आख़िर पाकिस्तान खुफिया एजेंसी ISI के पास पैसा आता कहां से है ?

क्या पाकिस्तान की सेना देश के सियासतदानों ही नहीं बल्कि वहाँ की इकॉनोमी यानि अर्थव्यवस्था को भी चला रही है.


Updated: August 5, 2018, 12:48 PM IST

Updated: August 5, 2018, 12:48 PM IST
क्या पाकिस्तान की सेना देश के सियासतदानों ही नहीं बल्कि वहाँ की इकॉनोमी यानि अर्थव्यवस्था को भी चला रही है. ये दावा इसलिए किया जा रहा है कि एक खुलासे में ये बात साबित हुई है कि पाकिस्तानी आर्मी की बिजनेस एम्पायर की कीमत 20 बिलियन डॉलर है. भारतीय रूपए के मुताबिक 20 बिलियन डॉलर 24 खरब 81 अरब 20 करोड़ रुपए हैं.

आपको बता दें कि फ़ौजी फ़ाउन्डेशन और आर्मी वेलफ़ेयर ट्रस्ट को पाकिस्तान की फ़ौज चलाती है. शाहीन फ़ाउन्डेशन को पाकिस्तान की वायु सेना के रिटायर्ड अफ़सर चलाते हैं. ऐसे ही बाहरिया फ़ाउन्डेशन पाकिस्तान की नौसेना के रिटार्यड अफ़सर चला रहे हैं.

पाकिस्तान की सेना दुनिया की आंख में धूल झोंकने के लिए अपना धंधा 4 ट्रस्ट के नाम पर चलाती है. जिनके नाम है फौजी फाउन्डेशन, आर्मी वेलफेयर ट्रस्ट, बाहरिया फाउंडेशन. पाकिस्तान सेना इन पैसों का कहां इस्तेमाल ISI के लिए करती है. एक तरफ़ पाकिस्तान की सरकार अपनी सेना को करोड़ों का रक्षा बजट देती तो दूसरी तरफ़ पाकिस्तान की सेना अपनी कम्पनियों के ज़रिए इतना मुनाफ़ा कमाती है कि है कि ISI  के जरिये आतंक के आक़ाओं को पालने के लिए करती है.

 

पाकिस्तान सेना अपने ट्रस्ट के ज़रिए करोड़ों-अरबों का मुनाफ़ा कमाती है. लेकिन कमाल देखिए इस पैसे पर पाकिस्तान की चुनी हुई सरकार का कोई हक़ नहीं है. पाकिस्तान सेना के इन ट्रस्ट और फ़ाउंडेशन के तहत 50 कम्पनियों चला रही है.

इनसे से कुछ चुनिंदा कम्पनियों के बारे में हम आपके सामने ख़ुलासा भी करने वाले हैं.
1. फ़ौजी फ़ाउन्डेशन 
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फ़ौजी फ़ाउन्डेशन पाकिस्तान सेना का सबसे बड़ा और पैसा कमाने का वो हथियार है. जिसके ज़रिए वो सालाना करोड़ों रुपयों की कमाई करती है. फ़ौजी फ़ाउन्डेशन की बुनियाद 1954 में एक चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम पर रखी गई थी. लेकिन पाकिस्तान की सियासत की बागडोर संभालने वाले पाकिस्तान सेना के तानाशाहों ने बदलते वक्त के साथ इस ट्रस्ट की शक्लोसूरत ही बदल दी..

आज आलम ये है कि फ़ौज़ी फ़ाउन्डेशन पाकिस्तान की सबसे बड़ी कॉरपोरेट कम्पनी है...यही नहीं 2017 में आई एक रिसर्च के मुताबिक पाकिस्तान सेना से रिटायर होने वाले 25 फ़ीसदी सेना के अफ़सरों को फ़ौजी फ़ाउन्डेशन में नौकरी दी जाती है.

2. आर्मी वेलफ़ेयर ट्रस्ट 
फ़ौजी फ़ाउन्डेशन की ही तरह आर्मी वेलफ़ेयर ट्रस्ट भी पाकिस्तान सेना की मिलकियत है.आर्मी वेलफ़ेयर ट्रस्ट को 1971 में बनाया गया था और आज 48 साल बाद इस ट्रस्ट की मार्केट वेल्यू 862 मिलियन डॉलर है. आज पाकिस्तान की सेना इस ट्रस्ट के ज़रिए 15 कम्पनियां चला रही है.

आर्मी वेलफ़ेयर ट्रस्ट असकरी ग्रुप ऑफ़ इन्डस्टीज़ चलाता है. इसमें बैंक, बीमा, एविएशन, रेडिमेट कपड़े, पेट्रोल पम्प, रियल एस्टेट और रेस्टोरेंट शामिल हैं.
फ़ौजी फ़ाउंन्डेशन की तरह पाकिस्तान सेना के रिटायर्ड़ अफ़सर ही आर्मी वेलफ़ेयर ट्रस्ट को चलाते हैं और इसका हेड आफ़िस भी रावलपिंडी में ही है.
3. शाहीन फ़ाउन्डेशन 
शाहीन फ़ाउन्डेशन पाकिस्तान एयरफ़ोर्स की जागीर है. .शाहीन फ़ाउन्डेशन की बुनियाद 1977 में रखी गई थी और आज 41 साल बाद शाहीन फ़ाउन्डेशन की मार्केट वेल्यू 40 मिलियन डॉलर है. शाहीन फ़ाउन्डेशन पाकिस्तान में 13 कम्पनियां चला रही है.

शाहीन फ़ाउन्डेशन पाकिस्तान में पाकिस्तान की हवाई सेवाओं से जुड़े हर तरह का कारोबार करती है. इसके अलावा वो एक एविएशन स्कूल भी चलाती है. एडवर्टाइज़िंग और हाउसिंग इसके दूसरे कारोबार हैं. इतना ही नहीं शाहीन फ़ाउन्डेशन एक एफ़एम रेडियो स्टेशन भी चलाती है.

अब ज़ाहिर सी बात है कि जब ये फ़ाउन्डेशन पाकिस्तान एयरफ़ोर्स की जागीर है तो इसे पाकिस्तान की एयरफोर्स के रिटायर्ड अफ़सर ही चलाते होंगे.

4. बाहरिया फ़ाउन्डेशन
बाहरिया फ़ाउन्डेशन पाकिस्तान की नेवी से जुड़ी वो संस्था जिसको साल 1982 में बनाया तो पाकिस्तान की सरकार ने था लेकिन आज उसकी जवाबदेही सरकार को नहीं है.और आज 36 साल बाद बाहरिया फ़ाउन्डेशन की मार्केट वेल्यू 70 मिलियन डॉलर है.

देखें इसी पर हमारी एक पूरी रिपोर्ट.

 
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