भारत में 'मिक्स एंड मैच' कोरोना वैक्सीन पर चल रहा विचार, Pfizer-AstraZeneca ट्रायल के मिले अच्छे संकेत

सरकार ने अगस्त से दिसंबर के बीच 216 करोड़ खुराक उपलब्ध कराने की अपनी योजना की घोषणा की है.

सरकार ने अगस्त से दिसंबर के बीच 216 करोड़ खुराक उपलब्ध कराने की अपनी योजना की घोषणा की है.

CNN-News18 से बात करते हुए हेल्थ एक्सपर्ट ने कहा, वैज्ञानिक तरीके से ऐसा संभव है और भारत में ये बहुत उपयोगी रहेगा. उन्‍होंने बताया कि भारत और विदेशों में इसे लेकर जारी रिसर्च पर नजर रखी जा रही है.

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Covid-19 Vaccination in India: कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच राहत भरी खबर है. एक टॉप हेल्‍थ एक्‍सपर्ट के अनुसार, सरकार कोरोना वायरस के वैक्सीन की पहली और दूसरी डोज के लिए मिक्स एंड मैच पर विचार कर रही है. CNN-News18 से बात करते हुए हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया कि वैज्ञानिक तरीके से ऐसा संभव है और भारत में ये बहुत उपयोगी रहेगा. उन्‍होंने बताया कि भारत और विदेशों में इसे लेकर जारी रिसर्च पर नजर रखी जा रही है.

केंद्र सरकार के हेल्थ एक्सपर्ट का सुझाव ऐसे समय पर आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका (Oxford-AstraZeneca) और फाइजर-बायोएनटेक (Pfizer-BioNTech) टीकों के मिक्स एंड मैच (दोनों को मिलाकर एक टीका) बनाने पर काम किया जा रहा है.

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हेल्थ एक्सपर्ट ने कहा, 'वैज्ञानिक दृष्टि से मिक्स एंड मैच स्ट्रैटजी पर काम किया जा सकता है, लेकिन भारत में हमें इस पर अभी रिसर्च की जरूरत है. यह निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता कि डोज मिक्‍स करनी चाहिए. अभी इसके लिए वैज्ञानिक सबूत नहीं है. समय ही बताएगा कि भविष्‍य में ऐसा होगा या नहीं. यह अंतरराष्‍ट्रीय शोधों, विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के निष्‍कर्षों पर निर्भर करेगा.'
उन्होंने कहा कि ऐसी स्टडी कुछ हफ्तों में शुरू हो सकती है और इससे वैक्सीन को लेकर देश की बड़ी जरूरतें पूरी हो सकेंगी. साल के आखिर में कम से कम आठ टीके आने की उम्मीद है.

भारत के लिए संभावनाएं

सरकार ने अगस्त से दिसंबर के बीच 216 करोड़ खुराक उपलब्ध कराने की अपनी योजना की घोषणा की है. इस योजना में कम से कम आठ वैक्सीन कंपनियां शामिल हैं- कोविशील्ड (पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा स्थानीय रूप से निर्मित ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन), कोवैक्सीन (भारत बायोटेक द्वारा निर्मित), रूस की स्पूतनिक-V, भारत बायोटेक की इंट्रानैसल वैक्सीन, बायोई की सबयूनिट वैक्सीन, ज़ायडस कैडिला की डीएनए वैक्सीन, नोवावैक्स वैक्सीन और जेनोवा की एमआरएनए वैक्सीन.



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सरकार की इस सूची में फाइजर-बायोएनटेक, जॉनसन एंड जॉनसन (जेएंडजे) और मॉडर्ना के टीके शामिल नहीं थे. अप्रैल में केंद्र ने इन टीकों के आपातकालीन उपयोग की भी मंजूरी दे दी. ये पहले से ही अमेरिका, यूरोप, जापान और यूके में नियामकों या विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की आपातकालीन सूची में उल्लिखित हैं. हैदराबाद स्थित बायोई ने भारत में यूएस मल्टीनेशनल की वैक्सीन बनाने के लिए J&J के साथ पार्टनरशिप की है.

हेल्थ एक्सपर्ट ने आगे बताया, 'वर्तमान में, डेटा केवल एस्ट्राजेनेका और फाइजर (वैक्सीन) के मिक्स एंड मैच पर उपलब्ध है. भारत में ऐसा करने से पहले हमें विभिन्न प्लेटफॉर्मों के टीकों को स्टडी करना होगा. सैद्धांतिक रूप से यह एक अच्छा तरीका है, लेकिन हमें इस बात का ठोस सबूत देना होगा कि टीकों को मिलाना व्यक्तियों और समुदाय में वायरस के ट्रांसमिशन को रोकने में कारगर साबित होगा.'

दरअसल, कुछ स्‍टडीज में यह बात सामने आई है कि अलग-अलग वैक्‍सीन को मिक्‍स करने से कोविड-19 के खिलाफ ज्‍यादा सुरक्षा मिलती है. स्‍पेन में रिसर्चर्स ने पाया कि लोगों को ऑक्‍सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका और फाइजर-बायोएनटेक, दोनों के टीक लगाना सुरक्षित है और बेहतर इम्‍युन रेस्‍पांस ट्रिगर होता है. हालांकि अभी इस रिसर्च के नतीजे किसी जर्नल में नहीं छपे हैं.

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ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने पाया कि अगर दो टीकों को मिक्‍स किया जाए तो कोई बड़ा खतरा नहीं है. मगर साइड इफेक्‍ट्स जरूर बढ़ सकते हैं. 'द लैंसेट' में छपे लेख के अनुसार, रिसर्चर्स ने वॉलंटियर्स को पहले ऑक्‍सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की डोज दी और उसके बाद फाइजर-बायोएनटेक की. ऐसे लोगों में साइड इफेक्‍ट्स ज्‍यादा दिखे जो कि जल्‍द ही दूर भी हो गए. वैक्‍सीन का क्रम बदलने पर भी नतीजों में बदलाव नहीं दिखा.

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