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डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग पर सीनेट में ट्रायल शुरू, जानें अब तक की अहम बातें

FILE - In this Wednesday, Jan. 20, 2021, file photo, President Donald Trump waves as he boards Marine One on the South Lawn of the White House, in Washington, en route to his Mar-a-Lago Florida Resort. Former President Trump has named two lawyers to his impeachment defense team, one day after it was revealed that the former president had parted ways with an earlier set of attorneys. (AP Photo/Alex Brandon, File)
FILE - In this Wednesday, Jan. 20, 2021, file photo, President Donald Trump waves as he boards Marine One on the South Lawn of the White House, in Washington, en route to his Mar-a-Lago Florida Resort. Former President Trump has named two lawyers to his impeachment defense team, one day after it was revealed that the former president had parted ways with an earlier set of attorneys. (AP Photo/Alex Brandon, File)

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के महाभियोग मामले की इस हफ्ते सीनेट के समक्ष सुनवाई शुरू हो गई है. महाभियोग के तहत उनपर छह जनवरी को अमेरिकी कैपिटल (संसद भवन) में दंगा भड़काने का आरोप लगाया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 10, 2021, 7:55 AM IST
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वॉशिंगटन. पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के खिलाफ दूसरे महाभियोग का ट्रायल (Impeachment Trail) अमेरिका (America) की सीनेट में मंगलवार दोपहर 1 बजे (भारतीय समयानुसार 9 फरवरी को रात 11.30 बजे) शुरू हुआ. ट्रायल के दौरान ट्रंप का प्रतिनिधित्व उनके वकील ब्रूस एल कैस्टर जूनियर और डेविड स्कोन करेंगे. इन्होंने सोमवार (8 फरवरी) को 78 पन्ने का ट्रायल ब्रीफ दायर करते में महाभियोग के आरोप को ट्रंप के फ्री स्पीच, तय प्रक्रिया के अधिकार के उल्लंघन के साथ ही 'संवैधानिक रूप से गलत' बताया.

ट्रंप ने 6 जनवरी को अपने समर्थकों को संबोधित किया था, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर अमेरिकियों को भड़काया था. इसके बाद एक हिंसक भीड़ ने यूएस कैपिटल में जमकर हंगामा मचाया. कैपिटल हिल की घटना में पांच लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग घायल हो गए थे. इतना ही नहीं बिल्डिंग के हॉल और कमरों को तोड़ दिया गया. इसके साथ ही कांग्रेस और कैपिटल स्टाफ के सदस्यों ने हमला होने या मारे जाने के डर से घंटों तक छुपे रहे.

महाभियोग के लिए वोटिंग
प्रतिनिधि सभा ने 13 जनवरी को चुनाव के परिणाम को पलटने के प्रयास में ट्रम्प पर 'संयुक्त राज्य की सरकार के खिलाफ हिंसा भड़काने' का आरोप लगाने वाले महाभियोग के एक अनुच्छेद को मंजूरी देने मतदान किया. इस मतदान में 232-197 की वोटिंग हुई थी. महाभियोग में यह भी पूछा गया कि उन्हें फिर से किसी सार्वजनिक पद पर रहने से अयोग्य घोषित कर दिया जाए.
ट्रंप के महाभियोग के लिए वोट देने में दस हाउस रिपब्लिकन डेमोक्रेट के साथ शामिल हुए थे. 25 जनवरी को प्रतिनिधि सभा यानी निचली सभा ने औपचारिक रूप से ट्रायल शुरू करने के लिए महाभियोग का आर्टिकल सीनेट को भेजा.



हालांकि किसी को उम्मीद नहीं है ट्रंप को दोषी ठहराया जाएगा. सीनेट में केवल दो-तिहाई बहुमत से ही दोष सिद्ध हो सकता है, जिसका मतलब है कि 67 सीनेटर्स को पक्ष में मतदान करना चाहिए. 100 सदस्यों वाले सदन में  50 डेमोक्रेट द्वारा ट्रंप के खिलाफ वोट देने के बाद भी, उन्हें 17 वोट्स की जरूरत होगी, जिसकी संभावना बहुत कम है. साथ ही इस बात की उम्मीद बहुत कम है कि महाभियोग के दौरान ट्रंप खुद मौजूद होंगे. माना जा रहा है कि वह वकीलों के जरिये ही अपनी बात सीनेट में रखेंगे.

महाभियोग की सुनवाई मे क्या है ट्रंप के वकीलों की मुख्य दलीलें
वकीलों की दलील है कि ट्रंप ने समर्थकों की रैली को संबोधित करने के दौरान लोगों को दंगे के लिए नहीं भड़काया. बचाव पक्ष के वकीलों ने आरोप लगाया है कि सदन के महाभियोग प्रबंधक घंटेभर लंबे ट्रंप के भाषण में से सिर्फ उन्हीं हिस्सों को ले रहे हैं, जो डेमोक्रेटिक पार्टी के मामले के लिए मददगार हैं. वकीलों ने रेखांकित किया कि ट्रंप ने बार-बार अपने समर्थकों से अपील की, वे 'शांतिपूर्ण और देशभक्त तरीके से अपनी आवाज उठाएं.' उन्होंने दलील दी कि ट्रंप की यह टिप्पणी 'अगर आप जी-जान से नहीं लड़ते हैं तो आप यह देश खोने जा रहे हैं'-- चुनाव सुरक्षा के सामान्य संदर्भ में की गई थी, न कि हिंसा के आह्वान के लिए थी.

वकीलों ने यह भी कहा कि कानून प्रवर्तकों ने पहले ही छह जनवरी को हिंसा होने का अंदेशा व्यक्त किया किया था, लिहाजा ट्रंप खुद हिंसा के लिए नहीं उकसा सकते थे. बहरहाल, ट्रंप के वकीलों की दलील यह भी है कि उन्हें संविधान के पहले संशोधन के तहत संरक्षण मिला हुआ था. साथ में उन्होंने यह भी कहा है कि ट्रंप पर महाभियोग चलाना असंवैधानिक है, क्योंकि वह अब पद पर नहीं है. वकीलों की दलील है कि संविधान साधारण नागरिक के खिलाफ महाभियोग चलाने की शक्ति नहीं देता है.
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