विवाद! भारतीयों की नेपाल में एंट्री पर ओली सरकार ने बनाया नया नियम, तल्ख़ होंगे रिश्ते

विवाद! भारतीयों की नेपाल में एंट्री पर ओली सरकार ने बनाया नया नियम, तल्ख़ होंगे रिश्ते
नेपाल जाने के लिए भारतीयों को कराना होगा रजिस्ट्रेशन

India-Nepal Border Dispute: नेपाल के गृह मंत्री राम बहादुर थापा (Ram Bahadur Thapa) ने घोषणा की है कि अब सड़क मार्ग से नेपाल जाने वाले भारतीयों को सीमा पर रजिस्ट्रेशन की ज़रुरत पड़ेगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 14, 2020, 8:23 AM IST
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काठमांडू. भारत-नेपाल के बीच पहले ही सीमा विवाद (India-Nepal Border Dispute) को लेकर तनावपूर्ण रिश्ते बने हुए हैं. ऐसे में केपी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) सरकार के एक नए फैसले ने आग में घी का काम किया है. नेपाल के गृहमंत्री राम बहादुर थापा (Ram Bahadur Thapa) ने घोषणा की है कि सड़क मार्ग के जरिए भारत से नेपाल जाने वालों पर अब नेपाल सरकार की पैनी नज़र होगी. नेपाल इसके पीछे बढ़ते कोरोना संक्रमण (Coronavirus) के मामलों का तर्क दे रहा है, लेकिन जानकारों के मुताबिक ओली सरकार की नीतियां चीन से सीधे तौर पर प्रभावित होती नज़र आ रही हैं.

नेपाल-भारत सीमा मामलों की संसदीय समिति की बैठक में राम बहादुर थापा ने कहा, 'नेपाल सरकार, भारत से सड़क मार्ग के ज़रिए आने वाले भारतीयों के रजिस्ट्रेशन करने की व्यवस्था करने जा रही है. इसके लिए आईडी कार्ड सिस्टम एक ज़रिया है. हम कोरोना महामारी के दौर में इसे लागू कर रहे हैं. कोरोना के समय में हमने भारत से आने वालों के रिकॉर्ड रखने शुरू कर दिए हैं, ताकि महामारी को फैलने से रोका जा सके. भविष्य के लिए भी ये क़दम दोनों देशों की सीमा सुरक्षा के लिहाज़ से अच्छा होगा.' बता दें कि नेपाल- भारत सीमा सुरक्षा को लेकर कर इस समिति की बैठक बुलाई गई थी. नेपाल के गृह मंत्री राम बहादुर थापा ने उसी समिति के सामने अपनी बात रखी.

अभी क्या है व्यवस्था?
फिलहाल कोई भारतीय नेपाल जाता है तो सिर्फ आईडी कार्ड दिखाने की ज़रूरत पड़ती है. नेपाल ने रजिस्ट्रेशन की शुरुआत कर रिश्तों में बदलाव के स्पष्ट संकेत दिए हैं. नेपाल ने पहले ही भारतीय नागरिकों के देश में प्रवेश के लिये चिन्हित स्थानों को 20 से घटा कर 10 कर दिया है. नेपाल ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर लगी रोक को भी 31 अगस्त तक के लिए बढ़ा दिया है. बालुवातार में स्थित प्रधानमंत्री के सरकारी आवास पर सोमवार शाम हुई कैबिनेट की बैठक में कोविड-19 संकट प्रबंधन केंद्र (सीसीएमसी) की सिफारिशों को आधार बना कर ये सभी फैसले लिए गए हैं. नेपाल के कई मंत्री पहले भी कई बार इस तरह के बयान दे चुके हैं कि उनके देश में संक्रमण भारत से ही फैला है.
बता दें कि भारतीयों के रजिस्ट्रेशन के फ़ैसले के बाद नेपाल जा रहे भारतीयों को अपने नेपाल जाने का कारण लिखित में स्थानीय निगमों को दिखाना अनिवार्य बना दिया है. पिछले कुछ दिनों में ऐसे कई जाली दस्तावेज़ मिलने की भी शिकायतें स्थानीय निकायों को मिली थी. नेपाल सरकार के नए फ़ैसले के बाद भारत से नेपाल जाने वालों की संख्या में पिछले हफ़्ते काफ़ी गिरावट आई है. आधिकारिक तौर पर केवल 7 लोग ही भारत से नेपाल गए हैं. जबकि आम दिनों में ये तादाद सैकड़ों में होती है.





मोदी सरकार से ओली के तल्ख़ रिश्ते
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली लगातार चीन के प्रभाव में काम कर रहे हैं और भारत के प्रति नकारात्मक बयान दे रहे हैं. ओली को लगता है कि नेपाल की सत्ता में रहने के लिए उन्हें भारत का समर्थन नहीं मिल रहा है. दूसरी तरफ़ भारत की नाराज़गी इस बात को लेकर है कि नेपाल उन मुद्दों को अब उठा रहा है, जिनको अब तक कभी मुद्दा नहीं बनाया गया. ओली साफ़-साफ भी कह चुके हैं कि दिल्ली उन्हें सत्ता में रहने देना नहीं चाहती.

ओली ने शक्ति प्रदर्शन के लिए ही ऐसा नक्शा पास कराया है जिसमें भारतीय क्षेत्र लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को नेपाल की सीमा का हिस्सा दिखाया गया है.राम के जन्मस्थान को लेकर ओली के बयान से विवाद खड़ा हो गया था, जिस पर भारत ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी थी. नेपाल के विदेश सचिव और भारतीय राजदूत के बीच 17-18 अगस्त को काठमांडू में वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए बातचीत हो सकती है.
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