कुर्सी जाते देख ओली के तेवर पड़े ढीले, भारतीय न्यूज चैनलों पर से बैन हटाया

कुर्सी जाते देख ओली के तेवर पड़े ढीले, भारतीय न्यूज चैनलों पर से बैन हटाया
ओली के तेवर पड़े नरम, भारतीय समाचार चैनलों पर लगाया बैन हटाया

नेपाली मीडिया की ख़बरों की मानें तो दोनों पक्षों में सहमति बन गयी है और ओली (KP Sharma Oli) के तेवर अब ढीले पड़ते नज़र आ रहे हैं. रविवार देर शाम नेपाल ने पिछले महीने बैन किए गए भारतीय न्यूज चैनलों (Indian News Channels) के प्रसारण को एक बार फिर अनुमति दे दी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 3, 2020, 8:28 AM IST
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काठमांडू. नेपाल (Nepal) के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) और सत्तारूढ़ नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के अध्यक्ष पुष्प कमल दहल (Pushpa Kamal Dahal Prachanda) के बीच रविवार को हुई तीन घंटे लंबी बैठक भी बेनतीजा रही. हालांकि नेपाली मीडिया की ख़बरों की मानें तो दोनों पक्षों में सहमति बन गयी है और ओली के तेवर अब ढीले पड़ते नज़र आ रहे हैं. रविवार देर शाम नेपाल ने पिछले महीने बैन किए गए भारतीय न्यूज चैनलों के प्रसारण को एक बार फिर अनुमति दे दी है. आज फिर ओली और प्रचंड के बीच बैठक है जिसमें कोई हल निकल जाने की संभावना जताई जा रही है.

नेपाली मीडिया के अनुसार, प्रधानमंत्री ओली के प्रेस सलाहकार सूर्या थापा ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच सकारात्मक बातचीत हुई. इसे लेकर चर्चा हुई कि पार्टी के सचिवालय, स्थाई समिति या केन्द्रीय समिति की बैठक बुलायी जाए. बैठक में पार्टी की आमसभा बुलाने को लेकर भी चर्चा हुई. उधर नेपाल के डिश होम मैनेजिंग डायरेक्टर सुदीप आचार्य ने बताया कि हाल ही में बैन किए गए सभी भारतीय न्यूज चैनलों को फिर से दिखाए जाने की अनुमति मिल गई है. नेपाल के प्रधानमंत्री और उनकी सरकार की कड़ी आलोचना की वजह से नेपाल में ये कदम उठाया गया था. बता दें कि नेपाल ने 9 जुलाई को दूरदर्शन को छोड़कर सभी भारतीय न्यूज चैनलों पर प्रतिबंध लगा दिया था.

स्थायी समिति की बैठक फिलहाल नहीं
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के दो शीर्ष नेताओं के बीच यह बैठक प्रधानमंत्री ओली द्वारा 28 जुलाई को होने वाली पार्टी की स्थायी समिति की बैठक स्थगित किए जाने के छह दिन बाद हुई है. पार्टी की स्थायी समिति की बैठक को लेकर अब भी अनिश्चितता है क्योंकि दोनों शीर्ष नेताओं के बीच मतभेद सुलझ नहीं पाया है. नेपाल ने भारतीय न्यूज़ चैनलों पर आरोप लगाया था कि वे नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और नेपाल में चीनी राजदूत को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. न्यूज एजेंसी ने बताया था कि इसी के मद्देनजर मल्टी सिस्टम ऑपरेटर (एमएसओ) ने नेपाल में भारतीय न्यूज चैनलों को ब्रॉडकास्ट न करने का फैसला किया था.



बता दें कि नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के प्रवक्ता एनके श्रेष्ठ प्रकाश ने भारतीय चैनलों की खूब आलोचना की थी. उन्होंने कहा था कि नेपाल के प्रधानमंत्री और नेपाल की सरकार के खिलाफ भारतीय चैनलों के आधारहीन आलोचनाओं ने सारी हदें पार कर दी हैं. उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा था कि अब यह कुछ ज्यादा ही हो रहा है, इसे तत्काल बंद करना चाहिए.
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