इमरान की बढ़ीं मुश्किलें, कुर्सी से हटाने के लिए 3 विरोधियों ने हाथ मिलाया

इमरान की बढ़ीं मुश्किलें, कुर्सी से हटाने के लिए 3 विरोधियों ने हाथ मिलाया
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (फाइल फोटो)

इस गठबंधन की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक नवाज शरीफ (Nawaz Sharif) की पार्टी (पीएमएल-एन). बिलावल भुट्टो (Bilawal Bhutto Zardari) की पार्टी (पीपीपी) और मौलाना फजल-उर-रहमान ( Maulana Fazlur Rehman) की जमीयत-उल-इस्लामी साथ मिलकर इमरान को कुर्सी से हटाने की तैयारी में है.

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इस्लामाबाद. पाकिस्तान (Pakistan) के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) की मुश्किलें बढ़ती नज़र आ रहीं हैं, उन्हें सत्ता से हटाने के लिए अब 3 विपक्षी पार्टियां एक साथ आ गयीं हैं. हालांकि इस गठबंधन की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक नवाज शरीफ (Nawaz Sharif) की पार्टी (पीएमएल-एन). बिलावल भुट्टो (Bilawal Bhutto Zardari) की पार्टी (पीपीपी) और मौलाना फजल-उर-रहमान ( Maulana Fazlur Rehman) की जमीयत-उल-इस्लामी साथ मिलकर इमरान को कुर्सी से हटाने की तैयारी में है. तीनों पार्टियों में ज्यादातर मुद्दों पर सहमति बन गयी है और सोमवार को इन पार्टियों में मीटिंग भी हुई है.

जियो न्यूज के मुताबिक मौलाना फजल-उर-रहमान की जमीयत-उल-इस्लामी वही पार्टी है जिसने पिछले साल नवंबर में भी इमरान के लिए मार्च निकालकर मुश्किलें पैदा कर दीं थीं. ये मार्च इस्लामाबाद तक पहुंच ही गया था हालांकि अस्पष्ट वजहों से इसे वापस ले लिया गया था. सोमवार को पीएमएल-एन के नेताओं का एक दल बिलावल भुट्टो के घर पहुंचा. इमरान को हटाने के लिए रणनीति पर चर्चा शुरू हुई. मिली जानकारी के मुताबिक इमरान के खिलाफ एक ऑल पार्टी अलायंस बनाने की कोशिश की जा रही है.

इमरान सरकार ने सभी पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप
गौरतलब है कि इमरान सरकार फिलहाल पीएमएल-एन और पीपीपी के सभी बड़े नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर केस चला रही है. नवाज और जरदारी को जेल भी भेजा जा चुका है. इसके आलावा प्रांतीय स्तर तक इन पार्टियों के नेता अलग-अलग केसों में फंसे हुए हैं. इतिहास के मुताबिक ये दोनों पार्टियां हमेशा एक दूसरे की दुश्मन रहीं हैं और अलग-अलग विचाराधारा का दावा करती हैं लेकिन अब इमरान के खिलाफ एक हो गई हैं. बताया जाता है कि पिछले दिनों बिलावल भुट्टो ने नवाज के भाई शहबाज की तबीयत का हाल जानने के लिए उन्हें फोन किया था जिससे दोनों पार्टियों के बीच तल्खियां ख़त्म होने का काम हुआ.



इसके बाद एक मीटिंग के लिए सहमति बनी और मौलाना ने भी एक होने पर सहमति दे दी. जेल में बंद जरदारी से भी इस बारे में सलाह ली गयी और सभी इस बात पर सहमत हो गए. अब जल्द ही बिलावल इस्लामाबाद से लाहौर आने वाले हैं और शहबाज से भी बात करेंगे. ऐसा माना जा रहा है कि अगर तीनों पार्टियां साथ आ गईं तो सेना के लिए भी इमरान को बचाना बहुत मुश्किल हो जाएगा. सबसे मजबूत सूबे पंजाब में नवाज तो सिंध में पीपीपी काफी मजबूत है. उधर इमरान सिर्फ खैबर पख्तूनख्वा में ताकतवर हैं. आर्मी और सिविल एडमिनिस्ट्रेशन के ज्यादातर मलाईदार पदों पर पंजाब के लोग ही काबिज हैं. लिहाजा, पंजाब और सिंध से आवाज उठी तो इमरान सरकार के लिए इसे दबाना बहुत मुश्किल होगा.
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