ब्रिटेन में अपनी जान जोखिम में डालकर कोरोना संक्रमितों को बचा रहे भारतीय डॉक्टर

ब्रिटेन में अपनी जान जोखिम में डालकर कोरोना संक्रमितों को बचा रहे भारतीय डॉक्टर
कोरोना वायरस के इलाज में लगे डॉक्टर और नर्स भी अब खराब मानसिक स्वास्थ्य से जूझ रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

भारतीय डॉक्टर्स (Indian Doctors) ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) की रीढ़ हैं. एनएचएस में करीब 65 हजार भारतीय मूल के डॉक्टर काम कर रहे हैं.

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लंदन: ब्रिटेन (Britain) में भारतीय डॉक्टर (Indian Doctor) अपनी जान पर खेलकर कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमितों की जान बचा रहे हैं. भारतीय डॉक्टर ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस के फ्रंटलाइन डॉक्टरों में शामिल हैं. पिछले दिनों कोरोना वायरस के संक्रमितों का इलाज करने के दौरान भारतीय डॉक्टर डॉ मनजीत सिंह रियात की जान चली गई. डॉ मनजीत रॉयल डर्बी हॉस्पिटल में मरीजों का इलाज कर रहे थे. डॉ मनजीत की तरह भारतीय मूल के सैकड़ों डॉक्टर और हेल्थ वर्कर्स ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. ये फ्रंटलाइन वर्कर्स के तौर पर संक्रमितों का इलाज कर रहे हैं.

ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस के कुल वर्कर्स में अकेले भारतीय 43.3 फीसदी का हिस्सा रखते हैं. ये बड़ा आंकड़ा है. एनएचएस में कुल डेढ़ लाख डॉक्टर्स काम कर रहे हैं. इनलोगों के ऊपर वायरस संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा है.

ब्रिटेन में धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों पर सबसे ज्यादा खतरा
बताया जा रहा है कि ब्रिटेन में ब्लैक एशियन मायनॉरिटी एथिनिक ग्रुप पर कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा खतरा है. एनएचएस के 1 मार्च से लेकर 21 अप्रैल के डेटा का एनालिसिस के जरिए ये जानकारी दी गई है.



कोरोना वायरस के चलते धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों के तौर पर सबसे ज्यादा भारतीयों की जान गई है. कोरोना के चलते करीब 492 भारतीयों ने अपनी जान गंवाई है. इसके बाद ब्लैक कैरेबियन में सबसे अधिक 460 मौतें दर्ज हुई हैं.



सबसे ज्यादा धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यक समुदाय के हेल्थ वर्कर्स की गई जान
आंकड़े के मुताबिक ब्रिटेन में कोरोना के चलते जान गंवाने वाले कुल 203 हेल्थ वर्कर्स में 63 फीसदी हेल्थ वर्कर्स ब्लैक एशियन मायनॉरिटी एथिनिक ग्रुप से आते हैं. इनमें से 67 फीसदी का जन्म ब्रिटेन से बाहर हुआ है.

मौत के इन आंकड़ों ने इस समुदाय को चिंतित कर दिया है. लंदन असेंबली हेल्थ कमिटी के अध्यक्ष और जनरल प्रैक्टिसनर डॉ ओंकार सहोटा ने सरकार से मांग की है कि वो इस बात की जांच करवाएं की ब्लैक एशियन मायनॉरिटी एथिनिक ग्रुप में सबसे ज्यादा मौतें क्यों हुई हैं.

उन्होंने कहा है कि 94 फीसदी मरने वाले डॉक्टर BAME कम्यूनिटी से हैं. इसी तरह से जान गंवाने वाले 63 फीसदी हेल्थ वर्कर्स इस कम्यूनिटी से आते हैं. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटिश एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडियन ऑरिजन के फाउंडिंग प्रेसीडेंट ने कहा है कि ब्रिटेन की एनएचएस के लिए करीब 65 हजार भारतीय मूल के डॉक्टर काम करते हैं. भारतीय मूल के डॉक्टर ब्रिटेन की हेल्थ सिस्टम की रीढ़ हैं.

उन्होंने कहा है कि जिन 32 डॉक्टरों की जान गई है, उसमें से सिर्फ 2 श्वेत हैं. ब्रिटेन में कोरोना के चलते जान गंवाने वाल पहली भारतीय मूल की एनएचएस वर्कर पूजा शर्मा हैं. उनके पिता की मौत भी सिर्फ 24 घंटे के अंतर पर कोरोना की वजह से ही हुई.

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