अमेरिका ने स्पष्ट किया, भारत-चीन सीमा विवाद में मध्यस्थता नहीं करेंगे ट्रंप

अमेरिका ने स्पष्ट किया, भारत-चीन सीमा विवाद में मध्यस्थता नहीं करेंगे ट्रंप
भारत-चीन सीमा विवाद में मध्यस्थता नहीं करेंगे ट्रंप

India-China border faceoff: व्हाइट हाउस (White House) ने बुधवार देर शाम स्पष्ट कर दिया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump)का फिलहाल भारत-चीन विवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभाने का कोई इरादा नहीं है. व्हाइट हाउस ने कहा कि अभी ऐसी कोई योजना नहीं है और राष्ट्रपति ने इस बारे में कोई बातचीत नहीं की है.

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वाशिंगटन. भारत और चीन के बीच जारी सीमा विवाद (Inida-China Border Dispute) और गलवान वैली (Galwan Valley) में सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद बुधवार को अमेरिका (US) ने कहा था कि वह पूरी स्थिति पर गंभीरता से नज़र बनाए हुए है. हालांकि व्हाइट हाउस ने बुधवार देर शाम स्पष्ट कर दिया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump)का फिलहाल भारत-चीन विवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभाने का कोई इरादा नहीं है. व्हाइट हाउस ने कहा कि अभी ऐसी कोई योजना नहीं है और राष्ट्रपति ने इस बारे में कोई बातचीत नहीं की है.

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैली मेकनैनी ने एक पत्रकार के सवाल के जवाब में कहा कि राष्ट्रपति फ़िलहाल भारत-चीन के बीच मध्यस्थ की भूमिका के बारे में नहीं सोच रहे हैं. हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस बारे में बातचीत की है. बता दें कि बीते महीने ही ट्रंप ने कहा था कि अगर भारत और चीन चाहे तो वे खुद सीमा विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थ बनने के लिए तैयार हैं. हालांकि भारत और चीन दोनों ने ही इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था. भारत ने कहा था कि चीन के साथ पहले ही उसकी बातचीत जारी है जबकि चीन ने अमेरिका को उसके मामलों से दूर रहने की सलाह दी थी. चीन ने कहा था कि भारत उसका पड़ोसी है और द्विपक्षीय मुद्दों पर किसी तीसरे के दखल की कोई ज़रुरत ही नहीं है.

चीन उकसा रहा है पड़ोसी देशों को!
इससे पहले एशियाई मामलों पर एक पूर्व शीर्ष अमेरिकी राजनयिक ने भारत एवं चीन की सीमा पर तनाव बढ़ने के मद्देनजर कहा है कि चीन ऐसे समय में अपने पड़ोसियों को उकसा रहा है और उन पर 'प्रहार कर रहा है', जब हर कोई यह अपेक्षा करता है कि चीन टकराव से बचकर देश की अर्थव्यस्था पर ध्यान केंद्रित करेगा. ‘एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट’ के उपाध्यक्ष डेनियल रसेल ने कहा, 'चीन ऐसे समय में पड़ोसियों को उकसा रहा है और उन पर प्रहार कर रहा है, जब आप सोचते हैं कि बीजिंग टकराव कम करना चाहेगा और घरेलू अर्थव्यवस्था पर ध्यान केंद्रित करेगा. इसके बजाए, (चीन के राष्ट्रपति) शी जिनपिंग चीनी राष्ट्रवाद को लेकर सोची समझी अपील कर रहे हैं और यह गणना करते प्रतीत हो रहे हैं कि चीन इन कदमों के परिणामों से निपट सकता है.'
रसेल पूर्वी एशियाई एवं प्रशांत मामलों के लिए विदेश मंत्रालय के सहायक सचिव के रूप में सेवाएं दे चुके हैं. चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के बीच 2020 की पहली तिमाही में चीन के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 6.8 प्रतिशत की गिरावट आई है. यह देश में 1976 की सांस्कृतिक क्रांति के बाद से जीडीपी में सर्वाधिक गिरावट है. उधर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर हिंसा और मौत की खबरों पर चिंता जताई और दोनों पक्षों से 'अधिकतम संयम” बरतने का आग्रह किया. संयुक्त राष्ट्र महासचिव की सहायक प्रवक्ता एरी कनेको ने कहा, 'भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर हिंसा और मौत की खबरों पर हम चिंता प्रकट करते हैं और दोनों पक्षों से अधिकतम संयम बरतने का आग्रह करते हैं.'



 

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