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ऑस्ट्रेलिया के रिसर्चर्स का दावा- चिड़ियों को जन्म से पहले ही मिलती है चहचहाने की ट्रेनिंग

ऑस्ट्रेलिया के रिसर्चर्स का दावा- चिड़ियों को जन्म से पहले ही मिलती है चहचहाने की ट्रेनिंग

कॉन्सेप्ट इमेज.

कॉन्सेप्ट इमेज.

ऑस्ट्रेलिया (Australia) की फ्लाइंडर्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में दावा किया है कि अंडों में मौजूद चिड़िया (Bird) के भ्रूण अपने पेरेंट्स की आवाज को सुनकर बोलने की कोशिश करने लगते हैं.

  • News18Hindi
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    सिडनी. चिड़ियों (Birds) को चहचहाने की ट्रेनिंग (Training) तब ही मिल जाती है जब वो अंडों में होती हैं. अंडों में मौजूद भ्रूण अपने पेरेंट्स की आवाज को सुनकर बोलने की कोशिश करने लगते हैं. यह दावा ऑस्ट्रेलिया की फ्लाइंडर्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में किया है. शोधकर्ताओं का कहना है, चिड़ियों के भ्रूण में यह क्षमता होती है कि वो आवाज को पहचान सकें और उसे सीख सकें. रिसर्च में इसकी पुष्टि भी हुई है. इनके हार्टरेट की जांच से यह साबित हुआ है कि जन्म से पहले भी इन्हें चहचहाने की ट्रेनिंग इनके पेरेंट्स से मिलती है.

    चिड़ियों की इस ट्रेनिंग को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने एक प्रयोग किया. प्रयोग के दौरान वैज्ञानिकों ने चिड़ियों की 5 प्रजातियों के 138 अंडे को पास में रखा. वहां पर 60 सेकंड तक दूसरी चिड़ियों के चहचहाने की ऑडियो रिकॉर्डिंग चलाई. ये आवाजें सुनाने के बाद अंडों में मौजूद चिड़ियों के भ्रूण की हार्टबीट जांची गई. रिपोर्ट में सामने आया कि पेरेंट्स के चहचहाने पर इनकी हार्टबीट में बदलाव आता है. शोधकर्ता डॉ. कोलोमबेल्ली नेग्रेल कहती हैं, जांच में सामने आया कि ऑडियो रिकॉर्डिंग सुनने पर जिस भ्रूण ने ज्यादा ध्यान लगाया उनका हार्ट रेट कम हो गया था. दोबारा ऑडियो रिकॉर्डिंग सुनाने पर घटा हुआ हार्ट रेट ही मेनटेन रहा.

    पेरेंट्स की आवाज को समझते हैं भ्रूण
    फ्लाइंडर्स यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता सोनिया क्लिनडॉर्फर का कहना है, भ्रूण अंडे से निकलने से पहले ही बोलना और पेरेंट्स की बातों को समझना सीख जाते हैं. रिसर्च के नतीजे ये आशा जताते हैं कि कैसे जानवरों में बच्चे अपने माता-पिता से आवाज निकालना सीखते हैं.

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    बिना भ्रूण को नुकसान पहुंचाए हुआ प्रयोग
    शोधकर्ताओं का कहना है, प्रयोग की खास बात यह भी रही कि भ्रूण को किसी तरह से नुकसान नहीं पहुंचा. इससे पहले हुई रिसर्च में भ्रूण को अंडों से बाहर निकालकर हार्ट रेट चेक किया गया था. इस प्रयोग के बाद भ्रूण की मौत हो गई थी.

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