जलवायु परिवर्तन के कारण गर्म हो रही है दुनिया, हीट वेव से भारत-चीन में सबसे ज्यादा मौत!

चीन में 62 हजार तो भारत में 31 हजार लोगों की मौत हीट वेव के कारण हुई है

चीन में 62 हजार तो भारत में 31 हजार लोगों की मौत हीट वेव के कारण हुई है

Climate Change: सिर्फ 2018 में, हीट वेव (Heat Wave) यानी लू और गर्म हवा के कारण 65 साल से अधिक उम्र के करीब 2,96,000 लोगों ने अपनी जान गंवाई है. इस आंकड़े में सबसे ज्यादा लोग भारत (India) और चीन (China) के ही हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 7, 2020, 3:20 PM IST
  • Share this:

जलवायु परिवर्तन (Climate Change) की समस्या से भारत (India) और चीन (China) को सबसे ज्यादा खतरा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत और चीन में हर साल गर्मी बढ़ने का रिकॉर्ड ऊपर जा रहा है. इस साल भी भारत और चीन ने गर्मी के रिकॉर्ड को तोड़ा है. इन दोनों ही देशों में सबसे अधिक जनसंख्या है जिसके चलते जलवायु परिवर्तन का खतरा भी यहां सबसे ज्यादा है.

भारत-चीन में हीट वेव का आंकड़ा है चौंकाने वाला!

आपको बता दें कि दुनिया में गर्मी के कारण होने वाली मौत का आकंड़ा चौंकाने वाला है. अगर साल 2000 की तुलना में साल 2018 की बात करें तो गर्मी से मरने वाले लोगों की संख्या में 54 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. सिर्फ 2018 में, हीट वेव यानी लू और गर्म हवा के कारण 65 साल से अधिक उम्र के करीब 2,96,000 लोगों ने अपनी जान गंवाई है. इस आंकड़े में सबसे ज्यादा लोग भारत और चीन के ही हैं. चीन में 62 हजार तो भारत में 31 हजार लोगों की मौत हीट वेव के कारण हुई है. भारत पर जलवायु परिवर्तन का नकारात्मक प्रभाव इसी से पता चलता है कि कृषि के क्षेत्र में ज्यादा गर्मी के कारण फसलों की बहुत बर्बादी हुई है.

सबसे ठंडी जगह भी होने लगी गर्म!
धरती पर बढ़ती गर्मी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सर्बिया का वर्कहोयांस्क गांव, जहां दुनियाभर में सबसे ज्यादा ठंड पड़ती थी. वहा रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ी है. आपको बता दें कि पहले इस गांव में -67.8 डिग्री तक पारा पहुंच जाता था मगर अब यहां गर्मी भी बहुत पड़ने लगी है.

इसी साल जून के महीने में ये गांव आर्कटिक के उत्तरी क्षेत्र का सबसे गर्म क्षेत्र बन गया था. यहां का तापमान 38 डिग्री तक पहुंच गया था. ये यहां का अब का सबसे गर्म तापमान था. इस तापमान ने वैज्ञानिकों को चौंका दिया था. हैरानी की बात ये भी है कि इस गांव में न्यूनतम और अधिकतम तापमान के बीच का फर्क 100 डिग्री तक जा चुका है. वो भी कुछ सालों में. वैज्ञानिकों का मानना है कि ये जलवायु परिवर्तन के कारण हुआ है.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज