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दुनिया की सबसे बड़ी फ्री ट्रेड डील RCEP में शामिल नहीं होगा भारत, कहा- 'नहीं कर सकते अपने हितों से समझौता'

News18Hindi
Updated: November 4, 2019, 7:34 PM IST
दुनिया की सबसे बड़ी फ्री ट्रेड डील RCEP में शामिल नहीं होगा भारत, कहा- 'नहीं कर सकते अपने हितों से समझौता'
नोंथाबरि, थाईलैंड में आसियान सम्मेलन के दौरान बोलते पीएम मोदी (फोटो क्रेडिट- AP)

सरकारी सूत्रों ने यह भी बताया है कि जब व्यापार (Trade) से संबंधित मामलों में भारतीय वार्ताकार (Indian Negotiators) अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के दबाव में आ जाया करते थे. इस बार भारत फ्रंटफुट पर खेला है, उसने व्यापार घाटे (Trade Deficits) के संबंध में भारत की चिंताओं की चर्चा किए जाने पर जोर दिया है

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  • Last Updated: November 4, 2019, 7:34 PM IST
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बैंकॉक. पीएम मोदी (PM Modi) आसियान सम्मेलन (ASEAN Summit) में हिस्सा लेने के लिए बैंकॉक (Bangkok) गए हुए हैं. यहां पर 16 देशों के बीच व्यापार को लेकर होने वाले अब तक के सबसे बड़े समझौते RCEP (Regional Comprehensive Economic Partnership) से जुड़े पहलुओं पर भी भारत को बातचीत करनी थी. कहा जा रहा था कि इस पर भारत यहीं हस्ताक्षर कर सकता है लेकिन अब भारत ने इसपर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया है.

साथ ही भारत ने यहां पर 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' (Most favoured Nation- MFN) के दायित्वों की उपयोगिता पर भी सवाल खड़े किए हैं. क्योंकि इस नई व्यवस्था में भारत को रीजनल कॉम्प्रिहैंसिव इकॉनमिक पार्टनरशिप (RCEP) देशों को भी वही छूटें देनी होंगीं, जो वह अन्य देशों को देता है.

अपने गरीबों की रक्षा करने और सेवा क्षेत्र को फायदा देने के लिए उठाया ये कदम
सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत का पक्ष व्यावहारिकता और अपने गरीबों के हितों की रक्षा करने की जरूरतों और भारत के सेवा क्षेत्र को फायदा देने के प्रयासों का मिलाजुला परिणाम है. जबकि वह अलग-अलग सेक्टरों में वैश्विक कंपटीशन (Global Competition) करने से घबरा नहीं रहा है.

सरकारी सूत्रों ने यह भी बताया है कि जब व्यापार से संबंधित मामलों में भारतीय वार्ताकार (Indian negotiators) अंतरराष्ट्रीय शक्तियों (Global Powers0 के दबाव में आ जाया करते थे. इस बार भारत फ्रंटफुट पर खेला है, उसने व्यापार घाटे के संबंध में भारत की चिंताओं की चर्चा किए जाने पर जोर दिया है और देशों को भारतीय सेवाओं और निवेश के लिए अपने बाजार खोलने चाहिए इस बात पर बल दिया है.



चीनी सामान के चलते डरा हुआ था भारत
बता दें कि भारत को डर कि अगर अपने बाजारों के लिए उसने चीनी सामान की बड़ी आमद को छूट दे दी तो वह पूरी तरह से भारतीय बाजार पर छा जाएगा जिससे भारत के छोटे व्यापारियों पर बड़ी आफत आएगी साथ ही चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे में भी इससे नुकसान होगा.

गरीबों के संरक्षण की बात उठा रहा है भारत
सूत्रों ने कहा कि इस मंच पर भारत का रुख काफी व्यावहारिक रहा है. भारत ने जहां गरीबों के हितों के संरक्षण की बात की वहीं देश के सेवा क्षेत्र को लाभ की स्थिति देने का भी प्रयास किया. भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में वैश्विक प्रतिस्पर्धा को खोलने में कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाई. इसके साथ ही मजबूती से यह बात रखी कि इसका जो भी नतीजा आए वह सभी देशों और सभी क्षेत्रों के अनुकूल हो.

 



आरसीईपी में दस आसियान देश और उनके छह मुक्त व्यापार भागीदार चीन, भारत, जापान, दक्षिण, कोरिया, भारत, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं. आरसीईपी करार का मकसद दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाना है. 16 देशों के इस समूह की आबादी 3.6 अरब है। यह दुनिया की करीब आधी आबादी है.

शनिवार को हुई बैठक में 16 आरसीईपी देशों के व्यापार मंत्री भारत द्वारा उठाए गए लंबित मुद्दों को हल करने में विफल रहे थे. हालांकि, आसियन शिखर बैठक से अलग कुछ लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए पर्दे के पीछे बातचीत जारी थी.

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First published: November 4, 2019, 7:13 PM IST
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