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वो लैब जहां पर पहली बार ओमिक्रॉन का पता चला, जानें अंदर कैसे होता है काम

वो लैब जहां पर पहली बार ओमिक्रॉन का पता चला, जानें अंदर कैसे होता है काम

दक्षिण अफ्रीका की लैब में पहली बार ओमिक्रॉन का पता चला था. (सांकेतिक तस्वीर)

दक्षिण अफ्रीका की लैब में पहली बार ओमिक्रॉन का पता चला था. (सांकेतिक तस्वीर)

Omicron Updates: इस वैरिएंट को दक्षिण अफ्रीका की लैंसेट लेबरोटरी में पहली बार तलाशा गया था. इसी लैब ने दुनिया को जानकारी दी कि अब कोरोना का एक नया वैरिएंट सामने आ चुका है. इस लैब की हेड एफ्टिक्सिया वारडास हैं और उसके साथ टेक्निशियन, बायोकेमिस्ट्स और साथी वायरोलॉजिस्ट्स की एक 'पूरी फौज' काम करती है. इस लैब में तकरीबन हर दिन 18 हजार से ज्यादा आरटी-पीसीआर टेस्ट किए जाते हैं. पूरे देश में वायरस के म्यूटेशन पर निगाह रखने वाली ये मुख्य लैब है.

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    जोहानिसबर्ग. कोविड-19 का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन (Omicron Variant) इस वक्त दुनियाभर के लिए चिंता का सबब बना हुआ है. ये वैरिएंट पहली बार दक्षिण अफ्रीका (South Africa) में मिला और फिर उसके बाद अब दुनिया के कई देशों में फैल चुका है. यूरोप के कई देशों में इस वैरिएंट के मरीज मिलने के बाद मौतें बढ़ने की आशंका (Rise of Covid Death) जताई जा रही है. इस वैरिएंट को दक्षिण अफ्रीका की लैंसेट लेबरोटरी (Lancet Lab) में पहली बार तलाशा गया था. इसी लैब ने दुनिया को जानकारी दी कि अब कोरोना का एक नया वैरिएंट सामने आ चुका है.

    इस लैब की हेड एफ्टिक्सिया वारडास (Eftyxia Vardas) हैं और उसके साथ टेक्निशियन, बायोकेमिस्ट्स और साथी वायरोलॉजिस्ट्स की एक ‘पूरी फौज’ काम करती है. इस लैब में तकरीबन हर दिन 18 हजार से ज्यादा आरटी-पीसीआर टेस्ट (RT-PCR) किए जाते हैं. पूरे देश में वायरस के म्यूटेशन पर निगाह रखने वाली ये मुख्य लैब है.

    इस वायरोलॉजिस्ट के निर्देशन में काम करती है टीम
    एफ्टिक्सिया वारडास एक क्लीनिकल वायरोलॉजिस्ट (Clinical Virologist) हैं. उनके पास टीबी और एड्स जैसी बीमारियों पर काम करने का दो दशक से ज्यादा का अनुभव है. ओमिक्रॉन वैरिएंट को लेकर उनकी टीम की निगाह नवंबर महीने के शुरुआती सप्ताह में गई. दरअसल राजधानी जोहानिसबर्ग में 22 ऐसे कोरोना पॉजिटिव मामले आए जिनमें म्यूटेशन कुछ अलग प्रकार का दिख रहा था. तुरंत लैब की टीम के कान खड़े हो गए. वायरोलॉजिस्ट टीम को अंदेशा हो गया था कि ये किसी नए वैरिएंट की आहट है.

    कैसे हुआ नए वैरिएंट का अंदेशा
    आरटीपीसीआर टेस्ट में सामान्य तौर पर तीन विशेष जीन का जेनेटिक कोड पता किया जाता है. लेकिन लैब ने पाया कि 22 मरीजों में तीन में से एक ‘एस’ जीन गायब है. वाडरास का कहना है-हमें लगा कि इन आरटीपीसीआर टेस्ट के नतीजों में कुछ तो अलग हो रहा है. हमने और सावधानी बरतनी शुरू की और उन नमूनों पर दोबार टेस्ट शुरू किए.

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    दुनिया को कोई गलत जानकारी नहीं देना चाहती थी टीम
    वारडास की टीम ने बहुत ध्यान से काम शुरू किया क्योंकि वो नहीं चाहते थे कि दुनिया को कोई गलत जानकारी दी जाए. वो कहती हैं- हमें पूरी जानकारी हासिल करने में करीब एक सप्ताह से ज्यादा का वक्त लग गया.

    अब ओमिक्रॉन पर दुनिया के साइंटिस्ट कर रहे हैं रिसर्च
    वाडरास कहती हैं कि बाद में ये कंफर्म हो गया कि अब एक नया वैरिएंट सामने आ चुका है. ये वैरिएंट के पहले के चारों कोरोना वैरिएंट से अलग था. अब इस वैरिएंट को लेकर तमाम तरह की जानकारियां आना शुरू हो चुकी हैं. लेकिन शुरुआती दिनों में इसे तलाशने का काम मुश्किलभरा था.

    Tags: COVID 19, Omicron variant

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