अर्मेनिया और अजरबैजान की लड़ाई पर भारत ने जताई चिंता, बताया- क्षेत्रीय शांति को खतरा

आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच युद्ध जारी है.
आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच युद्ध जारी है.

Armenia-Azerbaijan Conflict: अजरबैजान की सीमा में मौजूद आर्मीनियाई जाति के लोगों के इलाके में रविवार सुबह से शुरू हुई इस लड़ाई में अब तक आर्मीनिया के 550 से अधिक सैनिक हताहत हुए हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 1, 2020, 7:21 PM IST
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नई दिल्ली. आर्मीनिया (Armenia) और अजरबैजान (Azerbaijan) के बीच विवादित क्षेत्र नागोरनो-काराबाख (Nagorno Karabakh) को लेकर हो रही लड़ाई को लेकर भारत ने चिंता जाहिर की है. भारत का कहना है कि इससे क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा प्रभावित होगी. भारतीय विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने गुरुवार को साप्ताहिक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हमने अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच फिर से शुरू हुई दुश्मनी की खबरों को देखा है. भारत इस स्थिति से चिंतित है, इसने क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को खतरा दिया है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम दोनों पक्षों से तत्काल शत्रुता को खत्म करने की आवश्यकता को दोहराते हैं.

अजरबैजान की सीमा में मौजूद आर्मीनियाई जाति के लोगों के इलाके में रविवार सुबह से शुरू हुई इस लड़ाई में अब तक आर्मीनिया के 550 से अधिक सैनिक हताहत हुए हैं. हालांकि आर्मीनिया के अधिकारियों ने इस दावे को खारिज किया है. आर्मीनिया ने यह दावा भी किया कि अजरबैजान के चार हेलिकॉप्टरों को मार गिराया गया. वर्ष 1994 में अलगाववादी युद्ध समाप्त होने के बाद से ही यह इलाका आर्मीनिया समर्थित आर्मिनियाई जाति के लोगों के नियंत्रण में है. हालांकि, अभी तक स्पष्ट नहीं है कि किस वजह से लड़ाई शुरू हुई. जुलाई में दोनों पक्षों के बीच संघर्ष के बाद यह सबसे बड़ी लड़ाई है. जुलाई में दोनों पक्षों के कुल 16 लोगों की मौत हुई थी. अजरबैजान के कुछ क्षेत्रों में मार्शल लॉ लगाया गया है तथा कुछ प्रमुख शहरों में कर्फ्यू के आदेश भी दिए गए हैं.

स्थानीय लोगों का अजरबैजान के कुछ इलाकों पर भी कब्जा
उल्लेखनीय है कि नगोरनो-करबाख अजरबैजान में आर्मीनियाइ जाति के लोगों का एन्क्लेव है और वर्ष 1994 में युद्ध समाप्त होने के बाद से ही अजरबैजान के नियंत्रण से बाहर है. दोंनों पक्षों ने इलाके को शेष अजरबैजान से अलग करने वाले विसैन्यकृत क्षेत्र के पास सैनिकों की भारी संख्या में तैनाती कर रखी है. अधिकतर पहाड़ी इलाके से घिरा नगोरनो-करबाख 4,400 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और आर्मीनिया की सीमा से करीब 50 किलोमीटर दूर है. आर्मीनिया की सेना से समर्थन पाकर स्थानीय लोगों ने अजरबैजान के कुछ इलाकों पर भी कब्जा कर रखा है.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने किया संघर्ष रोकने का विरोध


संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आर्मीनिया और अजरबैजान से अनुरोध किया कि वे विवादित क्षेत्र नागोरनो-काराबाख को लेकर जारी संघर्ष तत्काल रोक दें. संयुक्त राष्ट्र के सबसे शक्तिशाली निकाय ने बलों के इस्तेमाल की कड़ी निंदा करते हुए महासचिव एंतोनियो गुतारेस के लड़ाई को फौरन रोकने और अर्थपूर्ण वार्ता के लिये आगे आने के अनुरोध का समर्थन किया.



इस ताजा संघर्ष की वजह से हाल में इस विवाद को सुलझाने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों को झटका लगा है.
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