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ट्रंप बोले-मुझे पर्यावरण की बहुत चिंता, कुछ न करने' के लिए चीन और भारत को दी झिड़की

News18Hindi
Updated: November 13, 2019, 5:40 PM IST
ट्रंप बोले-मुझे पर्यावरण की बहुत चिंता, कुछ न करने' के लिए चीन और भारत को दी झिड़की
ट्रंप ने कहा है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए चीन, भारत और रूस जैसे देश कुछ भी नहीं करते (फोटो- Reuters)

अमेरिका (America) ने पिछले हफ्ते औपचारिक तौर पर 2015 के पेरिस जलवायु समझौते (Paris Climate accord) से खुद को अलग कर लिया था. यह एक प्रमुख समझौता माना जाता है, जो 188 देशों को साथ लेकर आया था. इसमें भारत भी शामिल था. इस समझौते का उद्देश्य ग्लोबल वॉर्मिंग (Global Warming) से निपटना है.

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  • Last Updated: November 13, 2019, 5:40 PM IST
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न्यूयॉर्क. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा है कि चीन (China), भारत और रूस जैसे देश अपने धुएं के प्रदूषण और औद्योगिक संयंत्रों से निकलने वाले धुएं को साफ करने के लिए कुछ भी नहीं कर रहे हैं और वे जो कचरा समुद्र में डाल रहे हैं वह लॉस एंजिल्स (Los Angeles) में आकर तैरता रहता है.

जलवायु परिवर्तन (Climate Change) को एक बहुत ही उलझा हुआ मुद्दा करार देते हुए ट्रंप ने कहा है कि इस बात को मानें या न मानें वो कई तरह से खुद को एक पर्यावरणवादी (Environmentalist) मानते हैं.

'मैं पर्यावरण के बारे में बहुत सोचता हूं'
ट्रंप ने न्यूयॉर्क (New York) के एक इकॉनामिक क्लब में मंगलवार को एक बयान में कहा, ''मैं पर्यावरण के बारे में बहुत ज्यादा सोचता हूं. मैं धरती पर एकदम साफ हवा चाहता हूं. मैं चाहता हूं कि हवा साफ हो पानी साफ हो.''

ट्रंप ने सभागार में मौजूद लोगों से कहा कि अमेरिका ने 'एकतरफा, खतरनाक, आर्थिक रूप से असमानता वाले' पेरिस जलावयु समझौते (Paris Climate accord) से खुद को अलग कर लिया है जिससे अमेरिका में लोगों की नौकरियां गईं और जिसने विदेश में प्रदूषण फैलाने वालों की रक्षा की. उन्होंने कहा कि पेरिस जलवायु समझौता अमेरिका के लिए एक 'त्रासदी' था. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस समझौते से अमेरिका को अरबों-अरब डॉलर का नुकसान हुआ है.

'समझौते के चलते भारत को देने पड़ते थे पैसे क्योंकि वह विकासशील देश है'
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप जिस दौरान बोल रहे थे सभागार में ठहाके भी लग रहे थे. इन ठहाकों के बीच उन्होंने कहा, "और यह गलत है. इसे चीन पर 2030 तक लागू नहीं किया जाएगा. रूस पर यह 1990 के दशक से लागू किया गया है. साथ ही इसका बेस ईयर यानी तुलनात्मक साल अब तक के सबसे गंदे साल को माना गया है. हमें भारत को पैसे देने पड़ते हैं क्योंकि वो एक विकासशील देश (Developing Nation) हैं."
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वो इसके व्यापार नियमों और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से जुड़े मुद्दों से खतरों के बारे में क्या सोचते हैं? यह सवाल पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, ''जब लोग जलवायु के बारे में सवाल पूछते हैं, मैं हमेशा कहता हूं, आप जानते हैं, मुझे थोड़ी समस्या है.''

'लॉस एंजिल्स में बहता है चीन-भारत का समुद्र में फेंका कूड़ा'
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास तुलनात्मक रूप से जमीन का थोड़ा हिस्सा है और आप हमारी दूसरे देशों से तुलना करते हैं जैसे चीन, जैसे भारत, जैसे रूस, जैसे कई सारे कई देश जो कि धुएं और अपने प्लांट से निकलने वाले प्रदूषण को साफ करने के लिए कुछ भी नहीं कर रहे हैं. और वो सारा कूड़ा जो वे समुद्र में डाल रहे हैं वह लॉस एंजिल्स में आकर तैर रहा है, यह लॉस एंजिल्स (Los Angeles) की उन समस्याओं के साथ है जो पहले से ही उसके पास मौजूद हैं.

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First published: November 13, 2019, 5:01 PM IST
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