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ग्लेशियर से 60 किमी दूर रह गया ये गांव, तेजी से बढ़ रहा है खतरा

भाषा
Updated: November 10, 2019, 6:06 PM IST
ग्लेशियर से 60 किमी दूर रह गया ये गांव, तेजी से बढ़ रहा है खतरा
आइसलैंड के छात्रों ने ग्लेशियर को पिघलते हुए देखा (प्रतीकात्मक तस्वीर)

सेवानिवृत्त हो चुके स्कूली शिक्षक जान स्टीफेंसन गांव हवोल्स्वोलुर स्थित स्कूल (School) से ऐसे बच्चों को लेकर पहुंचे हैं, जिनकी उम्र लगभग 13 साल है. यह गांव ग्लेशियर (Glacier) से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित है.

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विक. आइसलैंड (Iceland) की सातवीं कक्षा की छात्रा (Student) लील्जा इनारस्डोट्टिर अपने सहपाठियों के साथ अनोखी शिक्षण यात्रा पर है. वह जलवायु परिवर्तन की वजह से पिघल रहे सोल्हेईमाजोकुल ग्लेशियर (Glacier) को देखने पहुंची है. उसने यह भी जाना कि यह एक साल में कितना पिघला है. लील्जा ने कहा, ‘यह बहुत खूबसूरत है लेकिन साथ ही इसे पिघलते हुए देखकर दुख भी हो रहा है.

अक्टूबर 2010 से लगातार यहां आ रहे और अब सेवानिवृत्त हो चुके स्कूली शिक्षक जान स्टीफेंसन गांव हवोल्स्वोलुर स्थित स्कूल से ऐसे बच्चों को लेकर पहुंचे हैं, जिनकी उम्र लगभग 13 साल है. यह गांव ग्लेशियर से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित है.

छात्रों ने मापी ग्लेशियर की दूरी
छात्रों के मापन के अनुसार नतीजे चौंकने वाले है. दो पहाड़ियों के बीच स्थित सोल्हेईमाजोकुल ग्लेशियर पिछले एक दशक में सालाना 40 मीटर की दर से सिकुड़ता रहा है. इस साल अक्टूबर में इन किशोर छात्रों ने तेज हवाओं के बीच जीपीएस, मापन टेप और पीले झंडे की मदद से विभिन्न स्थानों से ग्लेशियर की दूरी मापी और यह पता लगाया कि यह कितना सिकुड़ा है.

मापन कार्य पूरा कर छात्र डोंगी में सवार होकर ग्लेशियर के पिघलने से बनी झील को पार कर बर्फ की दीवार या ग्लेशियर तक पहुंचे. यहां से उन्होंने ग्लेशियर और पगडंडी पर बने निशान के बीच की दूरी नापी. ये निशान पिछले साल छात्रों ने बनाए थे. लील्जा ने कहा, ‘जब पहली बार यहां छात्र आए थे तब यहां पानी नहीं था. इसका मतलब कि उस समय तक यहां ग्लेशियर था.’

ग्लेशियरों के सामने बनी झील
आइसलैंड के 11 फीसदी भूभाग पर ग्लेशियर का विस्तार है. इसमें वत्नाजोकुल शामिल है जो यूरोप का सबसे बड़ा ग्लेशियर है, लेकिन गत 25 साल में 250 घन किलोमीटर बर्फ पिघली है और यह कुल ग्लेशियर का सात फीसदी है. आइसलैंड के मौसम कार्यालय के भूवैज्ञानिक हृाफ्नहिलदुर हैन्नेसडोट्टिर ने कहा कि अब कई ग्लेशियरों के सामने झील बन गई है.
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वर्ष 2200 में पूरी तरह से समाप्त हो सकता है ग्लेशियर
उल्लेखनीय है कि इस साल अगस्त में आइसलैंड के ओक्जोकुल ग्लेशियर के सामने पट्टिका लगाई गई थी जिसके ग्लेशियर होने का दर्जा 2014 में समाप्त कर दिया गया था. इसका मकसद वैश्चिक तापमान में हो रही वृद्धि के प्रति लोगों को जागरूक करना है क्योंकि वैज्ञानिकों ने आशंका जताई है कि आइसलैंड के 400 से अधिक ग्लेशियर वर्ष 2200 में पूरी तरह से समाप्त हो सकते हैं. सोल्हेईमाजोकुल ग्लेशियर करीब 10 किलोमीटर लंबा और दो किलोमीटर चौड़ा है. यह लोकप्रिय पर्यटन स्थल है जहां हर वर्ष छात्र पहुंचते हैं.

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First published: November 10, 2019, 6:06 PM IST
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