ईरान के चाबहार की ही तरह म्यांमार में भी सित्तवे पोर्ट डेवलप कर रहा भारत, चीन परेशान

म्यांमार में भी पोर्ट विकसित कर रहा है भारत
म्यांमार में भी पोर्ट विकसित कर रहा है भारत

India-China Standoff: भारत-चीन के बीच जारी तनाव के बीच भारत के सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने कहा है कि साल 2021 तक म्यांमार का सित्तवे पोर्ट भी चालू हो जाएगा. इस पोर्ट को भी भारत ने ईरान के चाबहार की तरह विकसित किया है और ये पूर्वोत्तर राज्यों के आर्थिक विकास के लिए अहम साबित होगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 6, 2020, 8:19 AM IST
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यंगून. चीन (China) की दक्षिण एशिया में बढ़ती दादागिरी के मद्देनज़र अब भारत ने भी पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों और मजबूती के नए मुकाम तक ले जाना शुरू कर दिया है. इसी क्रम में क्वाड (Quad) संगठन के बाद अब भारत चाबहार (Chabahar Port) के तर्ज पर म्यांमार (Myanmar) के सित्तवे पोर्ट (Sittwe port) को भी विकसित कर रहा है. इस पोर्ट से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से संपर्क पहले के मुकाबले और मजबूत हो जाएगा. इस पोर्ट की मदद से मिजोरम और मणिपुर समेत पूर्वोत्तर के अधिकतर राज्यों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. यह पोर्ट म्यांमार के राखाइन राज्य में स्थित है।

मिली जानकारी के मुताबिक यह पोर्ट साल 2021 के पहले तीन महीनों में चालू हो जाएगा. म्यांमार में भारत सित्तवे पोर्ट के अलावा सित्तवे और Paletwa में अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन टर्मिनल का भी निर्माण कर रहा है. इस परियोजना को मई 2017 में मंजूरी दी गई थी. जिसकी लागत 78 मिलियन डॉलर आंकी गई है. इस पोर्ट को संचालित करने वाली एजेंसी ने एक फरवरी 2020 से संचालन का जिम्मा भी संभाल लिया है. विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने गुरुवार को म्यामांर की दो दिवसीय यात्रा के दौरान कहा कि कोरोना महामारी के बावजूद हम अगले वर्ष की पहली तिमाही तक सित्तवे पोर्ट पर ऑपरेशन शुरू कर देंगे. इस पोर्ट से आगे स्थित Paletwa से लेकर भारतीय बॉर्डर तक एक हाईवे का निर्माण भी किया जा रहा है. इस हाईवे पर बनने वाले 69 पुलों के बारे में भारतीय विदेश सचिव ने कहा कि इससे लिए हम जल्द ही टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ाने वाले हैं.


जनरल नरवणे, श्रृंगला ने सू ची से मुलाकात कीभारत के सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे और विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने सोमवार को म्यांमार की नेता आंग सान सू ची से मुलाकात की और सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा एवं स्थिरता के रखरखाव सहित कई 'महत्वपूर्ण' द्विपक्षीय मुद्दों को लेकर चर्चा की. जनरल नरवणे और श्रृंगला ने म्यांमार के शीर्ष जनरल मिन आंग से भी मुलाकात की और द्विपक्षीय महत्व वाले मुद्दों पर वार्ता की. जनरल नरवणे और श्रृंगला रविवार को दो दिन की म्यामां यात्रा पर पहुंचे, जिसका उद्देश्य रक्षा और सुरक्षा समेत अनेक क्षेत्रों में संबंधों का और विस्तार करना है.



भारतीय दूतावास ने कहा कि भारतीय सेना प्रमुख और विदेश सचिव ने सोमवार को सू ची के साथ मुलाकात की और महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की. विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, ' दोनों पक्षों ने अपने सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा और स्थिरता को बनाए रखने पर चर्चा की और उस प्रतिबद्धता को दोहराया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों को एक-दूसरे के खिलाफ अनैतिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देंगे.' जनरल नरवणे और श्रृंगला का दौरा ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब भारतीय सेना का पूर्वी लद्दाख में चीन की सेना के साथ सीमा पर गतिरोध जारी है तथा कोरोना वायरस महामारी के बीच विदेश यात्राओं पर पाबंदी भी लगी हुई है. म्यांमार और भारत के रणनीतिक पड़ोसी देशों में से एक है जो उग्रवाद प्रभावित नगालैंड और मणिपुर समेत उत्तर पूर्व के कई राज्यों के साथ 1,640 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है.

भारत ने म्यांमार को ‘रेमडेसिवीर’ दी
अपने पड़ोसी देश की कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में मदद करने के लिए सेना प्रमुख जनरल एम. एम नरवणे और विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने सोमवार को म्यामां की नेता आंग सान सू ची को ‘रेमडेसिवीर’ दवा की 3000 से अधिक शीशियां सौंपी. भारतीय दूतावास ने ट्वीट किया भारतीय सेना प्रममुख और विदेश सचिव ने म्यामां में भारत के राजदूत सौरभ कुमार के साथ सोमवार को सू ची के साथ मुलाकात की और महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की. उसने एक अन्य ट्वीट में कहा, 'कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में मित्रवत पड़ोसी म्यामां की मदद करने के लिए भारत से सू ची को ‘रेमडेसिवीर’ दवा की 3000 से अधिक शीशियां सौंपी.'



चीन की चाल होगी नाकाम
चीन सरकार म्यांमार पर उसके बेल्ट एंड रोड परियोजना में शामिल होने के लिए दबाव बना रही है. इसके लिए वह म्यांमार के उग्रवादी समूहों को हथियार तक सप्लाई करता है. ये आतंकी संगठन सुरक्षाबलों पर हमला करने के लिए चीन के बने हथियारों का प्रयोग करते हैं. कहा जाता है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी म्यांमार में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए इन आतंकी समूहों को हथियार सप्लाई करवाती है. इन आतंकी समूहों के चीनी सेना के साथ भी घनिष्ठ संबंध हैं.
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