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india may reopen its embassy in kabul this does not mean recognizing taliban rule in afghanistan

अफ़ग़ानिस्तान: काबुल में फिर अपना दूतावास खोल सकता है भारत, फरवरी में सुरक्षा अधिकारियों ने किया था दौरा

काबुल में भारतीय दूतावास, जिसे अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद 17 अगस्त, 2021 को बंद कर दिया गया था. (File Photo)

काबुल में भारतीय दूतावास, जिसे अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद 17 अगस्त, 2021 को बंद कर दिया गया था. (File Photo)

अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के 2 दिन बाद 17 अगस्त, 2021 को भारत ने काबुल में अपना दूतावास बंद कर दिया था. तब भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और विदेश मंत्रालय के कुछ वर्गों ने यह कहा था कि काबुल में भारतीय दूतावास का संचालन करना खतरनाक हो सकता है.

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नई दिल्ली: भारत जल्द ही अफगानिस्तान में अपना दूतावास फिर से खोलने की संभावना तलाश रहा है, लेकिन शीर्ष स्तर के राजनयिक प्रतिनिधित्व के बिना. द इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय सुरक्षा अधिकारियों की एक टीम जमीनी स्थिति का आकलन करने के लिए इस साल फरवरी में काबुल काबुल गई थी. विदेश मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक भारत द्वारा अफगानिस्तान में अपना दूतावास फिर से खोलने की योजना में वरिष्ठ स्तर पर राजनयिकों को भेजना शामिल नहीं है. दूतावास केवल संपर्क उद्देश्यों के लिए कुछ कर्मचारियों के साथ काम करेगा, जो कांसुलर सेवाओं तक विस्तारित हो सकते हैं. इसका मतलब अफगानिस्तान में तालिबान शासन को मान्यता देना नहीं है.

अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के 2 दिन बाद 17 अगस्त, 2021 को भारत ने काबुल में अपना दूतावास बंद कर दिया था. तब भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और विदेश मंत्रालय के कुछ वर्गों ने यह कहा था कि काबुल में भारतीय दूतावास का संचालन करना खतरनाक हो सकता है. उन्होंने 1998 के दौरान ईरान के मजार-ए-शरीफ वाणिज्य दूतावास में ईरानी राजनयिकों का तालिबान द्वारा अपहरण की घटना की ओर इशारा करते हुए कहा था कि ऐसा करना भारतीय कर्मियों के जीवन को खतरे में डालना होगा. अपहरण किए गए ईरानी राजनयिकों के बारे में आज तक कुछ पता नहीं चल सका.

अधिकारियों के एक अन्य वर्ग ने यह तर्क दिया कि दूतावास बंद करने से भारत इस क्षेत्र के देशों में अकेले रह गया है, जिसका काबुल में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है. सोमवार को, जैसा कि शंघाई सहयोग संगठन के क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना समूह की दिल्ली में बैठक हुई, जिसमें अफगानिस्तान एजेंडे में शीर्ष पर था. इस बैठक में मेजबान भारत एकमात्र ऐसे देश के रूप में शामिल हुआ, जिसने अभी तक काबुल में अपने मिशन को फिर से नहीं खोला था. काबुल में वापसी के विचार में दिल्ली के लिए यह एक महत्वपूर्ण कारक है.

यूरोपीय संघ सहित 16 देशों ने काबुल में अपने दूतावास फिर से खोल दिए हैं
यूरोपीय संघ सहित 16 देशों ने काबुल में अपने दूतावास फिर से खोल दिए हैं, जिनकी मानवीय सहायता से संबंधित कार्य की देखरेख के लिए एक छोटी टीम अफगानिस्तान की राजधानी में उपस्थिति है. विचार यह है कि भारत को भी अपने हित में ऐसा करने की जरूरत है. तालिबान द्वारा पिछले साल अगस्त में अफगानिस्तान में अशरफ गनी सरकार के तख्ता पलट के दौरान भी पाकिस्तान, चीन, रूसी और ईरान ने अपना दूतावास बंद नहीं किया था. इन देशों ने तालिबान शासित अफगानिस्तान में अपने लिए महत्वपूर्ण भूमिकाएं देखीं, और खुद को जल्दी से स्थापित करना शुरू कर दिया. सभी पांच मध्य एशियाई देशों के तालिबान शासन के साथ राजनयिक संबंध हैं.

