लाइव टीवी

अफगानिस्तान पर भारत अपना रुख करेगा नरम, तालिबान से होगी बात

News18Hindi
Updated: February 28, 2020, 3:37 PM IST
अफगानिस्तान पर भारत अपना रुख करेगा नरम, तालिबान से होगी बात
दोहा में अमेरिका-तालिबान के बीच होने वाले समझौते में भारत भी जाएगा.

बता दें कि भारत को कतर से निमंत्रण दिया गया है. कतर से निमंत्रण मिलने के बाद भारत ने अपना प्रतिनिधि मंडल भेजने का फैसला किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 28, 2020, 3:37 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. अफगानिस्तान और तालिबान को लेकर हमेशा से कड़ा रुख रखने वाले भारत ने अब अपनी रणनीति में बदलाव करने का फैसला किया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तालिबान के साथ भारत अपनी पहली वार्ता की ओर आगे बढ़ रहा है. इसी कड़ी में भारत ने दोहा में अमेरिका-तालिबान के बीच समझौते पर हस्ताक्षर प्रक्रिया के लिए अपना राजदूत भेजने का फैसला किया है.

ऐसा पहली बार होगा जब भारत की ओर से कोई अधिकारी ऐसे सम्मेलन में हिस्सा होगा, जिसमें तालिबान का प्रतिनिधि मौजूद होगा. बता दें कि पाकिस्तान से संरक्षण पाने वाले तालिबान को लेकर भारत की रणनीति हमेशा से साफ रही है. बता दें कि भारत को कतर से निमंत्रण दिया गया है. कतर से निमंत्रण मिलने के बाद भारत ने अपना प्रतिनिधि मंडल भेजने का फैसला किया है. काफी विचार-विमर्श के बाद सरकार ने कतर में भारतीय राजदूत पी कुमारन को इस सम्मेलन में भेजने का फैसला लिया है.

सरकार ने साफ किया है कि कतर में भरत का प्रतिनिधि भेजने का फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे से जुड़ा हुआ नहीं है. बताया जा रहा है अमेरिका और तालिबान के बीच होने वाले समझौते से भारत पर रणनीतिक, सुरक्षा और राजनीतिक प्रभाव पड़ेंगे. गौरतलब है कि 21 फरवरी को अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा था कि अमेरिका और तालिबान 29 फरवरी को शांति समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे, जिससे अफगानिस्तान में कई दशकों से जारी हिंसा पर रोक लगाई जा सकेगी.

इसे भी पढ़ें :- अमेरिका-तालिबान के बीच शांति समझौते से पहले अमेरिकी रक्षामंत्री बोले-ये करार जोखिम भरा



अमेरिका अफगानिस्तान से अपने बलों को वापस बुला सकता है
बता दें कि इस शांति समझौते के कारण अमेरिका अफगानिस्तान से अपने बलों को वापस बुला सकेगा और इससे वहां उसकी 18 साल पुरानी सैन्य उपस्थिति समाप्त होगी. अमेरिका चाहता है कि समझौते में इस वादे को शामिल किया जाए कि तालिबान अफगानिस्तान को आतंकवादी समूहों के आधार केंद्र के तौर पर इस्तेमाल नहीं करेगा. तालिबान से जुड़े सूत्रों ने कहा कि संघर्षविराम की अवधि का जिक्र नहीं किया गया है लेकिन ऐसा बताया जा रहा है कि संघर्षविराम 10 दिन तक जारी रह सकता है. अफगानिस्तान में अभी करीब 12 हजार अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं.

इसे भी पढ़ें :- तालिबान के साथ 29 को एक समझौते की तैयारी में US, शनिवार से आंशिक संघर्ष विराम शुरू

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए दुनिया से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: February 28, 2020, 2:58 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर