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भारत पाक परमाणु युद्ध से भयावह खाद्यान्न संकट हो सकता है पैदा : अध्ययन

भाषा
Updated: March 17, 2020, 5:54 PM IST
भारत पाक परमाणु युद्ध से भयावह खाद्यान्न संकट हो सकता है पैदा : अध्ययन
अध्यनन में कहा गया है कि अगर भारत और पाकिस्तान परमाणु युद्ध करते हैं, तो 10 करोड़ लोगों की जान जाएगी.

अगर महज 100 परमाणु हथियार भी इस्तेमाल किए गए तो कम से कम पांच सालों के लिए धरती का तापमान 1.8 डिग्री घट जाएगा.

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वाशिंगटन. भारत और पाकिस्तान (Pakistan) के बीच सीमित परमाणु युद्ध (Nuclear war) से आधुनिक इतिहास में वैश्विक स्तर पर सबसे भयावह खाद्यान्न संकट पैदा हो सकता है. अपनी तरह के एक पहले अध्ययन में ऐसा कहा गया है. पत्रिका पीएनएएस में प्रकाशित इस अध्ययन में सामने आया कि वैश्विक परमाणु आयुधों के एक फीसदी से भी कम ऐसे हथियारों के उपयोग वाले युद्ध के बाद वैश्विक स्तर पर तापमान में गिरावट और सूरज की रौशनी में कमी से दुनियाभर में खाद्यान्न उत्पादन और व्यापार करीब एक दशक के लिए बाधित हो सकते हैं.

अमेरिका के रटजर्स यूनिवर्सिटी- न्यू ब्रून्सविक के शोधकर्ताओं का कहना है कि 'इसका असर 21वीं सदी के आखिर तक मानवजनित जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से कहीं ज्यादा होगा.' उनका मानना है कि वैसे तो कृषि उत्पादकता पर वैश्विक तापमान में वृद्धि का व्यापक रूप से अध्ययन किया गया है, लेकिन तापमान में अचानक गिरावट के वैश्विक फसल वृद्धि पर प्रभाव की नहीं के बराबर समझ है.

परमाणु हथियारों को नष्‍ट किया जाना चाहिए
इस अध्ययन के सह लेखक और विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अलान रॉबोक ने कहा, हमारे नतीजे से इस वजह को बल मिलता है कि परमाणु हथियारों का अवश्य ही सफाया किया जाना चाहिए, क्योंकि अगर ये बने रहे तो इनका इस्तेमाल किया जा सकता और दुनिया के लिए इसके परिणाम त्रासद हो सकते हैं.’’



युद्ध क्षेत्र से ज्यादा लोग भूख से मरेंगे


उन्होंने आगे कहा, परमाणु हथियारों का और भयावह और सीधा असर यह होगा कि युद्ध क्षेत्र से बाहर ज्यादा लोग भूख से मरेंगे. पत्रिका ‘साइंस एडवांसेज में हाल ही में प्रकाशित रॉबोक के एक अध्यनन में अनुमान व्यक्त किया गया है कि अगर भारत और पाकिस्तान परमाणु युद्ध करते हैं, तो तत्काल 10 करोड़ लोगों की जान जाएगी और उसके बाद दुनियाभर में भुखमरी पैदा होगी.

इस नवीनतम अध्ययन में वैज्ञानिकों ने माना कि अगर महज 100 परमाणु हथियार भी इस्तेमाल किए गए तो उसके फलस्वरूप उपरी वायुमंडल में 50 लाख टन काला धुंआ पैदा होगा और कम से कम पांच सालों के लिए धरती का तापमान 1.8 डिग्री घट जाएगा, वर्षा में आठ फीसदी की गिरावट आएगी और सूरज की रौशनी भी कम हो जाएगी.

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First published: March 17, 2020, 5:54 PM IST
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