कोरोना वैक्सीनः जानिए कैसे सबसे ज्यादा लोगों को टीका लगाने वाला देश बना इजरायल

घूस, फ्रॉड और अविश्वास का सामना कर रहे नेतन्याहू ने टीकाकरण कार्यक्रम को व्यक्तिगत अभियान की तरह अमलीजामा पहनाया है.

Benjamin Netanyahu ने कहा, "हमने करोड़ों में वैक्सीन खरीदी है. दुनिया में अपनी आबादी के लिए इतना टीका किसी ने नहीं खरीदा होगा. हमने सबके लिए खरीदा है. यहूदी, अरब, धार्मिक या सेकुलर. आओ और वैक्सीन लगवाओ."

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    नई दिल्ली. इजरायल ने अपनी 10 फीसदी आबादी को कोरोना वायरस वैक्सीन (Coronavirus Vaccine) के टीके लगा दिए हैं. ये आंकड़ा दुनिया के किसी भी देश के मुकाबले सबसे ज्यादा है और इसने इजरायल में तमाम चुनौतियों का सामना कर रहे बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) की छवि को एक नई धार दी है. 20 दिसंबर को शुरू हुए कोरोना वायरस टीकाकरण कार्यक्रम (Coronavirus Vaccination Programme) के तहत इजरायल ने अपनी आबादी के मुकाबले वैक्सीन के तीन गुने टीके का वितरण किया है.

    "ऑवर वर्ल्ड" के डाटा के मुताबिक इजरायल (Israel) से आगे सिर्फ बहरीन है. 2020 की समाप्ति तक अमेरिका में तकरीबन 1 फीसदी आबादी को कोरोना वायरस वैक्सीन का टीका लगाया गया था, जबकि कई सारे यूरोपीय देशों में बहुत ही सीमित आबादी को कोरोना का टीका लगा है. "ऑवर वर्ल्ड" के डाटा के मुताबिक चीन, अमेरिका और ब्रिटेन ने अब तक सबसे ज्यादा वैक्सीन के टीके वितरित किए हैं.

    इजरायल की आबादी 90 लाख है और ये अहम वजह है कि इजरायल ने अब तक 10 फीसदी आबादी को टीका लगा दिया है. कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में इजरायल की सरकार को सलाह दे रहे एडवायजरी टीम के एक्सपर्ट्स प्रोफेसर रान बैलिसर ने कहा कि वैक्सीन खरीद के लिए आक्रामक अभियान चलाने से काफी मदद मिली. इजरायली स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, "हमने कंपनियों के साथ शुरुआती चरण में खरीद के लिए मोलभाव करना शुरू कर दिया और इससे कंपनियां हमें शुरू में ही बड़े पैमाने पर सप्लाई के लिए राजी हुई. उन्होंने कहा कि टीकाकरण के मामले में हम दुनिया की अगुवाई कर रहे हैं और ये सब पहले से तैयारी करने के चलते हुआ."

    इजरायल की आंतरिक राजनीति हाल के दिनों में हिचकोले खाती रही है और कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से इजरायल को मुश्किलों का सामना करना पड़ा है, जोकि वायरस संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से एक है. लॉकडाउन और कड़े नियम कानूनों की वजह से इजरायल को संक्रमण पर नियंत्रण हासिल करने में मदद मिली है, लेकिन हालिया हफ्तों में इजरायल में हर दिन कम से कम 5000 केस प्रतिदिन आ रहे थे, जिसकr वजह से तीसरा लॉकडाउन लगाया गया. इजरायल में अब तक 4 लाख 20 हजार से ज्यादा लोग वायरस संक्रमित हुए हैं और 3,325 लोग इलाज पाकर स्वस्थ हुए हैं.

    इजरायली सरकार ने अपने यहां 60 से ऊपर की आयु वाले लोगों को प्राथमिकता दी है. खबरों के मुताबिक जनवरी के अंत तक हाई रिस्क वाले लोगों को फाइजर-बायोएनटेक की वैक्सीन का दूसरा टीका लग जाएगा. औसतन हर दिन डेढ़ लाख लोगों को टीका लगाया जा रहा है. घूस, फ्रॉड और अविश्वास का सामना कर रहे नेतन्याहू ने टीकाकरण कार्यक्रम को व्यक्तिगत अभियान की तरह अमलीजामा पहनाया है. समझौतों पर हस्ताक्षर करने से लेकर फाइजर, मॉडर्ना और अन्य कंपनियों से नेतन्याहू ने वैक्सीन की खरीद सुनिश्चित की है.

    पिछले दो साल में इजरायल चौथे चुनाव का सामना करने जा रहा है, जोकि मार्च में आयोजित किए जाएंगे. नेतन्याहू ने कोरोना वैक्सीन टीकाकरण कार्यक्रम को अपनी राजनीति के लिए संजीवनी के तौर पर लिया है, ताकि आने वाले चुनावों में मजबूत दावेदारी पेश की जा सके. नेतन्याहू के प्रयासों की तारीफ हो रही है और माना जा रहा है कि इजरायल सबसे पहले अपने सभी नागरिकों को टीका लगाने वाला देश बन जाएगा. याद रखना होगा कि कोरोना वायरस से निपटने के प्रयासों को लेकर नेतन्याहू की तीखी आलोचना भी हुई थी.

    19 दिसंबर को नेतन्याहू ने सबसे पहले खुद को टीका लगवाया था. इसके बाद बीते मंगलवार को यरूशलम पहुंचे और 500,000वें नंबर पर टीका लगवाने व्यक्ति को बधाई दी. गुरुवार को नेतन्याहू तीरा शहर पहुंचे और अरब समुदाय के लोगों से बड़ी संख्या में टीका लगवाने की अपील की. इजरायल में अरब मूल के लोगों की संख्या कुल आबादी का 25 फीसद है. नेतन्याहू ने कहा, "हमने करोड़ों में वैक्सीन खरीदी है. दुनिया में अपनी आबादी के लिए इतना टीका किसी ने नहीं खरीदा होगा. हमने सबके लिए खरीदा है. यहूदी, अरब, धार्मिक या सेकुलर. आओ और वैक्सीन लगवाओ."

    हालांकि इजरायल ने टीकाकरण कार्यक्रम को वेस्ट बैंक और गाजा स्ट्रिप जैसे फिलिस्तीन के इलाकों में विस्तार नहीं दिया है. ना ही फिलिस्तीन प्रशासन ने सार्वजनिक तौर पर इसके लिए अपील की है. कानूनी जानकार और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इजरायल, फिलीस्तीन को वैक्सीन उपलब्ध कराकर उपकृत होगा.

    इजरायल के कब्जे वाले फिलीस्तीनी इलाकों की प्रभारी संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार मामलों की एजेंसी ने इस हफ्ते कहा था कि फिलीस्तीन के प्रशासन ने वैश्विक स्तर पर वैक्सीन साझा करने के लिए गठित संस्था कोवॉक्स से आर्थिक मदद के लिए आवेदन किया है और लॉजिस्टिक्स के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर काम कर रहा है.

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