उत्तर कोरिया: हिरासत में बंद सैंकड़ों महिलाओं का रेप और अबॉर्शन हुआ- संयुक्त राष्ट्र

उत्तर कोरिया: हिरासत में बंद सैंकड़ों महिलाओं का रेप और अबॉर्शन हुआ- संयुक्त राष्ट्र
उत्तर कोरिया में हिरासत में बंद महिलाओं का उत्पीड़न (प्रतीकात्मक तस्वीर)

संयुक्तराष्ट्र मानवाधिकार (United Nations) ने मंगलवार को बताया कि काम की तलाश में विदेश यात्रा करने वाली सैंकड़ों उत्तर कोरियाई महिलाओं के साथ सुरक्षा अधिकारियों और पुलिस ने पिटाई की और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया.

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प्योंगयांग. संयुक्तराष्ट्र मानवाधिकार (United Nations) कार्यालय ने मंगलवार को बताया कि काम की तलाश में विदेश यात्रा करने वाली सैंकड़ों उत्तर कोरियाई महिलाओं (North Korean Women) के साथ सुरक्षा अधिकारियों और पुलिस (Police Torcher in Custody with Women) ने पिटाई की और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया. कैसे उन्हें डिटेंशन सेंटरों और जेल शिविरों में भोजन, नींद, दिन के उजाले और ताजी हवा से वंचित किया गया. उन्हें भर पेट खाना भी नहीं मिलता था.

हिरासत में महिलाओं के साथ हुई बदतमीजी

संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के मानवाधिकार उच्चायुक्त ने उत्तर कोरिया के सुरक्षा और पुलिस अधिकारियों पर मानवाधिकारों के उल्लंघन" का आरोप लगाते हुए एक नई रिपोर्ट में निष्कर्ष प्रस्तुत किए हैं. वर्ष 2009 और 2019 के बीच देश से भागने में नाकाम रहने के बाद हिरासत में ली गई महिलाओं को उनकी रिहाई के बाद सियोल में एक कार्यक्रम में बुलाया गया और उन्होंने यूएन जांचकर्ताओं को दिए साक्षात्कार में अपनी दर्द भरी कहानियां सुनाई.



महिलाओं का हुआ बलात्कार
यूएन मानवाधिकार रिपोर्ट ने मंगलवार को 100 से अधिक महिलाओं का हवाला देते हुए ये सब बातें बताईं. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार की इस रिपोर्ट का शीर्षक है- 'आई स्टिल फील द पेन' ( मैं अभी भी दर्द महसूस करती हूँ) में यह कहा कि उन पर कई तरह से अत्याचार किए गए. शरीर की आक्रामक तरीके से की गई जांच, जबरन गर्भपात और यहां तक ​​कि अधिकारियों द्वारा बलात्कार भी किए गए.

पुलिस अधिकारी ने कहा-अगर अस्वीकार किया तो...

एक अन्य महिला ने वर्ष 2010 में हिरासत में अपनी पहली रात को याद किया जब एक अधिकारी ने उसका बलात्कार किया था. उस अधिकारी ने धमकी दी कि ... अगर उस महिला ने उसे अस्वीकार किया तो उसे और अपमानित होना पड़ेगा. उसने उसे लालच देते हुए यह तक कहा कि अगर उसने जैसा कहा, वैसा किया तो वह उस महिला को जल्द ही रिहा करने में मदद कर सकता है.

उत्तर कोरिया में जानकारी जुटाना असंभव

रिपोर्ट के अनुसार उत्तर कोरिया में जानकारी एकत्र करना असम्भव है और इस कारण इस रिपोर्ट में साक्षात्कार देने वाली महिलाओं की सभी सूचनाएं एकत्र नहीं हो पाई हैं. एक यूएन मानवाधिकार अधिकारी डैनियल कोलिंग जो इस रिपोर्ट के सह-लेखक है, ने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य प्योंगयांग पर दबाव डालना था ताकि स्थिति में सुधार लाया जा सके साथ ही अन्य देशों से अनुरोध किया है कि वे ऐसे लोगों को निर्वासित न करें जो स्वतंत्रता और समृद्धि प्राप्त करने के लिए अपने जीवन को जोखिम में डालते हैं.

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इस रिपोर्ट में केवल उन महिलाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया जो विदेश भाग गई थीं. उन लोगों का कोई जिक्र नहीं है जो उत्तर कोरिया की राजनीतिक जेलों में बंद हैं जहाँ मानवाधिकारों के उल्लंघन होते रहते हैं.
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