले साल 20 जुलाई को दक्षिणी जापान में तनेगाशिमा अंतरिक्ष केंद्र से एच2-ए नाम के रॉकेट के जरिए इसे मंगल ग्रह के लिए भेजा गया था. यह किसी अरब देश का पहला मंगल मिशन है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 10, 2021, 11:41 AM IST
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मंगल ग्रह के लिए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का अंतरिक्ष मिशन 'होप' मंगलवार को सफलतापूर्वक 'लाल ग्रह' की कक्षा में प्रवेश कर गया. पिछले साल 20 जुलाई को दक्षिणी जापान में तनेगाशिमा अंतरिक्ष केंद्र से एच2-ए नाम के रॉकेट के जरिये इसे मंगल ग्रह के लिए भेजा गया था. यह मंगल ग्रह के लिए रवाना हुआ किसी अरब देश का पहला अंतरिक्ष मिशन भी है. यूएई के मंगलयान का नाम अरबी में 'अमल' है जिसे हिन्दी में 'उम्मीद' और अंग्रेजी में 'होप' कहते हैं.

मंगल पर पहुंचने के बाद 'होप' मंगल ग्रह के मौसम और जलवायु का अध्ययन करेगा. खास बात यह है कि यह यान मंगल ग्रह के निचले वातावरण को मापने के लिए एक स्पेक्ट्रोमीटर स्पेक्ट्रोमीटर से लैस है. यहां पहुंचने के बाद यह पूरे मार्टियन वर्ष, या 687 दिनों के लिए मंगल ग्रह का चक्कर लगाएगा. मंगल मिशन का उद्देश्य लाल ग्रह के वातावरण में मौसम की गतिशीलता पर एक विस्तृत ब्योरा देना है. यूएई यह भी चाहता है कि यह परियोजना अरब युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत के रूप में काम करे.

अंतरिक्षयान को मंगल तक पहुंचने के लिए 48.30 करोड़ किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय करनी पड़ी. एक अंतरिक्षयान को धरती की कक्षा के पार और सूर्य के इर्द गिर्द मंगल की सबसे दूर कक्षा तक पहुंचने के लिए छह से सात माह का समय लगता है. वैज्ञानिक यह जानना चाहते हैं कि अरबों वर्ष पहले मंगल ग्रह कैसा था जब वहां नदियां, झरने और महासागर हुआ करते थे जिनमें सूक्ष्म जीव रहते थे. यह ग्रह अब बंजर, मरुस्थल के रूप में तब्दील हो गया है.

मंगल ग्रह पर पहुंचना वैज्ञानिकों की सबसे खूबसूरत कल्पनाओं में शुमार रहा है, लेकिन कई मिशन वहां पहुंचने से पहले नाकाम हो चुके हैं और 50 प्रतिशत से ज्यादा मिशन विफल रहे हैं. केवल अमेरिका मंगल तक अपना अंतरिक्षयान सफलतापूर्वक पहुंचा पाया है. वह 1976 में वाइकिंग्स से शुरुआत करके आठ बार ऐसा कर चुका है.



नासा के दो लैंडर वहां संचालित हो रहे हैं, 'इनसाइट और 'क्यूरियोसिटी. छह अन्य अंतरिक्ष यान मंगल की कक्षा से लाल ग्रह की तस्वीरें ले रहे हैं, जिनमें अमेरिका से तीन, यूरोपीय देशों से दो और भारत से एक है. मंगल ग्रह के लिए चीन ने अंतिम प्रयास रूस के सहयोग से किया था, जो 2011 में नाकाम रहा था.
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