रूस के व्‍लादिवस्‍तोक में दूतावास खोलने वाला पहला देश बना भारत, जानें क्‍यों जरूरी है हमारे लिए

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Updated: September 5, 2019, 7:14 PM IST
रूस के व्‍लादिवस्‍तोक में दूतावास खोलने वाला पहला देश  बना भारत, जानें क्‍यों जरूरी है हमारे लिए
चेन्‍नई से व्‍लादिवस्‍तोक पोर्ट की दूरी 10300 किमी है.

व्‍लादिवस्‍तोक (Vladivostok) में पीएम मोदी (Narendra Modi) का राष्‍ट्रपति पुतिन के द्वारा किया गया स्‍वागत काफी चर्चा में रहा. इस जगह भारत ने अपना कॉन्‍सुलेट खोला है. और ऐसा करने वाला भारत दुनिया का पहला देश है.

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  • Last Updated: September 5, 2019, 7:14 PM IST
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नई दिल्‍ली, व्‍लादिवस्‍तोक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की रूस  यात्रा खत्‍म हो चुकी है. लेकिन ये यात्रा दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से काफी अहम रही. खासकर रूस के इस दूर दराज इलाके में मौजूद व्‍लादिवस्‍तोक में पीएम मोदी का राष्‍ट्रपति पुतिन (Vladimir Putin) के द्वारा किया गया स्‍वागत काफी चर्चा में रहा. इस जगह भारत ने अपना वाणिज्‍यिक दूतावास खोला है. और ऐसा करने वाला भारत दुनिया का पहला देश है. इस बात की घोषणा करते हुए पीएम मोदी ने दोनों देशों के वर्षों पुराने संबंधों का जिक्र किया.

पीएम मोदी ने कहा, राष्ट्रपति पुतिन का Far East के प्रति लगाव और विजन केवल इस क्षेत्र के लिए ही नहीं, अपितु भारत जैसे रूस के पार्टनर्स के लिए अभूतपूर्व अवसर लेकर आया है. रूस और फार ईस्ट का रिश्ता बहुत पुराना है. भारत पहला देश है, जिसने व्लादिवस्तोक में अपना कांसुलेट खोला है.
सोवियत रूस के समय भी व्लादिवस्तोक के जरिए बहुत सामान भारत पहुंचता था. आज इसकी भागीदारी और भी बढ़ गई है. यह दोनों देशों की सुख-समृद्धि का सहारा बन रहा है.

भारत के लिए क्‍यों जरूरी है व्‍लादिवस्‍तोक

व्‍लादिवस्‍तोक भारत के लिए काफी अहम क्षेत्र साबित हो सकता है. यहां पर फिशिंग के अलावा पेट्रोलियम पदार्थों को यूरोपियन देशों में भेजा जाता है. यह रूस के सुदूर पूर्वी इलाके में मौजूद है. इसकी सीमा चीन और उत्‍तर कोरिया से लगती है. पीएम मोदी और राष्‍ट्रपति पुतिन की मौजूदगी में हुए समझौते के तहत व्‍लादिवस्‍तोक और चेन्‍नई के बीच शुरू होने वाले समुद्री रास्‍ते से दोनों देशों के बीच व्‍यापार की एक नई शुरुआत होगी. इस रास्‍ते के शुरू होने से भारत और रूस के व्‍यापार संबंध नई ऊंचाईयों पर पहुंच सकेंगे. इसके अलावा इन दोनों पोर्ट पर नई व्‍यापारिक शुरुआत होगी.



भारत रूस के सहयोग से तमिलनाडु के कुडनकुलम में न्‍यूक्‍लियर पावर प्‍लांट लगा रहा है. इस समुद्री रास्‍ते के खुलने से इसमें बहुत मदद मिलेगी. इसके अलावा इस समुद्री रास्‍ते से व्‍यापार संबंध भी मजबूत होगा. इसके साथ ही भारत की इंडो पेसेफिक के अलावा दक्षिणी चीन सागर में भी भारत की उपस्‍थिति बढ़ेगी.
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भारत से कितनी दूरी?
चेन्‍नई से व्‍लादिवस्‍तोक पोर्ट की दूरी 5600 नॉटिकल मील यानी 10300 किमी है. एक बड़ा कंटेनरशिप एक सामान्‍य रूप से 20 से 25 नॉट्स यानी 37 से 46 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलते हैं. ऐसे में ये दूरी किसी शिप से 10 से 12 दिन में तय की जा सकती है.

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First published: September 5, 2019, 7:09 PM IST
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