भारत-चीन सीमा विवाद: अब राजनयिक स्तर पर होगी बातचीत, WMCC की बैठक संभव!

चीन और भारत के बीच अब राजनयिक बातचीत संभव
चीन और भारत के बीच अब राजनयिक बातचीत संभव

भारत-चीन सीमा विवाद सुलझाने के लिये सैन्य स्तर पर तीन बैठकों के बाद अब एक बार फिर नज़र राजनयिक स्तर पर बातचीत पर होगी. जल्द ही दोनों देशों के बीच वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंन्सल्टेशन ऐंड कॉर्डिनेशन (WMCC) फ्रेमवर्क के तहत बातचीत संभव है.

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नई दिल्ली. भारत-चीन सीमा विवाद (Indian-China Border Dispute) सुलझाने के लिये सैन्य स्तर पर तीन बैठकों के बाद अब एक बार फिर नज़र राजनयिक स्तर पर बातचीत पर होगी. जल्द ही दोनों देशों के बीच वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंन्सल्टेशन ऐंड कॉर्डिनेशन (Working Mechanism For Consultation and Co-ordination)  फ्रेमवर्क के तहत बातचीत संभव है. भारत और चीन के बीच राजनयिक स्तर पर बॉर्डर मसले पर स्थापित डब्ल्यूएमसीसी दोनों देशों के बीच सीमा क्षेत्र के प्रबंधन के लिये एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है.

भारत और चीन के बीच डब्ल्यूएमसीसी की स्थापना वर्ष 2012 में हुई

साल 2012 से भारत और चीन के बीच डब्ल्यूएमसीसी की स्थापना की गई. दोनों देशों के बीच बॉर्डर से जुड़े प्रबंधन, समन्वय और संपर्क के लिये ये संस्थागत व्यवस्था है. इसके अलावा सहयोग और संपर्क को मजबूत करने के लिये विचारों के आदान प्रदान और बॉर्डर पर तैनात सुरक्षा बलों के संबंध में भी राजनयिक स्तर पर एक व्यवस्था है.



अब तक WMCC कुल 15 बैठकें हो चुकी हैं
डब्ल्यूएमसीसी की 2012 से लेकर अब तक कुल 15 बैठकें हो चुकी हैं और भारत-चीन के बीच मौजूदा सीमा विवाद के बाद पहली वर्चुअल बैठक 24 जून को हुई थी. भारत की तरफ से बैठक में विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव स्तरीय अधिकारी जबकि चीन की विदेश मंत्रालय की तरफ से सीमा और महासागर मामलों से जुड़े विभाग के महानिदेशक बैठक में हिस्सा लेते हैं.

डब्ल्यूएमसीसी फ्रेमवर्क के तहत होगी बातचीत- भारत

भारत और चीन दोनों मौजूदा सीमा विवाद में सैन्य और राजनयिक स्तर की नियमित बातचीत के जरिये शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत का संकल्प दोहरा चुके हैं. भारत कह चुका है कि ये बातचीत डब्ल्यूएमसीसी फ्रेमवर्क के तहत ही होगी.

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दरअसल भारत-चीन सीमा विवाद भारतीय कूटनीति के लिये एक बड़ी परीक्षा है और इस परीक्षा में डब्ल्यूएमसीसी व्यवस्था की बड़ी भूमिका है.
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