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पाकिस्तान को लेकर तालिबान सरकार में खींचतान, दो गुटों में हुआ बंटवारा

तालिबान ने 15 अगस्त को काबुल पर कब्जा कर लिया था और फिलहाल अंतरिम सरकार बना ली है (File Photo/AP)

तालिबान ने 15 अगस्त को काबुल पर कब्जा कर लिया था और फिलहाल अंतरिम सरकार बना ली है (File Photo/AP)

Taliban Goverment: अफगानिस्तान में समस्या और विकट इसलिए भी हो गई है क्योंकि सुप्रीम लीडर हैबतउल्लाह अखुंदजादा की पिछले पांच महीनों से कहीं कोई मौजूदगी दर्ज नहीं हुई है. जबकि सत्ता के बंटवारे को लेकर कंधारियों और काबुलियों के बीच अखुंदजादा अहम भूमिका निभा सकते थे.

  • News18Hindi
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    काबुल. अफगानिस्तान में तालिबान (Taliban) के कब्जे के करीब एक महीने बाद अब विभिन्न गुटों में टकराव सामने दिखने लगा है. मुल्ला मोहम्मद याकूब ओमारी के नेतृत्व वाले कंधारी खंड और अमीर-उल-मोमिन के साथ वैश्विक आतंकी नेटवर्क के प्रमुख सिराजुद्दीन हक्कानी के काबुल गुट के बीच गुटबाजी साफ दिखने लगी है. इस बीच सुप्रीम लीडर हैबतउल्लाह अखुंदजादा कहीं भी नहीं है और उन्हें मृत माना जा रहा है.

    पश्चिमी मीडिया से मिल रही खबरों के मुताबिक मुल्ला अब्दुल घनी बरादर को हक्कानी गुट ने अगवा कर लिया है. काबुल पर नजर बनाए ऱखने वालों का मानना है कि जिस व्यक्ति ने अमेरिका के साथ शांति प्रक्रिया पर बातचीत की थी वो भी कंधार से नाराज चल रहा है. कंधारी गुट का नेतृत्व करने वाले रक्षा मंत्री मुल्ला याकूब पाकिस्तानी आईएसआई का कोई हस्तक्षेप नहीं चाहते हैं. बता दें आईएसआई अफगानिस्तान को बतौर पाकिस्तानी कब्जे के क्षेत्र के रूप में चाहता है. वहीं मुल्ला बरादर की इच्छा है कि कतर सहित अमेरिका, यूके और पाकिस्तान के साथ जिन प्रतिबद्धताओं का जिक्र किया गया था उनका सम्मान किया जाना चाहिए और काबुल में अल्पसंख्यक और महिलाओं के प्रतिनिधित्व के साथ एक सरकार का गठन किया जाना चाहिए.

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    हक्कानी को इशारों पर नचा रहा आईएसआई
    हालांकि अफगानिस्तान में हालात पूरी तरह से अलग हैं, जहां आईएसआई हक्कानी आतंकी परिवार को अपने इशारों पर रखते हुए काबुल में सत्ता का खेल खेल रहा है. जैसा की हक्कानी नेटवर्क में जादरान जनजाति का प्रभाव है और काबुल-जलालाबाद से खैबर सीमा तक का इलाका उनके नियंत्रण में है. इस तरह हक्कानी बंधु 6000 सशस्त्र सैनिकों के साथ काबुल की सड़कों पर आतंक फैलाने में लगे हुए हैं. पाकिस्तान के द्वारा उकसाए हुए हक्कानी दूसरे समुदायों के साथ सत्ता को बंटवारा और सरकार में महिलाओं की भागीदारी नहीं चाहते हैं.

    जबकि सच्चाई यह है कि जहां सउदी अरब जैसे रूढ़िवादी देश अपने यहां महिलाओं को स्वतंत्रता दे रहे हैं वहीं तालिबान पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों के प्रभाव में आकर पिछली सहस्राब्दी की विकृत इस्लामिक विचारधारा के आधार पर देश को मध्ययुगीन काल में ले जा रहा है.

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    इसलिए और खराब हैं हालात
    अफगानिस्तान में समस्या और विकट इसलिए भी हो गई है क्योंकि सुप्रीम लीडर हैबतउल्लाह अखुंदजादा की पिछले पांच महीनों से कहीं कोई मौजूदगी दर्ज नहीं हुई है. जबकि सत्ता के बंटवारे को लेकर कंधारियों और काबुलियों के बीच अखुंदजादा अहम भूमिका निभा सकते थे. वहीं खुफिया एजेंसियों का मानना है कि हो सकता है कि सुप्रीम लीडर की हत्या कर दी गई है, खुफिया संस्थाओं के मुताबिक उसे आखिरी बार पांच महीने पहले कराची की सेना छावनी में देखा गया था.

    उधर यूके और जर्मनी जैसे देश तालिबान को मानवीय सहायता प्रदान कर पाकिस्तान तक पहुंच बनाना चाहते हैं. जबकि फ्रांस और यूरोपियन संघ के अन्य सदस्य इस्लामाबाद को बढ़ावा देने के पक्षधर नहीं है. जर्मनी को छोड़कर यूरोपियन संघ काबुल में आतंकी सरकार के थोपे जाने को लेकर पाकिस्तान से नाराज है और तब तक तालिबान से कोई नाता जोड़ने के मूड में नहीं है जब तक वहां की सरकार में महिलाओं का प्रतिनिधित्व शामिल नहीं किया जाता है.

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