India-China Faceoff: चीन अब LAC पर तैनात सैनिकों के लिए बना रहा है एडवांस बॉडी आर्मर

India-China Faceoff: चीन अब LAC पर तैनात सैनिकों के लिए बना रहा है एडवांस बॉडी आर्मर
वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर मई और जून में गलवान और पैंगोंग त्सो के अलावा कई और जगहों पर भी झड़प हुई

India-China Faceoff: कॉपी करने में माहिर चीन की नजर तो उन बॉडी आर्मर (Advance Body Armour) की तरफ भी है, जो कि भारतीय सेना को मुहैया कराए गए हैं. हाल ही में भारत-चीन बॉर्डर पर तैनात भारतीय सैनिकों को भी नए सेफ्टी गियर (बॉडी आर्मर) दिए गए हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 19, 2020, 2:21 PM IST
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नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी (Ladakh Galwan Valley) में बीते 15 जून की रात हुई हिंसक झड़प (India-China Faceoff) में चीनी सैनिकों को भारतीय सेना (Indian Army) से मुंहतोड़ जवाब मिला था. कई दौर की बातचीत के बाद चीन को हिंसक झड़प वाली जगह से पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा. अब इंटेलिजेंस एजेंसियों को मिली जानकारी के मुताबिक, चीन अपने सैनिकों के लिए एडवांस बॉडी आर्मर (शरीर कवच) डेवलप कर रहा है. जानकारी के मुताबिक, पीएलए सिक्स जनरेशन बॉडी आर्मर बना रही है. इन्हें खास तौर पर तिब्बत मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट (टीएमडी) में तैनात सैनिकों को दिया जाएगा. तिब्बत मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट एलएसी के पास का इलाका है.

बॉडी आर्मर को ये ध्यान मे रखकर तैयार किया जा रहा है कि किसी भी संघर्ष के दौरान उसके सैनिकों के शरीर के ऊपरी हिस्से के अलावा हाथों को और शरीर के संवेदनशील हिस्सों को कवर किया जा सके. यही नहीं, कॉपी करने में माहिर चीन की नजर तो उन बॉडी आर्मर की तरफ भी है, जो कि भारतीय सेना को मुहैया कराए गए हैं. हाल ही में भारत-चीन बॉर्डर पर तैनात भारतीय सैनिकों को भी नए सेफ्टी गियर (बॉडी आर्मर) दिए गए हैं.

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बता दें कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव के बीच 15 जून को दोनों देशों के बीच हुई खूनी झड़प में भारत के 20 सैनिक शहीद हुए थे. जबकि चीन के भी कई सैनिकों की जानें गई थीं और कई घायल हुए थे. हालांकि, चीन ने आधिकारिक रूप से अपने मारे गए सैनिकों की संख्या नहीं बताई है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया के मुताबिक, इस झड़प में चीन के 35 से 40 सैनिक मारे गए थे. इस झड़प के दौरान चीन के सैनिकों के डंडों और पत्थरों का इस्तेमाल किया.
वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर मई और जून में गलवान और पैंगोंग त्सो के अलावा कई और जगहों पर भी झड़प हुई. इस तरह की झड़पें पहले भी कई बार हो चुकी हैं, लेकिन जान माल का इतना बड़ा नुकसान पहली बार देखा गया. भारत और चीन के बीच एलएसी समझौता है कि वो एक दूसरे पर फायर आर्म का इस्तेमाल नहीं करेंगे.

इसके लिए बाक़ायदा रूल ऑफ़ एंगेजमेंट बनाया गया था, जिसके तहत एक दूसरे के इलाकों में पेट्रोलिंग के दौरान फैसऑफ की स्थिति बनती थी, तो उसे बैनर ड्रिल और सेना के स्तर पर बातचीत के आधार पर सुलझाया जाता रहा है, लेकिन गलवान की घटना के बाद से भारतीय सेना ने भी अपने रूल ऑफ़ एंगेजमेंट को बदला. अब लोकल कमांडरों को साफ हिदायत दी गई है कि हालात के मद्देनज़र वो किसी भी तरह की कार्रवाई कर सकती है, जिसमें हथियारों का इस्तेमाल भी शामिल है.

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बहरहाल, हालात एलएसी पर पहले जैसे ही बने हुए हैं. दोनों देशों की सेना अब भी उन इलाकों में डटी है, जहां पर 100 दिन पहले थी. माना जा रहा है कि सैन्यस्तर की बातचीत फ़ेल हो चुकी है. अब कूटनीति के सहारे चीन को भारतीय जमीन से हटाने की कोशिशें तेज़ हैं.
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