इन चार भारतीयों को पाकिस्तान की जेल से रिहा कराने के लिए अदालत पहुंचा भारतीय उच्चायोग

इस्लामाबाद हाईकोर्ट की फाइल फोटो (ANI)
इस्लामाबाद हाईकोर्ट की फाइल फोटो (ANI)

इस्लामाबाद (Islamabad) की अदालत का रुख करने से पहले भारतीय उच्चायोग (High Commission of India) ने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय को भी पत्र लिखा था, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 16, 2020, 12:03 PM IST
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इस्लामाबाद. पाकिस्तान (Pakistan) की राजधानी इस्लामाबाद (Islamabad) में स्थित भारतीय उच्चायोग (High Commission of India) ने इस्लामाबाद हाईकोर्ट  (Islamabad High Court) के समक्ष एक याचिका दायर कर उन चार हिंदुस्तानी नागरिकों को छोड़ने की अपील की है, जिन्हें जासूसी के आरोप में सजा दी गई थी. उच्चायोग ने अपनी याचिका में कहा है कि सजा की अवधि पूरी होने के बाद भी इन चारों को नहीं छोड़ा गया है, जिसके बाद वे अदालत पहुंचे हैं.

अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय उच्चायोग में फर्स्ट सेक्रेटरी अपर्णा रे की ओर से इस्लामाबाद हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया है कि चार हिंदुस्तानियों की सजा पूरी होने के बावजूद उन्हें कैदी बनाए रखना पाकिस्तान के ही कानून का उल्लंघन है. ऐसे में अदालत उन्हें तुरंत रिहा करने का आदेश दे. इस याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होगी. जस्टिस मोहसिन अख्तर की अदालत में यह मामला सुना जाएगा, जहां पाकिस्तान सरकार भी अपना पक्ष रखेगी.

किन भारतीयों को गलत तरीके से किया है कैद?
बता दें जिन भारतीयों के लिए भारतीय उच्चायोग इस्लामाबाद की अदालत पहुंचा है, उनमें बिरजू दुंग, विज्ञान कुमार, सतीश भोग और सोनू सिंह शामिल हैं. बिरजू, विज्ञान और सतीश लाहौर की सेंट्रल जेल में कैद हैं, जबकि सोनू सिंह कराची की जेल में हैं. याचिका के अनुसार बिरजू की सजा साल 2007, सोनू की साल 2012, विज्ञान की साल 2014 और सतीश की सजा साल 2015 में ही खत्म हो चुकी है फिर भी इन्हें गलत तरीके से कैद कर के रखा गया है.
हाईकमीशन ने अपनी याचिका में कहा है कि इन सभी को पाकिस्तानी कॉन्स्टिट्यूशन के आर्टिकल 199 के तहत अरेस्ट किया गया था. फिर पाकिस्तान की आर्मी एक्ट 59 के तहत जासूसी का आरोप लगाकर सजा दी गई थी.





अदालत का रुख करने से पहले भारतीय उच्चायोग ने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय को भी पत्र लिखा था लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया. बता दें भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को भी पाकिस्तान ने इन्हीं कानूनों के तहत जासूसी के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी, जिस पर अंतरराष्ट्रीय अदालत ने रोक लगा दी है.
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