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ईरान में पत्रकार को फांसी पर चढ़ाया, देशव्यापी विरोध में मदद करने का आरोप

ईरान में शनिवार को पत्रकार रूहोल्लाह ज़म को फांसी दे दी गई. फोटो: AP

ईरान में शनिवार को पत्रकार रूहोल्लाह ज़म को फांसी दे दी गई. फोटो: AP

Iranian Journalist Hanged: ईरान में शनिवार को पत्रकार रूहोल्लाह ज़म (Ruhollah Zam) को फांसी (Hanged Iranian Journalist) दे दी गई. पत्रकार रूहोल्लाह ज़म ने 2017 में महंगाई के खिलाफ देशव्यापी विरोध (Protest Against Inflation) को प्रेरित करने में मदद की थी.

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    तेहरान. ईरान में शनिवार को पत्रकार रूहोल्लाह ज़म (Ruhollah Zam) को फांसी (Hanged Iranian Journalist) दे दी गई. पत्रकार रूहोल्लाह ज़म ने 2017 में देशव्यापी आर्थिक विरोध (Protest Against Inflation) को प्रेरित करने में मदद की थी. इस विरोध के बाद उन्हें देश से निर्वासित भी होना पड़ा था. निर्वासित होने के कुछ महीनों बाद ही वे रहस्यमय परिस्थितियों में देश वापस लौट आये थे. ईरान के सरकारी टेलीविज़न और आईआरएनए समाचार एजेंसी ने कहा कि आईआरएनए समाचार एजेंसी ने कहा कि 47 वर्षीय रूहुल्लाह ज़म को शनिवार तड़के फांसी दे दी गई. रिपोर्ट में इस से संबंधित और सूचनाएं नहीं दी गईं.

    AmadNews के माध्यम से विरोध की सूचना फैलाने का आरोप

    जून 2020 में एक अदालत ने ज़म को दुनिया में भ्रष्टाचार फैलाने का दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई. यह आरोप अक्सर ईरान सरकार की जासूसी या सरकार को उखाड़ फेंकने के प्रयासों से जुड़े मामलों में लगाया जाता है. ज़म की वेबसाइट AmadNews और लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम पर बनाए अपने चैनल के माध्यम से आम ईरानियों के बीच विरोध प्रदर्शनों की सूचनाओं को फैलाने में मदद की.

    इन अधिकारियों के बारे शर्मनाक जानकारी साझा की

    इन सूचनाओं में विरोध प्रदर्शनों के समय के साथ ईरान के शिया धर्मतंत्र को सीधे चुनौती देने वाले अधिकारियों के बारे में शर्मनाक जानकारी साझा की. 2009 में हुए ग्रीन मूवमेंट के बाद 2017 के अंत में शुरू हुए ये प्रदर्शन ईरान के लिए सबसे बड़ी चुनौती के रूप में उभर कर सामने आये और 2019 के नवम्बर के अंत में सामूहिक अशांति के लिए एक स्टेज तैयार कर दिया.

    महंगाई के खिलाफ शुरू हुआ था विरोध

    2017 के विरोध की शुरुआत खाद्य कीमतों में अचानक उछाल आने के कारण हुई. कई लोगों का मानना ​​है कि ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी के कट्टर विरोधियों ने पूर्वोत्तर ईरान के रूढ़िवादी शहर मशहद में पहले प्रदर्शनों को उकसाया ताकि आम जनता का गुस्सा राष्ट्रपति पर केंद्रित हो। बात यही नहीं रुकी और यह विरोध सभी शहरों में फैलता चला गया और पूरे शासक वर्ग के खिलाफ हो गया. जल्द ही ज़म के शेयर किये वीडियोज में रूहानी और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खुमैनी को लोगों द्वारा दी जा रही चुनौतियों को सुना जा सकता है.

    ईरान सरकार की शिकायत पर टेलीग्राम चैनल बंद

    टेलीग्राम ने ईरानी सरकार की इस शिकायत पर चैनल को बंद कर दिया कि यह चैनल गैसोलीन बम बनाने की जानकारी फैला रहा है. जम पर सरकार ने विदेशी खुफिया सेवाओं के साथ काम करने का झूठा आरोप लगाया था जिस कारण वह देश से बाहर चला गया और पेरिस में रहने लगा. इसके बाद वह ईरान लौट आया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया. फ्रांस ने उसकी मौत की सजा की "ईरान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की स्वतंत्रता के लिए एक गंभीर प्रहार कहकर आलोचना की.

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    ज़मा के पिता एक सुधारवादी शिया धर्मगुरू मोहम्मद अली हैं जिन्होंने 1980 के दशक की शुरूआत में सरकारी नौकरी की थी. जम के पिता ने जुलाई 2017 में ईरानी मीडिया द्वारा प्रकाशित एक पत्र में लिखा था जिसमें उन्होंने अपने बेटे टेलीग्राम चैनल और AmadNews पर की गई रिपोर्टिंग और संदेशों पर समर्थन नहीं करते हैं.

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