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ईरान ने 2015 के परमाणु समझौते को तोड़ा, 20% यूरेनियम संवर्धन शुरू किया

ईरान ने 2015 के परमाणु समझौते को तोड़ा, 20% यूरेनियम संवर्धन शुरू किया

ईरान ने परमाणु समझौते को तोड़ा (फोटो- AP)

ईरान ने परमाणु समझौते को तोड़ा (फोटो- AP)

Iran resumes enriching uranium: ईरान ने 2015 के परमाणु समझौते को तोड़ते हुए 20% यूरेनियम संवर्धन का काम शुरू कर दिया है. ईरान का ये कदम अमेरिका के साथ 2018 में हुए समझौते का भी उल्लंघन है. जानकारों के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं.

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    तेहरान. ईरान (Iran) और अमेरिका (US) के बीच संबंध और खराब होते जा रहे हैं. इसी बीच ईरान ने आक्रामक रवैया अपनाते हुए दुनिया के ताक़तवर देशों के साथ 2015 में हुए समझौते को तोड़ दिया और फिर से यूरेनियम संवर्धन (Iran resumes enriching uranium) शुरू कर दिया है. ईरान ने एक भूमिगत इकाई में 20 प्रतिशत तक यूरेनियम संवर्धन शुरू कर दिया है. ईरान के इस फैसले के बाद उसके और इजराइल (Israel) के बीच फिर से तनाव बढ़ना तय माना जा रहा है.

    ईरानी सरकार के प्रवक्ता अली रबीई ने मेहर समाचार एजेंसी को बताया कि प्रक्रिया कोम के पास भूमिगत फोर्डो फैसेलिटी कुछ घंटे पहले शुरू की गई. इस तरह के यूरेनियम का उपयोग रिएक्टर ईंधन बनाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन इनका परमाणु बनाने में भी इस्तेमाल हो सकता है. हथियार में इस्तेमाल होने वाले यूरेनियम में 90% शुद्धता होती है. हालांकि ग्लोब न्यूक्लियर एजेंसी की तरफ़ से इसे लेकर कोई पुष्टि नहीं की गई है. ईरान ने फिर से यूरेनियम को 20 फ़ीसद शुद्ध करना शुरु कर दिया है, जो कि दुनिया के ताक़तवर देशों के साथ 2015 में हुए समझौते का उल्लंघन है.

    राष्ट्रपति हसन रूहानी ने दिए आदेश
    राष्ट्रपति हसन रूहानी ने फोर्डो इकाई में यूरेनियम संवर्धन शुरू करने के आदेश दिए हैं. 20 प्रतिशत यूरेनियम संवर्धन 90 प्रतिशत के हथियार-ग्रेड के स्तर से अलग एक तकनीकी कदम है. एक दशक पहले ईरान के 20 प्रतिशत यूरेनियम संवर्धन के फैसले से उसका इजराइल के साथ तनाव हो गया था. यह तनाव 2015 में परमाणु समझौते के बाद ही कम हुआ था. 20 प्रतिशत संवर्धन की फिर से शुरुआत के कारण फिर से अस्थिरता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. दरअसल, इस समझौते के तहत ईरान सिर्फ 4% संवर्धन कर सकता है. इतनी शुद्धता के यूरेनियम का इस्तेमाल बिजली निर्माण के लिए किया जाता है जबकि परमाणु हथियारों के लिए 90% शुद्धत का यूरेनियम चाहिए होता है.

    अमेरिका से समझौते का भी उल्लंघन
    यह कदम अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 2018 में तेहरान के साथ परमाणु समझौते से अमेरिका को एकतरफा तौर पर अलग कर लेने के बाद आया है. उसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ाने वाली कई घटनाएं हुई हैं. हाल ही में ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने अपने परमाणु बॉम्बर पारस की खाड़ी में भेजे हैं, जबकि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का दावा है कि पिछले 48 घंटे में ईरानी नौसेना और सक्रिय हो गई है. ईरान के कट्टर धार्मिक नेता इजरायल पर गलत तरीके से मुस्लिम जमीन पर कब्जा करने के आरोप लगाते रहे हैं जिसके कारण इजरायल भी ईरान को अपने लिए संकट मानता है. उसने हमेशा ईरान के परमाणु हथियारों से लैस होने का विरोध किया है जबकि ईरान इन आरोपों का खंडन करता रहा है. हालांकि, नवंबर 2020 में उसके चीफ न्यूक्लियर साइंटिस्ट मोहसिन फखरीजादेह की हत्या के बाद फैसला किया गया था कि यूरेनियम की शुद्धता बढ़ाई जाएगी जिससे इजरायल और अमेरिका के चौकन्ने हो गए.



    ट्रंप कर सकते हैं हमला
    इजरायली मीडिया ने अमेरिकी सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि इजरायल और सऊदी अरब ट्रंप को उकसा रहे हैं कि अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले वह ईरान के परमाणु ठिकानों को ध्वस्त करें. राजनीतिक विश्लेषकों ने यह भी आशंका जताई है कि राष्ट्रपति चुनाव में जो बाइडन की जीत से बौखलाए ट्रंप जाते-जाते ईरान के साथ विवाद को और जटिल बनाने की कोशिश कर सकते हैं ताकि आने वाली सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी की जा सकें. दरअसल, बाइडेन की योजना है कि ईरान पर ट्रंप ने जो दबाव बनाया था उसे कम किया जाए, उससे बातचीत की जाए और ईरान परमणु समझौते पर लौटा जाए.undefined

    Tags: Donald Trump, Iran, Iran oil Imports, United States of America

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