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पृथ्वी के कोर ने घूमना बंद क‍िया, द‍िशा में बदलाव का अनुमान, सात दशक में पूरा होता है घूमने का एक चक्र, जानें क्या होता है ये?

स्‍ट्डी में दावा क‍िया गया है क‍ि पृथ्वी के आंतरिक कोर ने हाल ही में घूमना बंद कर दिया और इसके स्पिन ओरिएंटेशन को विपरीत दिशा में बदल दिया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

स्‍ट्डी में दावा क‍िया गया है क‍ि पृथ्वी के आंतरिक कोर ने हाल ही में घूमना बंद कर दिया और इसके स्पिन ओरिएंटेशन को विपरीत दिशा में बदल दिया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

Earth's inner core recently stopped spinning: चीन के पीकिंग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

आंतरिक कोर पृथ्वी की सतह के सापेक्ष आगे और पीछे एक झूले की तरह घूमता है
घूमने का एक चक्र लगभग सात दशक का होता है
स्‍टडी का मानना है क‍ि इस चक्र ने 1970 के दशक की शुरुआत में दिशा बदली थी

बीजिंग. नेचर जियोसाइंस (Nature Geoscience) की हाल ही में एक स्‍टडी का प्रकाशन हुआ है. इस स्‍टडी में दावा क‍िया गया है क‍ि पृथ्वी के आंतरिक कोर ने हाल ही में घूमना बंद (Earth’s inner core recently stopped spinning) कर दिया और इसके स्पिन ओरिएंटेशन को विपरीत दिशा में बदल दिया है. वैश्‍व‍िक (Globally) स्‍तर के आधार पर पता चलता है क‍ि इनर कोर रोटेशन हाल में रुका हुआ है. यह रोटेशन 2009 में पड़ाव पर आ गया था और फ‍िर आश्‍चर्यजनक तौर पर व‍िपर‍ीत द‍िशा (surprisingly turned in an opposite direction) में मुड़ गया.

शोधकर्ताओं का मानना है क‍ि हम जब तक ग्रह की सतह के नीचे होने वाली हलचल को महसूस नहीं करते जब तक क‍ि भूकंप (Earthquake) या ज्‍वालामुखी व‍िस्‍फोट के रूप में ह‍िंसक भंवर या कुचलने वाली दोष रेखाओं से ह‍िल नहीं जाते. शोधकर्ताओं का काफी समय से मानना है क‍ि आंतरिक कोर पृथ्वी की सतह के सापेक्ष आगे और पीछे एक झूले की तरह घूमती है.

चीन के पीकिंग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया क‍ि घूमने का एक चक्र लगभग सात दशक का होता है. इसका मतलब यह है क‍ि करीब हर 35 साल में इसकी दिशा बदलती है. अध्‍ययन का मानना है क‍ि इस चक्र ने 1970 के दशक की शुरुआत में दिशा बदली थी. इसके बाद अब 2040 के मध्य में चक्र के द‍िशा बदलने का अनुमान लगाया गया है. जहां तक धरती की परतों को बांटे जाने का सवाल है तो इसको तीन ह‍िस्‍सों में व‍िभाज‍ित क‍िया है ज‍िनमें क्रस्ट, मेंटल और कोर शामि‍ल है.

शोधकर्ता भूकंप से उत्पन्न होने वाली भूकंपीय तरंगों का अध्ययन कर रहे थे. यह तरंगें पूरे ग्रह में व‍िचरण करती है. अध्‍ययन से साफ पता चलता है क‍ि पृथ्वी के आंतरिक कोर को पहली बार 1936 में खोजा गया था. तरंगों में बदलाव की वजह से ही पृथ्‍वी के कोर (revealed Earth’s core) का पता चला जोक‍ि करीब 7000 किलोमीटर चौड़ा है. यह कोर तरल लोहे के खोल के अंदर लिपटे लोहे के ठोस केंद्र के रूप में बना है.

नेचर की ओर से 1996 में भी एक स्‍टडी की गई. इसमें पता चला है कि पृथ्वी के आंतरिक कोर को पार करने के ल‍िए भूकंपीय तरंगों की यात्रा में लगने वाला तीन दशक का समय छोटा जरूर है लेक‍िन इसमें व्यवस्थित बदलाव दिखाता है. आंतरिक कोर के रोटेशन द्वारा इस भिन्नता को बहुत अच्छी तरह से समझाया गया है. वहीं, रोटेशन की दर मेंटल और क्रस्ट के दैनिक रोटेशन की तुलना में करीब 1° प्रति वर्ष तेज है.

पीकिंग यूनिवर्सिटी की टीम ने ज्यादातर 1995 और 2021 के बीच के भूकंपों का विश्लेषण किया. इन विश्लेषण से पता चला कि 2009 के आसपास किसी समय कोर ने घूमना बंद कर दिया और हो सकता है कि वह घूमने की दिशा बदलने की प्रक्रिया में हो.

शोधकर्ताओं ने कहा है कि कोर का घूर्णन दिन की लंबाई में परिवर्तन से संबंधित है और इससे पृथ्वी को अपनी धुरी पर घूमने में लगने वाले सटीक समय में छोटे बदलाव हो सकते हैं. और यह ग्रह की विभिन्न परतों क्रस्ट, मेंटल और कोर के बीच संबंध हैं.

शोधकर्ता टीम का कहना है क‍ि अवलोकन पृथ्वी की परतों के बीच गतिशील संवाद के लिए सबूत प्रदान करते हैं. उन्होंने कहा क‍ि उम्मीद है कि अध्ययन कुछ शोधकर्ताओं को ऐसे मॉडल बनाने और परीक्षण करने के लिए प्रेरित कर सकता है जो समग्र पृथ्वी को एक एकीकृत गतिशील प्रणाली के रूप में मानते हैं. उन्‍होंने यह भी कहा क‍ि अभी तक यह सुझाव देने के लिए कोई सबूत नहीं है कि ग्रह की सतह पर रहने वाले लोगों को स्‍पाइन‍िंग में बदलाव प्रभावित भी कर सकता है.

Tags: Earth, Science news, World news, World news in hindi

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