इस देश में आलू खाने से हुई थी लाखों लोगों की मौत, 25 फीसदी आबादी हो गई थी कम

इस देश में आलू खाने से हुई थी लाखों लोगों की मौत, 25 फीसदी आबादी हो गई थी कम
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आयरलैंड (Ireland) में जब आलू का अकाल पैदा हुआ तो यहां के लोग भुखमरी और कुपोषण से मरने लगे, बावजूद इसके ब्रिटेन (Britain) की सरकार ने आयरलैंड से अनाज, पशुधन और मक्खन जैसी चीजें मंगवाना जारी रखा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 23, 2020, 9:21 PM IST
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आयरलैंड. इन दिनों पूरा विश्व कोरोना वायरस महामारी की मार झेल रहा है. दुनिया कोरोना से पहले भी कई बार ऐसी महामारी ने लाखों लोगों की जान ली है. 20वीं सदी के दूसरे दशक में आए स्पेनिश फ्लू (Spanish Flu) ने कई करोड़ लोगों की जान ले ली थी. उससे पहले आयरलैंड में आलू के अकाल (Potato Famine) में कई लाख लोग मौत के मुंह में समा गए थे. दरअसल, साल 1845 में आयरलैंड में आलू का अकाल पड़ा था, जिसने कई सालों तक वहां होने वाली आलू की फसल को बर्बाद कर दिया. खराब और विषैले आलू खाने से कई लाख लोगों की मौत हो गई और कुछ भुखमरी के कारण अपनी जान गंवा बैठे.

उस समय आयरलैंड की मदद के लिए नेटिव अमेरिका आगे आया था. जो कोरोना काल में अमेरिका की मदद कर रहा है. बताया जाता है कि उस समय आयरलैंड में P. infestans नाम के एख खास फंगस ने आलू की फसल को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया. आलू की फसल के बर्बादी का सिलसिला करीब सात साल तक चलता रहा. साल 1852 में आलू का अकाल समाप्त हुआ. लेकिन इस दौरान भुखमरी और खराब आलू खाने से 10 लाख से ज्यादा आयरिश लोग मौत के मुंह में समा गए. यही नहीं लाखों लोगों को आयरलैंड छोड़कर दूसरे देशों में जाना पड़ा. ऐसा कहा जाता है कि उस समय आलू के अकाल के कारण आयरलैंड की आबादी 25 फीसदी तक कम हो गई थी.

आयरिश नेताओं ने लगाई मदद की गुहार
बताया जाता है कि आलुओं में फंगस लगने की वजह से आयरिश नेताओं ने क्वीन विक्टोरिया को भुखमरी फैलने के बारे में बताया. साथ ही उनसे मदद की गुहार लगाई. क्योंकि उस समय आयरलैंड पर अंग्रेजी शासन था. मदद के तौर पर क्वीन विक्टोरिया ने कॉर्न लॉ वापस ले लिया. कॉर्न लॉ को वापस लेने की वजह से अनाज की कीमत अपेक्षाकृत कम हो गई, लेकिन तब भी भुखमरी खत्म नहीं हुई. बता दें कि 19वीं सदी में आयरलैंड खेती-किसानी करने वाला देश था, लेकिन अकाल और महामारियों से जूझने के कारण लोग काफी गरीब हो गए. आलू के अकाल के समय आयरलैंड की 70 फीसदी आबादी आलू ही खाया करती थी. इसके पीछे वजह ये थी कि वे ना तो कुछ और उपजा सकते थे और ना ही खरीद सकते थे. आलू की फसल में बीमारी फैल जाने के कारण आयरलैंड की आबादी का एक बड़ा हिस्सा बूरी तरह से प्रभावित हो गया.
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भुखमरी और कुपोषण से मरने लगे लोग
आयरलैंड में जब आलू का अकाल पैदा हुआ तो यहां के लोग भुखमरी और कुपोषण से मरने लगे, बावजूद इसके ब्रिटेन की सरकार ने आयरलैंड से अनाज, पशुधन और मक्खन जैसी चीजें मंगवाना जारी रखा. साल 1847 में आयरलैंड से बड़ी मात्रा में मटर, बीन्स, खरगोश, मछली और शहद जैसी चीजें ब्रिटेन के लिए निर्यात होती रही. आयरलैंड के इस बूरे दौर में भी ब्रिटेन की सरकार का रवैया सख्त ही रहा. नतीजा ये हुआ कि देश की लगभग 25 फीसदी आबादी या तो खत्म हो गई या फिर उत्तरी अमेरिका और ब्रिटेन के लिए पलायन कर गई. आयरलैंड में आए आलू के अकाल के समय नेटिव अमेरिकन लोगों ने, जिन्हें Choctaw कहा जाता है ने मदद की कोशिश की. साल 1847 में जब नेटिव अमेरिकन लोगों को इस अकाल के बारे में पता चला, तो उन्होंने थोड़े-थोड़े पैसे जमा करके लगभग 170 डॉलर की मदद भेजी थी. नेटिव अमेरिका की और से मिली इस को आयरिश लोग आज भी याद रखते हैं. अब जब नेटिव अमेरिकी लोग कोरोना संक्रमण से जूझ रहे हैं तो आयरलैंड के लोग लगातार फंड बनाकर वहां मदद पहुंचा रहे हैं.
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