US की धमकी- NATO के रडार पर है चीन, भारत-अमेरिका संबंध बिगाड़ना चाहता है

US की धमकी- NATO के रडार पर है चीन, भारत-अमेरिका संबंध बिगाड़ना चाहता है
चीन पर कड़ी नज़र रख रहा है नाटो

नाटो (NATO) में अमेरिका (US) की स्थायी प्रतिनिधि के बैली हचिसन (Kay Bailey Hutchison) ने कहा कि चीन (China) अपने आक्रामक रवैये के चलते नाटो के रडार पर आया है और इससे पहले संगठन ने कभी उसे इतना बड़ा खतरा नहीं माना था.

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  • Last Updated: June 19, 2020, 12:06 PM IST
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वॉशिंगटन. उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) में अमेरिका (US) की एक शीर्ष दूत ने कहा है कि चीन (China) नाटो सेनाओं के रडार पर है और उसके हर कदम पर बारीक नज़र रखी जा रही है. नाटो में अमेरिका की स्थायी प्रतिनिधि के बैली हचिसन (Kay Bailey Hutchison) ने कहा कि चीन अपने आक्रामक रवैये के चलते नाटो के रडार पर आया है और इससे पहले संगठन ने कभी उसे इतना बड़ा खतरा नहीं माना था. उधर एक एक प्रभावशाली अमेरिकी थिंक-टैंक ने चेतावनी दी है कि चीन का अगला निशाना भारत-अमेरिका के बीच संबंधों को बिगाड़ना है, इसे लेकर दोनों देशों को सतर्क रहना होगा

बैली हचिसन ने कहा, 'चीन एक शांतिपूर्ण साझीदार, एक अच्छा व्यापार सहयोगी हो सकता था, लेकिन वह इस समय ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा है. मुझे लगता है कि नाटो सहयोगी इस पर नजर रख रहे हैं और इस बात का आकलन कर रहे हैं कि चीन क्या कर रहा है.' हचिसन ने ताइवान, जापान और भारत के खिलाफ चीन के आक्रामक एवं उकसाने वाले कदमों पर कहा, 'वह हमारे रडार पर है और मुझे लगता है कि ऐसा होना चाहिए क्योंकि हमें जोखिम का आकलन करना चाहिए. हमें सबसे अच्छा होने की उम्मीद करनी चाहिए, लेकिन सबसे खराब के लिए तैयार रहना चाहिए.' यह पूछे जाने पर कि क्या वास्तविक सैन्य संघर्ष का खतरा निकट है, उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि नाटो इस मामले में अब पूर्व की ओर देख रहा है.'

चीन का इरादा जानने की कोशिश जारी
हचिसन ने कहा कि नाटो इस बात को लेकर चिंतित है कि चीन का इरादा क्या है. उन्होंने कहा कि अमेरिका इस बात को लेकर बहुत स्पष्ट है कि वह चीन को वैश्विक व्यवस्था में साझीदार बनाना चाहता है और यह ज्ञात है कि चीन ने बौद्धिक संपदा की चोरी की है और विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं विश्व की अदालतों द्वारा तय शुल्कों एवं सब्सिडी का उल्लंघन किया है. उन्होंने 5जी नेटवर्क के बारे में कहा, 'हम हमारे संचार को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं और देख रहे हैं कि हमारे कुछ चीनी प्रतिद्वंद्वी संचार प्रदाताओं द्वारा तैयार किए गए संविदात्मक दायित्वों को नियंत्रित करने में सक्षम नहीं हैं.
भारत-अमेरिका के संबंध ख़राब करना चाहता है चीन


लद्दाख में भारतीय क्षेत्र में चीनी घुसपैठ के बीच एक प्रभावशाली अमेरिकी थिंक-टैंक ने कहा है कि चीन का 'तत्काल लक्ष्य' दक्षिण एशिया में भारत की हर प्रकार की 'चुनौती' को सीमित करना और अमेरिका के साथ उसके तेजी से मजबूत होते संबंधों को बाधित करना है. हडसन इंस्टीट्यूट की 'कोरोना वायरस काल में अमेरिका और चीन के बीच प्रतिद्वंद्विता का वैश्विक सर्वेक्षण' शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की पाकिस्तान के साथ मजबूत साझीदारी और श्रीलंका के साथ मजबूत संबंध क्षेत्र में प्रभुत्व की चीन की योजनाओं के लिए अहम है.

 

इस सप्ताह जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि खाड़ी एवं पश्चिमी हिंद महासागर में अमेरिका की श्रेष्ठता को चुनौती देने के चीन के वृहद रणनीतिक लक्ष्य के लिए दक्षिण एशिया बहुत अहम है. रिपोर्ट में इस बात का अध्ययन किया गया है कि चीन दुनिया में 'राजनीतिक, रणनीतिक एवं आर्थिक लाभ के लिए वैश्विक महामारी का इस्तेमाल' करने की किस प्रकार कोशिश कर रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण एशिया में चीन का 'तत्काल लक्ष्य विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की हर प्रकार की चुनौती को सीमित करना और अमेरिका के साथ उसकी तेजी से मजबूत होती साझीदारी को बाधित करना है.' रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण एशिया में चीन के लिए भारत असल चुनौती है.

दक्षिण एशिया में भारत है चीन के लिए चुनौती
रिपोर्ट में कहा गया है, 'भारत परम्परागत रूप से चीन को अपने से उच्च समझने के बजाए समान समझता है और वह बीजिंग के लक्ष्यों को लेकर सचेत है एवं अपने क्षेत्र में चीन के घुसने की कोशिशों को संदेह से देखता है. चीन के साथ क्षेत्र को लेकर विवाद के कारण संबंधों में तनाव पैदा हुआ है. इससे सहयोगात्मक माहौल के बजाए प्रतिद्वंद्वी माहौल पैदा होता है.' रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि इसके लिए भारत को अमेरिका और जापान जैसे सहयोगियों की मदद की आवश्यकता है. इसमें कहा गया है कि यदि अमेरिका चाहता है कि भारत क्षेत्रीय सुरक्षा प्रदाता के तौर पर भूमिका निभाए और यदि वह चीन पर निर्भरता कम करना चाहता है, तो भारत की आर्थिक एवं सैन्य क्षमताएं विकसित करना अहम होगा.

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इस रिपोर्ट का दक्षिण एशिया संबंधी हिस्सा तैयार करने वाले विशेषज्ञों में भारतीय मूल की विद्वान डॉ. अपर्णा पांडे और अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी भी शामिल हैं. लद्दाख की गलवान घाटी में हिंसक झड़प के बाद चीन को कड़ा संदेश देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा था कि शहीद हुए भारतीय सैनिकों के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देंगे. प्रधानमंत्री ने कहा था कि भारत शांति चाहता है लेकिन उकसाये जाने पर यथोचित जवाब देने में सक्षम है. भारत ने बुधवार को चीन को दिए गए कठोर संदेश में कहा कि गलवान घाटी में हुई अप्रत्याशित घटना का द्विपक्षीय संबंधों पर गहरा प्रभाव पड़ेगा. साथ ही उसने यह भी कहा कि उस हिंसा के लिए चीन की 'पूर्व नियोजित' कार्रवाई सीधे तौर पर जिम्मेदार है, जिसमें भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हुए.

 
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