दुनिया में सबसे बड़ा कर्जदाता है चीन, 150 देशों को दिया है 5 ट्रिलियन डॉलर कर्ज

दुनिया में सबसे बड़ा कर्जदाता है चीन, 150 देशों को दिया है 5 ट्रिलियन डॉलर कर्ज
चीन ने कहा- हम और झड़प नहीं चाहते हैं.

चीन (China) दुनिया की अर्थव्यवस्था (World Economy) में जो मुकाम रखता है उसे देखें तो शायद उसे इग्नोर करना नामुमकिन है. चीन ने दुनिया भर के 150 से ज्यादा देशों को कर्ज दिया हुआ है और इस कर्ज के सामने IMF और वर्ल्ड बैंक भी कहीं नहीं ठहरते हैं. ये दुनिया भर के इकॉनोमिक औत्पुत का 6% से भी ज्यादा है.

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बीजिंग. दुनिया भर में कोरोना संक्रमण (Coronavirus) फैलने के बाद से ही चीन (China) अमेरिका (US) समेत कई देशों के निशाने पर है. भारत में भी चीन से सीमा विवाद शुरू होने के बाद चीनी सामानों के बॉयकॉट की मांग उठ रही है. हालांकि चीन दुनिया की अर्थव्यवस्था में जो मुकाम रखता है उसे देखें तो शायद उसे इग्नोर करना नामुमकिन है. चीन ने दुनिया भर के 150 से ज्यादा देशों को कर्ज दिया हुआ है और इस कर्ज के सामने IMF और वर्ल्ड बैंक भी कहीं नहीं ठहरते हैं. ये दुनिया भर के इकॉनोमिक औत्पुत का 6% से भी ज्यादा है.

अल जजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक भले ही कई देश चीन से रिश्ते ख़त्म करने जैसी बातें कह रहे हों लेकिन फ़िलहाल ऐसा संभव नज़र नहीं आता. साल 2000 से 2017 के बीच चीन ने दुनिया के देशों को इतना कर्ज बांट दिया है कि उससे किनारा करना या उसका विरोध करना काफी मुश्किल कम नज़र आता है. साल 2000 में चीन का दुनिया पर कर्ज 500 बिलियन डॉलर के आस-पास था जबकि साल 2017 तक के आंकड़ों के मुताबिक ये बढ़कर 5 ट्रिलियन डॉलर से भी ज्यादा हो चुका है. केल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वर्ल्ड इकॉनमी की रिपोर्ट कि मानें तो 200 बिलियन डॉलर रकम का तो चीन ने अभी तक खुलासा ही नहीं किया है लेकिन बजट में उन्हें अन्य देशों को दिए गए लोन में शामिल किया गया है.





150 देशों को दिए 1.5 ट्रिलियन डॉलर



इस रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने 150 से ज्यादा देशों को सीधे या फिर अन्य माध्यमों से 1.5 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज दिया हुआ है. इसी के साथ वो IMF और वर्ल्ड बैंक को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे बड़ा कर्जदाता भी बन गया है. केल इंस्टीट्यूट के प्रोफ़ेसर क्रिस्टोफर तर्बेश के मुताबिक चीन ने बीते दो दशकों में काफी समझदारी से इन्वेस्ट किया है और जहां-जहां भी उसने कर्ज दिया वहां उसे काफी फायदा हुआ है.
मलेशिया और श्रीलंका में दिखा चीन का असर
चीन पहले से ही कर्ज के जरिए अन्य देशों की नीतियों और योजनाओं को प्रभावित करने के मामलों में आलोचनाओं का शिकार होता रहा है. चीन का बेल्ट एंड रॉड इनिशिएटिव (BRI) मलेशिया में कर्ज के जरिए रॉड प्रोजेक्ट्स को प्रभावित करने के आरोपों से घिरा था. वॉल स्ट्रीट जनरल की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने दिवालिया हो गए मलेशिया के स्टेट फंड को कर्ज देकर उबारने के बदले मलेशिया में रोड, ट्रेन और पाइपलाइन के कई प्रोजेक्ट्स पर कब्जा जमा लिया था.



चीन ने हम्बनटोटा बंदरगाह, एक नया एयरपोर्ट, एक कोल पावर प्लांट और सड़क के निर्माण में 4.8 अरब डॉलर का निवेश किया था. 2016 के आते-आते यह क़र्ज़ छह अरब डॉलर का हो गया. श्रीलंका ने चीन का क़र्ज़ न चुका पाने के कारण हम्बनटोटा बंदरगाह चीन की मर्चेंट पोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड कंपनी को 99 साल के लिए लीज पर दे दिया था. साल 2017 में इस बंदरगाह को 1.12 अरब डॉलर में इस कंपनी को सौंपा गया. इसके साथ ही पास में ही क़रीब 15,000 एकड़ जगह एक इंडस्ट्रियल ज़ोन के लिए चीन को दी गई थी. दरअसल चीन की नीति है कि जब वो किसी छोटे देश को अपने साथ करना चाहता है तो वहां इतना पैसा लगा देता है कि वो देश उसके क़र्ज़ के जाल में फंस जाए. ऐसे कई उदाहरण अफ़्रीका में देखने को मिले हैं, जहां चीन ने कई छोटे देशों को अपने क़र्ज़ तले दबा दिया है.

 

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First published: June 1, 2020, 2:57 PM IST
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