इसके अलावा, दिल्ली में सोच यह है कि मध्य एशियाई गणराज्यों में भारत की पहुंच अफगानिस्तान के बिना बहुत कम होगी. पिछले साल, पाकिस्तान सरकार ने भारत के लिए वाघा-अटारी सीमा से अफगानिस्तान को 50,000 टन खाद्यान्न भेजने के लिए भूमि मार्ग खोल दिया था. यह रेखांकित करते हुए कि मार्ग विशुद्ध रूप से मानवीय कारणों से प्रदान किया जा रहा था. तालिबान ने एक भारतीय व्यापारी को अफगान क्षेत्र के माध्यम से उज्बेकिस्तान में 140 टन चीनी परिवहन करने की अनुमति भी दी थी. यह खेप मुंबई से कराची बंदरगाह और वहां से तोरखम सीमा के रास्ते अफगानिस्तान भेजी गई थी. उज्बेकिस्तान और पाकिस्तान मजार-ए-शरीफ से एक ओवरलैंड रेल लिंक के बारे में बात कर रहे हैं. मजार-ए-शरीफ से कराची बंदरगाह के लिए पहले से ही एक रेल लिंक है.

अपने दूतावास और कर्मचारियों की सुरक्षा पर तालिबान से आश्वासन चाहता है भारत
फरवरी में काबुल का दौरा करने वाली भारतीय सुरक्षा टीम ने तालिबान से यात्रा मंजूरी मांगी थी और सूत्रों के मुताबिक, तालिबान सरकार के अधिकारियों से मुलाकात की. सूत्रों ने कहा कि मिशन और उसमें तैनात कर्मियों की सुरक्षा, काबुल में भारतीय दूतावास को फिर से खोलने की किसी भी योजना में सर्वोच्च प्राथमिकता होगी. काबुल में भारतीय मिशन पर 2008 में हुआ हमला सुरक्षा एजेंसियों के लिए अब भी एक कच्चा घाव है, जिसमें सैन्य सलाहकार, एक वरिष्ठ राजनयिक और दूतावास की रखवाली कर रहे आईटीबीपी के दो कर्मी मारे गए थे. उस समय की अफगान सरकार ने आरोप लगाया था कि हमले के पीछे पाकिस्तानी सेना और आईएसआई का हाथ था. न्यूयॉर्क टाइम्स ने तब रिपोर्ट किया था कि अमेरिकी अधिकारियों ने पाकिस्तान का सामना इस बात के सबूत के साथ किया था कि आईएसआई ने काम के लिए हक्कानी नेटवर्क का इस्तेमाल किया था.

तालिबान शासन ने भारत द्वारा खाली किए गए दूतावास परिसर का निरीक्षण किया था
जबकि तालिबान ने हाल के महीनों में एक से अधिक बार कहा है कि वह भारत को काबुल में अपने मिशन को फिर से खोलने के लिए एक सुरक्षित वातावरण प्रदान करेगा, भारत इस मोर्चे पर तालिबान शासन से ठोस गारंटी की तलाश करेगा. यह पता चला है कि तालिबान ने पिछले अगस्त में भारत द्वारा खाली किए गए दूतावास परिसर का निरीक्षण किया था, जैसा कि उसने अन्य देशों के दूतावास परिसरों का भी निरीक्षण किया था. तालिबान के मुताबिक भारतीय दूतावास परिसर सु​रक्षित है, और इसे कोई नुकसान नहीं हुआ है. तालिबान शासन ने हाल ही में अफगान नेता अब्दुल्ला अब्दुल्ला को ईद पर अपने परिवार से मिलने की अनुमति दी, जो भारत में रहता है. अब्दुल्ला गत 2 मई से भारत में हैं और ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि वह तालिबान की ओर से कोई संदेश लेकर आए होंगे.

Tags: Afghanistan, Kabul, Taliban Government

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