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कोरोना पीड़ित ने फेसबुक पर सुनाई आपबीती, कहा- जो भी आपको बताया जा रहा है, सब झूठ है

News18Hindi
Updated: March 14, 2020, 1:15 PM IST
कोरोना पीड़ित ने फेसबुक पर सुनाई आपबीती, कहा- जो भी आपको बताया जा रहा है, सब झूठ है
एलिजाबेथ ने कोरोना वायरस के लक्षणों पर कई सवाल खड़े किए हैं.

कोरोना वायरस से पीड़ित सिएटल (Seattle) में रहने वाली एलिजाबेथ शेंडर (Elizabeth Schneider) ने अपनी एक फेसबुक पोस्ट में Covid-19 के फैलने से संबंधित कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं.

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  • Last Updated: March 14, 2020, 1:15 PM IST
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वाशिंगटन. अमेरिका में भी हर दिन कोरोना वायरस (Coronavirus) के नए मामले सामने आ रहे हैं और इसके पीड़ितों की संख्या बढ़कर एक हजार के पार चली गई है. इस बीच सिएटल (Seattle) में रहने वाली कोरोना वायरस से पीड़ित एलिजाबेथ शेंडर (Elizabeth Schneider) ने एक फेसबुक पोस्ट में Covid-19 से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. एलिजाबेथ ने दावा किया है कि वे अब ठीक हो रही हैं.

मिली जानकारी के मुताबिक, एलिजाबेथ को यूनिवर्सिटी ऑफ़ वाशिंगटन के सिएटल फ्लू स्टडी केंद्र में एक जांच के दौरान कोरोना से पीड़ित पाया गया था. इस पोस्ट में एलिजाबेथ ने दावा किया है कि न तो उन्हें खांसी थी, न ही जुकाम और न ही उन्हें छीकें आ रही थीं. इन्हीं तथ्यों के जरिये एलिजाबेथ ने कई ज़रूरी सवाल उठाए हैं.

क्या है पोस्ट में
इस फेसबुक पोस्ट में एलिजाबेथ लिखती हैं कि मेरे कई दोस्तों के अनुरोध के बाद मैंने इस पर सार्वजनिक पोस्ट लिखने का फैसला किया. जहां तक मुझे लगता है कि एक हाउ पार्टी के दौरान मैं इसके संपर्क में आई थी. हालांकि हम दोस्तों में से किसी को भी सर्दी या खांसी-जुकाम के लक्षण नहीं थे. मेरे साथ इस पार्टी में मौजूद लगभग 40% लोग कोरोना वायरस के संक्रमित पाए गए. मीडिया भले ही आपसे कहे कि हाथ धोने या शरीर साफ़ रखकर इससे बचा जा सकता है, मैंने सब किया लेकिन हम कई सारे लोग फिर भी इसकी चपेट में आ गए.







एलिजाबेथ ने इसके लक्षणों को भी उम्र के मुताबिक अलग-अलग बताया है. उन्होंने लिखा है, मेरे दोस्त जिनकी उम्र 40 या 50 तक थी, वे इसकी चपेट में आए, लेकिन मेरी उम्र 30 साल ही है. मेरे लिए इसके लक्षणों में सर दर्द, बुखार, बदन दर्द और जॉइंट पेन रहा. मुझे 103 डिग्री तक बुखार हो गया था, हालांकि मेरे कुछ दोस्तों को इससे डायरिया हो गया. इसके संपर्क में आने से मुझे चक्कर आए और गले में दर्द रहा. मेरे ऐसे बहुत ही कम दोस्त हैं, जिन्हें कोरोना के चलते चेस्ट में भारीपन या सांस लेने में किसी दिक्कत का सामना करना पड़ा हो. मैं इससे 10-16 दिन तक पीड़ित रही, सबसे बुरी बात यह थी हममें से किसी को भी कफ नहीं था, इसलिए हमने टेस्ट भी नहीं कराया, क्योंकि इसका प्रमुख लक्षण यही बताया जा रहा था.

मैंने सिएटल फ्लू स्टडी सेंटर में टेस्ट कराया, जो कि कोरोना के लिए नहीं बल्कि फ़्लू की स्टडी के लिए था. उन्होंने ही ये सैम्पल किंग काउंटी पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट भेजा, जहां मैं पॉजिटिव पाई गई थी. मुझे हेल्थ डिपार्टमेंट ने 7 दिन आइसोलेट रहने की सलाह दी है, लेकिन मैं आगे भी कुछ हफ़्तों तक लोगों और भीड़भाड़ वाली जगहों से दूरी बनाए रखूंगी. मुझे कभी भी हॉस्पिटल में भर्ती नहीं रहना पड़ा और कोरोना के सभी पीड़ितों को अस्पताल में भर्ती भी नहीं किया जा रहा है. मुझे दवाएं भी सीजनल फ्लू वाली ही दी गई थीं.


'टेस्ट की कमी से झूठी बातें फ़ैल रहीं हैं'

एलिजाबेथ आगे लिखती हैं, मुझे लगता है कि टेस्टिंग की कमी के चलते लोगों के बीच ऐसी बातें फैली हैं कि भीड़ में जाने आया फिर खांसी-जुकाम होने से उन्हें कोरोना भी हो जाएगा. बाकी कुछ लोगों में इससे लक्षण नहीं हैं, लेकिन वे कोरोना से पीड़ित हैं और उनसे दूसरे लोगों को भी ये फ़ैल रहा है. इसके अलावा जिन लोगों को भी सांस से संबंधित बीमारियां हैं उन्हें इससे बचकर रहने की ख़ास ज़रुरत है. एलिजाबेथ दावा करती हैं कि बार-बार हाथ धोना कोरोना से बचाव नहीं करता, हालांकि वे कहती हैं कि जिन भी लोगों को इसका शक हो उन्हें तुरंत लोगों से खुद को दूर कर लेना चाहिए, खासकर उनसे जिनसे वे प्यार करते हैं.

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First published: March 11, 2020, 4:43 PM IST
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