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indian origin man duped millions of dollars in singapore in the name of timeshare recovery 21 cases of fraud registered

सिंगापुर में ‘टाइमशेयर रिकवरी’ के नाम पर भारतीय मूल के शख्स ने की लाखों डॉलर की ठगी, धोखाधड़ी के 21 मामले दर्ज

सिंगापुर में ठगी का जुर्म साबित होने पर 10 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

सिंगापुर में ठगी का जुर्म साबित होने पर 10 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

मुरलीधरन मुहुनंदन ने ‘टाइमशेयर रिकवरी’ योजना का झांसा देकर कई लोगों को ठगा है. रिपोर्ट के मुताबिक सिंगापुर की अदालत में उस पर करीब 11 लाख अमेरिकी डॉलर की धोखाधड़ी के आरोप तय किए गए हैं. मुरलीधरन ने एक शख्स को 1 बार नहीं, बल्कि 13 बार ठगा. अगर ठगी का मामला साबित होता है तो उसे 10 साल की सजा हो सकती है.

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सिंगापुर. भारतीय मूल के एक शख्स पर सिंगापुर की अदालत में ‘टाइमशेयर रिकवरी’ योजना के तहत करीब 16 लाख सिंगापुर डॉलर (करीब 11 लाख अमेरिकी डॉलर) की ठगी का आरोप तय किया गया है. 45 साल के मुरलीधरन मुहुनंदन पर धोखाधड़ी के 21, लोगों को धोखाधड़ी के लिए उकसाने के 2 और ठगी के प्रयास करने के लिए 2 अन्य आरोप लगाए गए हैं. मुरलीधरन पर चीनी मूल के ओइ फाइक चेंग और भारतीय मूल के मारिमुथु थेरुमलई के साथ ‘टाइमशेयर रिकवरी’ की धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है. ‘द स्ट्रेट्स टाइम्स’  की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुरलीधरन ने ओइ को 13 बार यह कहते हुए ठगा कि ‘भाग्यम एजेंसीज बेंगलुरु’ उसे टाइमशेयर समझौते के लिए भुगतान करेगी.

मुरलीधरन ने ओई से जनवरी से जुलाई 2020 के बीच कुल 1 लाख 5 हजार सिंगापुर डॉलर लिए हैं. इसी तरह मुरलीधरन ने मारिमुत्थु को भी 12 अलग-अलग मौकों पर ठगा. मुरलीधरन ने मारिमुत्थु को यह भरोसा दिलाया कि पिछले साल नवबंर में कोल्लयेर क्वाय के दफ्तर में जो उसने फोटो लिए थे, उसके एवज में उसे 250,000 सिंगापुर डॉलर का जुर्माना देना होगा. इसी तरह मारिमुत्थु ने पिछले साल नवंबर और जुलाई के बीच टाइमशेयर समझौते के तहत 20,000 सिंगापुर डॉलर और डेढ़ लाख सिंगापुर डॉलर ठगे. सिंगापुर में ठगी का जुर्म साबित होने पर 10 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है.

पुलिस ने की लोगों से अपील
इस बीच पुलिस ने लोगों से आग्रह किया है कि उन्हें कंपनियों से आने वाले कॉल के दौरान सचेत रहना चाहिए. ऐसे कॉल का मकसद होता है टाइमशेयर सदस्यता के जरिए लोगों से पैसे वसूलना. पुलिस ने यह भी बताया कि जब भी कोई टाइमशेयर सदस्यता के बारे में फोन करे तो सदस्यता के लिए किसी तरह की कोई व्यक्तिगत जानकारी नहीं देनी चाहिए.

साथ ही पुलिस ने जनता से यह भी आग्रह किया है कि उन्हें कंपनी के बारे में पता लगाना चाहिए. उसके साथ जुड़ने से पहले उसके ट्रैक रिकॉर्ड को देखना चाहिए. लोगों को कंपनी के दस्तावेज की पुष्टि करनी चाहिए. अगर कंपनी दस्तावेज देने में ना नुकुर करती है तो टाइमशेयर डेवलपर से इसके बारे में पता करना चाहिए और अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए.

क्या है टाइमशेयर?
टाइमशेयर एक तरह की संपत्ति होती है, जो साझा करके ली जाती है. कंपनी किसी जगह पर कोई रिजॉर्ट या छुट्टी मनाने वालों के लिए रुकने की व्यवस्था विकसित करती है. इसमें कंपनी आपसे कहती है कि आप भी एक रिसोर्ट का कॉटेज या कुछ ऐसा खरीद सकते हैं और इस कॉटेज के रखरखाव व दूसरे खर्चों के बाद जो फायदा होता है, उसका एक हिस्सा पैसा लगाने वाले को दिया जाता है. कुल मिलाकर टाइमशेयर एक बड़ी रिजॉर्ट संपत्ति में छोटी-छोटी इकाइयों की तरह होता है. यह कई तरह से काम करता है, यानी आप किसी संपत्ति का अंश खरीद सकते हैं या निश्चित अवधि के लिए अपनी संपत्ति को किसी को किराए पर दे सकते हैं.

Tags: Crime News, Crime story

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