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क्लाइमेट चेंज रोकने के लिए बने UN हाई लेवल ग्रुप में भारत के क्लाइमेट एक्सपर्ट अरुणाभ घोष शामिल

क्लाइमेट चेंज रोकने के लिए बने UN हाई लेवल ग्रुप में भारत के क्लाइमेट एक्सपर्ट अरुणाभ घोष शामिल

क्लाइमेट एक्सपर्ट अरुणाभ घोष यूएन हाई लेवल ग्रुप में शामिल (twitter/@SarkariResultI2)

क्लाइमेट एक्सपर्ट अरुणाभ घोष यूएन हाई लेवल ग्रुप में शामिल (twitter/@SarkariResultI2)

यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पूरी दुनिया में शून्य उत्सर्जन (net-zero emissions) प्रतिबद्धताओं के लिए कड़े और स्पष्ट मानकों को विकसित करने और उनके कार्यान्वयन को गति देने के लिए बनाए गए हाई लेवल एक्सपर्ट ग्रुप में एक भारतीय क्लाइमेट एक्सपर्ट अरुणाभ घोष को शामिल किया है.

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न्यूयॉर्क. भारतीय जलवायु विशेषज्ञ और ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद (Council on Energy, Environment and Water-CEEW) के सीईओ अरुणाभ घोष यूएन के उस हाई लेवल एक्सपर्ट समूह का हिस्सा बने हैं, जिसकी अध्यक्षता कनाडा की पूर्व पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री कैथरीन मैककेना करेंगी. इस विशेषज्ञ समूह के अन्य सदस्यों में माली के पूर्व प्रधानमंत्री ओउमर टाटाम ली, ग्लोबल कमीशन फॉर इकोनॉमी एंड क्लाइमेट में कमिश्नर कार्लोस लोप्स और कैलिफोर्निया एयर रिसोर्सेज बोर्ड की पूर्व अध्यक्ष मैरी निकोल्स शामिल हैं. इस समूह को यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पूरी दुनिया में शून्य उत्सर्जन (net-zero emissions) प्रतिबद्धताओं के लिए कड़े और स्पष्ट मानकों को विकसित करने और उनके कार्यान्वयन को गति देने के लिए बनाया है.

यूएन के हाई लेवल एक्सपर्ट ग्रुप के सदस्य बने अरुणाभ घोष ने कहा कि जलवायु संकट से निपटने के लिए वादों से अधिक काम करने की जरूरत है. जलवायु संकट पर हम जितना मानते हैं, उससे कहीं ज्यादा कार्रवाई करने की जरूरत है. लगातार गहराते जा रहे जलवायु संकट के बीच इस ‘गैर-राज्य संस्थाओं के शुद्ध-शून्य उत्सर्जन प्रतिबद्धताओं पर उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समूह’ (High-Level Expert Group on the Net-Zero Emissions Commitments of Non-State Entities) को शुरू किया गया है. लगातार बिगड़ते जलवायु संकट को देखते हुए जरूरी है कि सभी जलवायु वादों को पूरा करने के लिए पारदर्शी, विश्वसनीय, मजबूत कार्यान्वयन योजनाओं को तत्काल शुरू किया जाए और जितनी जल्दी हो सके उससे वास्तव में उत्सर्जन कटौती का काम शुरू किया जाए.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने ये कदम वैज्ञानिकों की चेतावनी के बावजूद दुनिया के देशों की सुस्त प्रतिक्रिया के मद्देनजर उठाया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि पूर्व-औद्योगिक युग के तापमान से वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा नहीं बढ़ने से रोकने के लिए कार्बन उत्सर्जन को काफी घटाने की जरूरत है. इस काम में पहले ही बहुत देर हो चुकी है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा, ‘जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई करने के बढ़ते वादों के बावजूद वैश्विक उत्सर्जन अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर है और लगातार बढ़ रहा हैं.’

यूएन का ये हाई लेवल समूह डीकार्बोनाइजेशन योजनाओं की दिशा में मानकों और मानदंडों पर अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर एक रोडमैप तैयार करेगा और यह साल के अंत से पहले अपनी सिफारिशें देगा. ग्लासगो (COP26) में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में गुटेरेस ने शून्य उत्सर्जन प्रतिज्ञाओं को लागू करने के लिए ज्यादा भरोसेमंद और मजबूत मानकों की जरूरत पर जोर दिया था. ये समूह उस जरूरत को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है.

Tags: 2070 Net Zero Emission, Antonio Guterres, Climate Change, COP26 Summit, Environment news, Glasgow Climate Summit COP26, Green House Emission, UN climate change report

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