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फाइजर की गोली खाने के बाद कुछ लोग फिर हुए कोविड संक्रमित, एफिकेसी पर उठे सवाल

कोरोना के हल्के लक्षणों से जूझ रहे लोगों को पैक्सलोविड टैबलेट दी जा रही है. इसे अमेरिकी फार्मा कंपनी फाइजर ने बनाया है.

कोरोना के हल्के लक्षणों से जूझ रहे लोगों को पैक्सलोविड टैबलेट दी जा रही है. इसे अमेरिकी फार्मा कंपनी फाइजर ने बनाया है.

पैक्सलोविड टैबलेट को नियम से 5 दिन खाने के बाद भी कुछ मरीजों में संक्रमण लौट रहा है. इससे दो तरह के सवाल उठ रहे हैं. पहला- क्या मरीज दवा खाने के बाद भी संक्रमित हैं. दूसरा- क्या मरीज को पैक्सलोविड का पूरा कोर्स दोबारा करना चाहिए.

न्यूयॉर्क. दुनिया में फिर से कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है. वैक्सीनेशन के साथ ही कई देशों में मरीजों को कोरोना की दवाई भी दी जा रही है. इस बीच अमेरिका में कुछ मरीजों के फाइजर की गोली खाने के बाद फिर से कोविड संक्रमित होने का मामला सामने आया है.

कई देशों में कोरोना के हल्के लक्षणों से जूझ रहे लोगों को पैक्सलोविड टैबलेट दी जा रही है. इसे अमेरिकी फार्मा कंपनी फाइजर ने बनाया है. अप्रैल में इस टैबलेट को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से भी मंजूरी मिल गई है. अब खबरें आ रही हैं कि कुछ मामलों में इस गोली को खाकर ठीक होने के बाद मरीजों में कोरोना संक्रमण लौट रहा है.

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न्यूज एजेंसी AP की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में कोरोना मरीजों के लिए पैक्सलोविड टैबलेट एक घरेलू सुविधा बन गई है. एक तरफ, सरकार ने पैक्सलोविड को खरीदने के लिए अब तक 10 बिलियन डॉलर खर्च किए हैं. इससे 2 करोड़ लोगों का इलाज हो सकता है. दूसरी तरफ, हेल्थ एक्सपर्ट्स अब इस ड्रग के कारगर होने यानी एफिकेसी पर सवाल उठा रहे हैं.

पैक्सलोविड टैबलेट को नियम से 5 दिन खाने के बाद भी कुछ मरीजों में संक्रमण लौट रहा है. इससे दो तरह के सवाल उठ रहे हैं. पहला- क्या मरीज दवा खाने के बाद भी संक्रमित हैं. दूसरा- क्या मरीज को पैक्सलोविड का पूरा कोर्स दोबारा करना चाहिए.

अमेरिकी एजेंसी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) कहती है- मरीजों को टैबलेट के डबल कोर्स से बचना चाहिए. दरअसल, जिन लोगों में कोरोना के लक्षण लौटते हैं, उन्हें गंभीर संक्रमण और अस्पताल में भर्ती होने का खतरा ज्यादा होता है। ऐसे में सबसे पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी है.

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फाइजर कंपनी ने पैक्सलोविड टैबलेट के क्लिनिकल ट्रायल तब किए थे, जब पूरी दुनिया डेल्टा वैरिएंट से जूझ रही थी. उस वक्त ज्यादातर लोगों को वैक्सीन भी नहीं लगी थी.

फाइजर ने अपने ट्रायल में पैक्सलोविड को ऐसे कोरोना मरीजों पर टेस्ट किया था जिन्हें पहले से वैक्सीन नहीं लगी थी, जो गंभीर संक्रमण से पीड़ित थे और जो दिल की बीमारी और डायबिटीज जैसे रोगों की चपेट में थे. इस ड्रग ने मरीजों के हॉस्पिटलाइजेशन और मौत के खतरे को 7% से 1% पर पहुंचा दिया था.

Tags: Coronavirus, Covid Positive, Covid vaccine, Pfizer vaccine

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