चेतावनी! नहीं सुधरा चीन तो भारत समेत दुनिया के सभी बड़े देशों से रिश्ते होंगे ख़राब

चीन (China) के इस आक्रामक रवैये पर अमेरिका (US) के एक वरिष्ठ राजनयिक ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर ऐसा ही रहा तो भारत (India) समेत दुनिया के कई बड़े देश चीन के खिलाफ हो जाएंगे.
चीन (China) के इस आक्रामक रवैये पर अमेरिका (US) के एक वरिष्ठ राजनयिक ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर ऐसा ही रहा तो भारत (India) समेत दुनिया के कई बड़े देश चीन के खिलाफ हो जाएंगे.

चीन (China) के इस आक्रामक रवैये पर अमेरिका (US) के एक वरिष्ठ राजनयिक ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर ऐसा ही रहा तो भारत (India) समेत दुनिया के कई बड़े देश चीन के खिलाफ हो जाएंगे.

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वाशिंगटन/बीजिंग. कोरोना संक्रमण (Coronavirus) को लेकर अमेरिका (US) के साथ जारी तनाव और अब भारत के साथ सीमा विवाद (India-China Border Dispute) में उलझे चीन पर जर्मनी (Germany), ऑस्ट्रेलिया (Australia) समेत कई देशों ने सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं. चीन के इस आक्रामक रवैये पर अमेरिका के एक वरिष्ठ राजनयिक ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर ऐसा ही रहा तो भारत समेत दुनिया के कई बड़े देश चीन के खिलाफ हो जाएंगे. उन्होंने कहा कि चीन अब दुनिया के लिए एक 'समस्या' के रूप में सामने आ रहा है, वो लगातार सभी के लिए मुश्किलें बढ़ा रहा है.

कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के फैलने में चीन की संदिग्ध भूमिका, व्यापार नीति, हांगकांग में चीनी कार्रवाई और विवादित दक्षिण चीन सागर में आक्रामक सैन्य कदमों के कारण अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ गया है. पूर्वी एशियाई एंव प्रशांत मामलों के लिए सहायक विदेश मंत्री डेविड स्टिलवेल ने बुधवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चीन जो कदम उठा रहा है, 'उसका केवल उस इलाके में ही नहीं, बल्कि उसके पार भी असर होगा.' उन्होंने कहा, 'इससे दक्षिणपूर्वी एशिया में असर पड़ेगा, इसका असर उसके पड़ोसी भारत एवं अन्य देशों पर पड़ेगा. यह नई बाहुबल प्रदर्शन की और आक्रामक नीति रक्षा मंत्री के काम को और मुश्किल बना देगी.'

चीनी रक्षा मंत्री ने भी दी चेतावनी
चीन के रक्षा मंत्री जनरल वेई फेंघे ने सप्ताहांत में कहा था कि अमेरिका और चीन की सामरिक तनातनी 'अत्यधिक जोखिम वाले दौर' में प्रवेश कर गई है और 'हमें संघर्ष करते रहने की अपनी भावना को मजबूत करना होगा... स्थिरता के लिए इसका उपयोग करना होगा.' स्टिवेल से इसी बयान के संबंध में सवाल किया गया था, जिसके जवाब में उन्होंने यह टिप्पणी की. स्टिवेल ने कहा कि दुनिया अंतत: इस बात को पहचान रही है कि चीन सरकार के ऐसे प्रारूप को 'आगे बढ़ा रहा' है जिसे कई लोग समस्याग्रस्त समझने लगे हैं. उन्होंने कहा, 'चीन की नेशनल पीपल्स कांग्रेस का हांगकांग के संबंध में अपनी प्रतिबद्धताओं से पीछे हटने का कदम इस बात को और स्पष्ट तरीके से दर्शाता है.'
उल्लेखनीय है कि चीन ने हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विवादित विधेयक का मसौदा गत शुक्रवार को अपनी संसद में पेश किया. इसका मकसद पूर्व में ब्रिटेन के उपनिवेश रहे हांगकांग पर नियंत्रण को और मजबूत करना है. उल्लेखनीय है कि एक जुलाई को 1997 में ब्रिटेन ने हांगकांग को ‘एक देश, दो विधान’ के समझौते के साथ चीन को सौंपा था. समझौते की वजह से चीन की मुख्य भूमि के मुकाबले हांगकांग के लोगों को अधिक स्वतंत्रता प्राप्त है.



चीनी राष्ट्रगान पर चर्चा के दौरान दो सांसदों को बाहर निकाला गया
हांगकांग संसद से बृहस्पतिवार सुबह लोकतंत्र समर्थक दो सांसदों को चैम्बर से बाहर निकाल दिया गया जिससे एक विवादित विधेयक पर चर्चा दूसरे दिन की शुरुआत में बाधित हो गई. हांगकांग की संसद में उस विधेयक पर चर्चा होनी है जिससे इस अर्द्ध स्वायत्त शहर में चीन के राष्ट्रगान का अपमान करना अपराध के दायरे में आएगा.

संसद अध्यक्ष एंड्रयू ल्युंग ने बैठक शुरू होने के कुछ मिनटों में इसे स्थगित कर दिया और 'सर्वश्रेष्ठ अध्यक्ष, स्टैरी ली' लिखी व्यंग्यात्मक तख्ती दिखाने के लिए सांसद एडी चू को बाहर निकाल दिया. ली को हाल ही में उस महत्वपूर्ण समिति का अध्यक्ष चुना गया था जिसने राष्ट्रगान विधेयक को विचार के लिए संसद के पास भेजा था. सुरक्षाकर्मी चू को बाहर लेकर गए जिस पर साथी लोकतंत्र समर्थक सांसदों ने विरोध किया और उन्हें रोकने की कोशिश की.

 

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