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'पाकिस्तान के पास भारत विरोध के पैसे नहीं, पचा नहीं पा रहा कश्मीर की तरक्की'

इमरान खान के नेतृत्व में पाकिस्तान सबसे खराब आर्थिक दौर से गुजर रहा है (फाइल फोटो)

इमरान खान के नेतृत्व में पाकिस्तान सबसे खराब आर्थिक दौर से गुजर रहा है (फाइल फोटो)

भारत के अमेरिका में राजदूत हर्षवर्धन ऋंगला ने न्यूयार्क टाइम्स में लिखे गये लेख में कहा कि पाकिस्तान (Pakistan) के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) के नेतृत्व में पाकिस्तान सबसे बुरे आर्थिक दौर से गुजर रहा है.

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    वॉशिंगटन. भारत के अमेरिका में राजदूत हर्षवर्धन ऋंगला ने न्यूयार्क टाइम्स में लिखे गये लेख में कहा कि पाकिस्तान (Pakistan) के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) के नेतृत्व में पाकिस्तान सबसे बुरे आर्थिक दौर से गुजर रहा है. वहीं भारत की ओर कश्मीर (Kashmir) तरक्की की राह पर और आगे बढ़ रहा है.

    आर्थिक मंदी (Financial Crisis), महंगाई, कर्जा और 22 बार IMF के द्वारा बेलआउट पैकेज के बाबजूद इमरान खान ने पाकिस्तान की कमर तोड़ दी है और ऐसे ही इरादे उनके पड़ोसी देश के हालात करने में लगे हुए हैं जिसका विरोध अंतरराष्ट्रीय समुदाय को करना चाहिये.

    इमरान पचा नहीं पा रहे कश्मीर की तरक्की
    इमरान खान पचा नहीं पा रहे हैं कि कश्मीर कैसे तरक्की के रास्ते पर वापस आ गया है आर्टिकल 370 (Article 370) को हटाने के बाद जिसकी वजह से कश्मीर (Kashmir) का कभी विकास ही नहीं हुआ. पाकिस्तान चाहता है कि लद्दाख (Ladakh) और कश्मीर की अर्थव्यवस्था कमजोर रहे जिससे अलगाववाद की भावना कायम रह सके और राजनीतिक रूप से वहां आतंकवाद (Terrorist) का माहौल बना रहे.

    आतंकवादियों को पनाह देने वाला पाकिस्तान जहां ओसामा बिन लादेन (Osama Bin Laden) छुपा हुआ था वो देश आतंकवाद को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करता है और उसकी स्ट्रैटेजी में फिट होता है और इसीलिये वो आर्टिकल 370 हटाये जाने का विरोध करता है.

    पाकिस्तानी सरजमीं से चलाए जा रहे हैं आतंकी संगठन
    2008 के मुंबई हमलों के गुनाहगार को पनाह देने वाला और पुलवामा हमला (Pulwama Attack) करने वाले जैश-ए-मोहम्मद जो कि UN से आतंकी संगठन घोषित किये जा चुके हैं पाकिस्तान की सरजमीं से चलाये जा रहे हैं.

    इमरान खान कहते हैं कि भारत में अल्पसंख्यकों (Minorities) के साथ अच्छा बर्ताव नहीं किया जाता मगर ये हास्यादपद सत्यता है कि पाकिस्तान जब बना तब 23% अल्पसंख्यक थे वहां जो अब सिर्फ 3 प्रतिशत रह गये हैं. शिया, अहमदी, ईसाई, हिन्दू और सिख के साथ साथ मुसलमान जैसे शिया, पख्तून, सिंधी, बलूच लोगों का बहुत बुरा हाल है.

    आर्टिकल 370 हटाने से सीमा रेखा (Border Line) पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है जैसे यह पहले थी वैसे ही अभी भी है. पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद का रास्ता छोड़े और एक अच्छा पड़ोसी बने.

    यह भी पढ़ें: बेस्ट फ्रेंड चीन ने भी कंगाल पाकिस्तान का छोड़ा साथ! अब नहीं दे रहा है पैसा

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