• Home
  • »
  • News
  • »
  • world
  • »
  • कोरोना से लड़ने के लिए भेड़ के खून से एंटीबॉडी तैयार, नए वेरिएंट्स पर भी असरदार

कोरोना से लड़ने के लिए भेड़ के खून से एंटीबॉडी तैयार, नए वेरिएंट्स पर भी असरदार

रिसर्च में बताया गया है कि ये नैनोबॉडी पहले विकसित की गईं दूसरी एंटीबॉडी से ‘एक हजार गुना’ बेहतर हैं.  (सांकेतिक फोटो)

रिसर्च में बताया गया है कि ये नैनोबॉडी पहले विकसित की गईं दूसरी एंटीबॉडी से ‘एक हजार गुना’ बेहतर हैं. (सांकेतिक फोटो)

जर्मनी स्थित मैक्स प्लैंक इंस्टिट्यूट (एमपीआई) फॉर बायोफिजिकल केमिस्ट्री के रिसर्चर्स ने एक स्टडी में ये जानकारी दी है. स्टडी में बताया गया है कि ये सूक्ष्म एंटीबॉडी है, जो पहले विकसित की गईं इस तरह की एंटीबॉडी (Antibody) की तुलना में कोरोना वायरस (COVID-19) को एक हजार गुना अधिक निष्क्रिय कर सकती हैं.

  • Share this:

    बर्लिन. भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में कोरोना वायरस (Coronavirus) को खत्म करने के लिए वैक्सीनेशन (Covid-19 Vaccination) जोरों पर चल रहा है. इस बीच जर्मनी के वैज्ञानिकों ने भेड़ के खून से ऐसी शक्तिशाली एंटीबॉडी (Antibody) विकसित की हैं, जो कोविड-19 के लिए जिम्मेदार कोरोना वायरस (सार्स-कोव-2) और इसके नए घातक स्वरूपों को प्रभावी ढंग से निष्क्रिय कर सकती हैं.

    जर्मनी स्थित मैक्स प्लैंक इंस्टिट्यूट (एमपीआई) फॉर बायोफिजिकल केमिस्ट्री के रिसर्चर्स ने एक स्टडी में ये जानकारी दी है. स्टडी में बताया गया है कि ये सूक्ष्म एंटीबॉडी है, जो पहले विकसित की गईं इस तरह की एंटीबॉडी की तुलना में कोरोना वायरस (COVID-19) को एक हजार गुना अधिक निष्क्रिय कर सकती हैं.

    वैक्सीन की 2 डोज ले चुके लोगों में दिख रहे हैं कोरोना के ये लक्षण, पढ़ें ये स्टडी

    इस रिसर्च से संबंधित रिपोर्ट ‘एम्बो’ पत्रिका में प्रकाशित हुई है. रिसर्चर्स ने कहा कि वर्तमान में इन एंटीबॉडी का क्लिनिकल ट्रायल किए जाने की तैयारी चल रही है. उन्होंने कहा कि कम दाम में इन एंटीबॉडी का उत्पादन बड़ी मात्रा में किया जा सकता है. ये कोविड-19 के इलाज से संबंधित वैश्विक मांग को पूरा कर सकती हैं.

    क्लिनिकल ट्रायल में हो रहीं तैयार
    एमपीआई में बायोफिजिकल केमिस्ट्री के निदेशक डिर्क गोरलिक ने कहा, ‘पहली बार ये एंटीबॉडी SARS-CoV-2 और इसके वेरिएंट के खिलाफ अत्यधिक स्थिरता और उत्कृष्ट प्रभावकारिता से काम कर रही हैं. इन वेरिएंट में अल्फा, बीटा, डेल्टा और गामा शामिल हैं.’ शोधकर्ता ने कहा कि इन छोटी एंटीबॉडी को मैनोबॉडी भी कहते हैं. इन्हें फिलहाल क्लिनिकल ट्रायल में तैयार किया जा रहा है.

    पुरानी एंटीबॉडी से हजार गुना बेहतर
    इस रिसर्च को ईएमबीओ जरनल में प्रकाशित किया गया है. रिसर्च में बताया गया है कि ये नैनोबॉडी पहले विकसित की गईं दूसरी एंटीबॉडी से ‘एक हजार गुना’ बेहतर हैं. अध्ययन में यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर जियोट्टिंग्टन (यूएमजी) के वैज्ञानिकों ने भी हिस्सा लिया.

    ब्रिटेन में बच्चों में बढ़ रहे RSV संक्रमण के मामले, क्या कोरोना के कारण हो रहा से सब?

    क्या है एंटीबॉडी?
    एंटीबॉडी शरीर का वो तत्व है, जिसका निर्माण हमारा इम्यून सिस्टम शरीर में वायरस को बेअसर करने के लिए पैदा करता है. संक्रमण के बाद एंटीबॉडीज बनने में कई बार एक हफ्ते तक का वक्त लग सकता है, इसलिए अगर इससे पहले एंटीबॉडी टेस्ट किए जाएं तो सही जानकारी नहीं मिल पाती है. एंटीबॉडी दो प्रकार के होते हैं. पहला एंटीबॉडी हैं – आईजीएम (इम्यूनोग्लोबुलिन एम) और आईजीजी (इम्यूनोग्लोबुलिन जी).

    एंटीबॉडी का पता कैसे लगाया जाता है?
    कोरोना की जांच के लिए एक और टेस्ट एंटीबॉडी टेस्ट है. एंटीबॉडी टेस्ट खून का सैंपल लेकर किया जाता है इसलिए इसे सीरोलॉजिकल टेस्ट भी कहते हैं. इसके नतीजे जल्द आते हैं और ये RT-PCR के मुकाबले कम खर्चीला भी होता है. इस टेस्ट की कीमत 500 रूपये होती है.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    विज्ञापन