ब्रिटेन में भारतीय डायबिटीज मरीजों की COVID-19 से मौत की संभावना ज्यादा: शोध

ब्रिटेन में भारतीय डायबिटीज मरीजों की COVID-19 से मौत की संभावना ज्यादा: शोध
लंदन में रह रहे डायबिटीज से पीड़ित भारतीयों को खतरा (प्रतीकात्मक तस्वीर)

ब्रिटेन में सामने आए एक शोध के अनुसार कोरोना वायरस (Coronavirus) से संक्रमित वैसे भारतीयों और दक्षिण एशियाई की मौत की संभावना ज्यादा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 19, 2020, 10:23 PM IST
  • Share this:
लंदन. ब्रिटेन में सामने आए एक शोध (Research) के अनुसार कोरोना वायरस (Coronavirus) से संक्रमित वैसे भारतीयों और दक्षिण एशियाई की मौत की संभावना ज्यादा है. इस शोध में यह कहा गया है कि दूसरे बीमारी की तुलना में वे लोग जिन्हें पहले से डायबिटीज (Diabetes Patient) है, अगर उन्हें कोरोना वायरस का संक्रमण हो गया तो उनकी मरने की संभावनाओं में बढ़ोतरी हो जाएगी.

35 हजार लोगों को अध्ययन में किया गया शामिल

इस अध्ययन में एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने ब्रिटेन के 260 अस्पतालों में 35 हजार भारतीयों और दूसरे देशों के अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों को शामिल किया था. इस अध्ययन में यह कहा गया है कि ब्रिटेन के मूल निवासी गोरों की तुलना में भारतीयों की स्थिति ज्यादा गंभीर होगी.



अल्पसंख्यक समुदाय को जोखिम ज्यादा
इस अध्ययन के प्रमुख और विश्वविद्यालय में सर्जरी और डेटा विज्ञान के प्रोफेसर विशेषज्ञ ईवेन हैरिसन ने कहा कि इन निष्कर्षों ने कोविड -19 के प्रभावों को निर्धारित करने में एक बार फिर से अल्पसंख्यक समुदाय को केंद्र में लाकर रख दिया है. समाज में किसी भी समूह को दूसरे समूह की तुलना में अधिक जोखिम में देखना दुखदायी है. उन्होंने कहा कि दक्षिण एशियाई देशों में डायबिटीज लोगों में बहुत ही सामान्य बीमारी बन चुकी है. इस जोखिम के लिए अंतर्निहित कारणों को समझने के लिए और निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए शोध जरूरी है.

ये भी पढ़ें: ये 14 साल का बच्चा रच रहा था आतंकी हमले की साजिश, शहीद होने की करता था बातें

मलाला यूसुफजई ने शिक्षा के मोर्चे पर मारी बाजी, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से हुईं ग्रैजुएट

पाकिस्तामनी विदेश मंत्री 'पीर बाबा' बन युवतियों के काटे बाल, बदले में सोना लिया, देखें VIDEO

उन्होंने कहा कि दक्षिण एशियाई लोगों का विशेष रूप से स्वास्थ्य और सामाजिक देखभाल में सार्वजनिक सामना करने वाली नौकरियों में होने की अधिक संभावना है. नीति निर्माताओं को कोविड-19 के संक्रमण को देखते हुए भविष्य के दिशानिर्देशों जारी करते समय अल्पसंख्यक लोगों का ध्यान रखना चाहिए.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज