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कश्मीर पर झूठे पाकिस्तान की खुली कलई, इस्लामिक सहयोग संगठन ने किया बड़ा खुलासा

भारत ने जब से जम्मू कश्मीर में अनु्च्छेद 370 को हटाया है, तब से पाकिस्तान की यही मांग थी कि ओआईसी भारत के खिलाफ कड़ा रूख अपनाए.
भारत ने जब से जम्मू कश्मीर में अनु्च्छेद 370 को हटाया है, तब से पाकिस्तान की यही मांग थी कि ओआईसी भारत के खिलाफ कड़ा रूख अपनाए.

Jammu Kashmir: पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने दावा किया था कि नाइजर की राजधानी नीमी में ओआईसी विदेश मंत्रियों की बैठक में कश्मीर को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 30, 2020, 12:00 AM IST
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इस्लामाबाद. जम्मू-कश्मीर मुद्दे को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान के झूठ की कलई खुल गई है. इस्लामिक देशों के संगठन इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC)ने जम्मू कश्मीर पर पाकिस्तान के झूठ को पकड़ा है और दुनिया के सामने इसका खुलासा किया है. ओआईसी ने पाकिस्तान से उस दावे को खारिज कर दिया है जिसमें उसने जम्मू-कश्मीर विवाद को नीमी घोषणा में शामिल करने की बात कही थी.

दरअसल, पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने दावा किया था कि नाइजर की राजधानी नीमी में ओआईसी विदेश मंत्रियों की बैठक में कश्मीर को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया गया है. पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने तो इस झूठे प्रस्ताव को लेकर ट्वीट कर जानकारी दी थी. इस ट्वीट में दावा किया गया था कि जम्मू-कश्मीर विवाद को नीमी घोषणा में शामिल करना विदेश मंत्रियों की परिषद रिणाम दस्तावेजों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह कश्मीर को लेकर ओआईसी के समर्थन की महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति है.

ओआईसी ने पाकिस्तानी दावे को किया खारिज
जिस प्रस्ताव को लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्री खुशी के मारे फूले नहीं समा रहे थे, उसे ओआईसी ने खारिज कर दिया. ओआईसी ने कश्मीर को एक अलग आइटम के रूप में इस्लामिक देशों की बैठक में चर्चा करने से साफ इनकार कर दिया. ओआईसी के इस कदम के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री महमूद कुरैशी को ट्रोल किया जा रहा है.
उल्लेखनीय है कि भारत ने जब से जम्मू कश्मीर में अनु्च्छेद 370 को हटाया है, तब से पाकिस्तान की यही मांग थी कि ओआईसी भारत के खिलाफ कड़ा रूख अपना. हालांकि उस समय ओआईसी ने तटस्थ रूख अपनाते हुए कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया था. पाकिस्तान लगातार कोशिश कर रहा है कि ओआईसी जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर चर्चा करें, हालांकि संगठन लगातार इसे नजरअंदाज कर रहा है.
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