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6 कप से ज्यादा कॉफी पीने पर 53% तक याद्दाश्त घटने का खतरा, पढ़ें ये रिसर्च

एक और रिसर्च में कॉफी से आंखों में नुकसान की बात कही गई है. (सांकेतिक फोटो)

एक और रिसर्च में कॉफी से आंखों में नुकसान की बात कही गई है. (सांकेतिक फोटो)

कॉफी (Coffee) में कैफीन नाम का तत्व पाया जाता है. यह सीधे दिमाग के नर्वस सिस्टम (Nervous System) पर अपना असर छोड़ता है. नतीजा इंसान रिलैक्स महसूस करने लगता है. लेकिन, जब इसकी मात्रा जरूरत से ज्यादा हो जाती है, तो ये दिमाग पर बुरा असर छोड़ने लगता है. इससे व्यक्ति को नींद न आने की दिक्कत होती है.

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    केनबरा. कॉफी (Coffee) को लेकर एक नई रिसर्च चौंकाती है. ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों का कहना है कि रोजाना 6 कप से अधिक कॉफी पीते हैं, तो इसका सीधा असर ब्रेन पर पड़ता है. ज्यादा कॉफी पीने वालों में याद्दाश्त घटने (डिमेंशिया) का खतरा 58 फीसदी तक रहता है. इससे स्ट्रोक का डर भी बना रहता है.

    दरअसल, कॉफी में कैफीन नाम का तत्व पाया जाता है. यह सीधे दिमाग के नर्वस सिस्टम पर अपना असर छोड़ता है. नतीजा इंसान रिलैक्स महसूस करने लगता है. लेकिन, जब इसकी मात्रा जरूरत से ज्यादा हो जाती है, तो ये दिमाग पर बुरा असर छोड़ने लगता है. इससे व्यक्ति को नींद न आने की दिक्कत होती है.

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    वहीं, एक और रिसर्च में कॉफी से आंखों में नुकसान की बात कही गई है. न्यूयॉर्क स्थित माउंट सिनाई के आइकन स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने यह रिसर्च की है. यह रिसर्च ऑप्थेलमोलॉजी नामक जर्नल में छपी है. इस रिसर्च में बताया गया है कि बहुत अधिक मात्रा में कैफीन का इस्तेमाल ग्लूकोमा की आशंका बढ़ा सकता है. रिसर्च के अनुसार, ग्लूकोमा की वजह हमारे खान-पान की आदतें और आनुवांशिक हो सकती हैं. शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि जिन लोगों के परिवार में किसी व्यक्ति को ग्लूकोमा है तो ऐसे लोगों को कैफीन का इस्तेमाल कम करना चाहिए.

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    अन्य कारण ये भी है कि चाय-कॉफी का ज्यादा सेवन करने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ता है, जो कि आंखों की रोशनी में धुंधलापन का कारण बनता है. कैफीन से ग्लूकोमा होने का सीधा संबंध नहीं है लेकिन यह आंखों में इस तरह की परिस्थितियां बना देता है कि उससे ग्लूकोमा होने का खतरा बढ़ जाता है.

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