ब्रिटेन में नस्लभेद को लेकर आयी जांच रिपोर्ट, नस्लवाद की बात मानी

कंजरवेटिव सरकार ने पिछले साल हुए नस्लभेद-विरोधी प्रदर्शनों के मद्देनजर यह जांच शुरू करायी थी.

कंजरवेटिव सरकार ने पिछले साल हुए नस्लभेद-विरोधी प्रदर्शनों के मद्देनजर यह जांच शुरू करायी थी.

जातीय एवं नस्ल भेद संबंधी आयोग ने कहा, ‘‘ हमने विषमता के जिन मामलों की जांच की , उनमें से ज्यादातर में हमने पाया कि उसके मूल में नस्लवाद में नहीं है. हालांकि कुछ लोगों ने उनके लिए नस्ली भेदभाव को वजह माना था.’’

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लंदन. ब्रिटेन में सरकार द्वारा कराई गयी एक जांच में कहा गया है कि देश में नस्लवाद तो मौजूद है किंतु यह ऐसा व्यवस्थित नस्लवादी देश नहीं है जहां अश्वेत लोगों के खिलाफ छलपूर्वक जोड़तोड़ की जाती हो. यह रिपोर्ट बुधवार को सामने आयी है.

नस्लभेद-विरोधी कार्यकर्ताओं ने जांच निष्कर्षों पर यह कहते हुए संदेह व्यक्त किया है कि विज्ञान, शिक्षा, व्यापार, आपराधिक न्याय समेत विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की एक समिति की 264 पृष्ठों की इस रिपोर्ट में उस भेदभाव एवं नुकसानों की अनदेखी की गयी है जो ब्रिटेन में नस्लीय अल्पसंख्यक झेलते हैं.

कंजरवेटिव सरकार ने पिछले साल हुए नस्लभेद-विरोधी प्रदर्शनों के मद्देनजर यह जांच शुरू करायी थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रिटेन में ‘स्पष्ट तौर पर नस्लभेद’ है लेकिन देश ‘संस्थानात्मक ढंग से नस्ली’ नहीं है. समिति ने कहा कि नस्ल विषमता के कारक के तौर पर ‘ कम महत्वपूर्ण’ होती जा रही हैं. हालांकि उसे वर्ग एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि के की शह मिल रही है.

जातीय एवं नस्ल भेद संबंधी आयोग ने कही ये बात


जातीय एवं नस्ल भेद संबंधी आयोग ने कहा, ‘‘ हमने विषमता के जिन मामलों की जांच की , उनमें से ज्यादातर में हमने पाया कि उसके मूल में नस्लवाद में नहीं है. हालांकि कुछ लोगों ने उनके लिए नस्ली भेदभाव को वजह माना था.’’
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