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इमरान खान की सरकार गिराने के पीछे अमेरिकी साजिश! जानें 'धमकी वाली चिट्ठी' का क्या है रहस्य

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन (L) और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान. (File Photo)

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन (L) और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान. (File Photo)

पाकिस्तान के प्रमुख अखबार 'डॉन' के मुताबिक, 27 मार्च को इस्लामाबाद की अपनी रैली में इमरान खान ने एक कागज का टुकड़ा हवा ...अधिक पढ़ें

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का दावा है कि उनकी सरकार के खिलाफ नेशनल असेंबली में विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ‘विदेशी साजिश’ का नतीजा है. पाकिस्तान के प्रमुख अखबार ‘डॉन’ के मुताबिक, 27 मार्च को इस्लामाबाद की अपनी रैली में इमरान खान ने एक कागज का टुकड़ा हवा में लहराते हुए कहा था कि इसमें मेरे और पाकिस्तान के खिलाफ साजिश की बातें हैं. इमरान खान ने कहा था, इस चिट्ठी में लिखी बातें मैं आपको नहीं बता सकता हूं.

उन्होंने फिर कहा, लेकिन इस चिट्ठी में जो है, उसका मकसद पाकिस्तान के खिलाफ साजिश है, क्योंकि मैंने आजाद विदेश नीति अपनाई है. पाकिस्तान की स्वतंत्र विदेश नीति कुछ देशों को पसंद नहीं आ रही है. मुझे सत्ता से बेदखल करने के लिए पाकिस्तान में विदेशों से फंड भेजा जा रहा है. अब पाकिस्तान सरकार ने पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपनी रैली में जिस विदेशी साजिश का जिक्र किया था, वह पाकिस्तानी मिशन से प्राप्त एक राजनयिक केबल पर आधारित था.

इमरान सरकार ने शुरू में पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश के साथ उस गोपनीय पत्र को साझा करने की पेशकश की थी, लेकिन बाद में प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने कैबिनेट सदस्यों को पत्र की सामग्री के बारे में अवगत कराया. गोपनीय दस्तावेजों के खुलासे में कानूनी बाधा को देखते हुए पत्रकारों के एक समूह को प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ बातचीत के दौरान कैबिनेट बैठक की जानकारी दी गई. डॉन अखबार के मुताबिक इमरान खान ने अपनी सरकार को पाकिस्तान की सत्ता से बेदखल करने की साजिश के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है.

क्या अमेरिका गिरना चाहता ​है इमरान खान की सरकार?
पत्रकारों के समूह के साथ इस्लामाबाद में हुई बैठक में सरकार ने इशारों में बताया कि मॉस्को के साथ पाकिस्तान के संबंध जो बाइडन प्रशासन को पसंद नहीं थे. प्रधानमंत्री इमरान खान की अच्छी व स्वतंत्र विदेश नीति के विरोध में उनके खिलाफ विदेशी साजिश रची गई. इस बैठक में किसी विदेशी सरकार का प्रत्यक्ष नाम नहीं लिया गया था, लेकिन मीडिया को बताया गया कि मेजबान देश के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पाकिस्तानी राजदूत को बताया था कि उन्हें प्रधानमंत्री इमरान खान की विदेश नीति, विशेष रूप से उनकी रूस यात्रा और यूक्रेन युद्ध के बारे में जानकारी दी गई थी.

डॉन में छपी रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी राजदूत को आगे बताया गया कि दोनों देशों के बीच (अमेरिका और पाकिस्तान) संबंधों के भविष्य की दिशा उस अविश्वास प्रस्ताव के भाग्य पर निर्भर करती है जिसे विपक्षी दल प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ लाने की योजना बना रहे हैं. पाकिस्तानी राजदूत को यह भी चेतावनी दी गई थी कि यदि प्रधानमंत्री इमरान खान अविश्वास प्रस्ताव से अपनी सरकार बचा ले गए, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे. जिस राजनयिक केबल के हवाले से यह​ खबरें सार्वजनिक चर्चा में आई हैं, उसे कथित तौर पर विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव दायर करने के एक दिन पहले यानी 7 मार्च को भेजा गया था.

अमेरिका ने इमरान सरकार के आरोपों को सिरे से नकारा
हालांकि, अमेरिका ने इन आरोपों का सिरे से खंडन किया है. जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरका ने इमरान खान सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों की ओर से पाकिस्तान नेशनल असेंबली लाए गए अविश्वास प्रस्ताव में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है. वॉशिंगटन ने कहा है कि पाकिस्तान के हालिया राजनीतिक अस्थिरता में अमेरिकी संलिप्तता के आरोप निराधार हैं. अमेरिकी विदेश विभाग ने प्रधानमंत्री इमरान खान को ‘धमकी पत्र’ भेजने के आरोपों को गलत बताया है और कहा है कि व्हाइट हाउस पाकिस्तान में संवैधानिक प्रक्रिया का सम्मान करता है.

डॉन अखबार की रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लो के साथ एक बैठक के आधार पर, संयुक्त राज्य अमेरिका में पाकिस्तान के तत्कालीन राजदूत असद मजीद द्वारा राजनयिक केबल भेजा गया था. राजदूत असद मजीद अब अपनी नई भूमिका ग्रहण करने के लिए ब्रसेल्स चले गए हैं और उनकी जगह राजदूत मसूद खान ने ले ली है. एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी ने डॉन को बताया है कि बैठक में अमेरिकी अधिकारियों की वाली भाषा असामान्य रूप से कठोर थी.

इमरान खान की मॉस्को यात्रा से खुश नहीं था अमेरिका
यह एक सर्वविदित तथ्य है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का प्रशासन इमरान खान की मॉस्को यात्रा से नाखुश था, जो संयोग से रूस ने जिस दिन यूक्रेन पर आक्रमण किया उसी दिन शुरू हुआ था. अमेरिकी विदेश विभाग ने सार्वजनिक रूप से इन चिंताओं को व्यक्त किया था, और दोनों पक्षों ने (पाकिस्तान और अमेरिका) स्वीकार किया कि इमरान खान की मॉस्को यात्रा से पहले बातचीत हुई थी, ताकि उन्हें वहां जाने से रोकने की कोशिश की जा सके. अमेरिका ने इमरान सरकार से यूक्रेन पर रूसी हमले की निंदा करने और संयुक्त राष्ट्र में पेश युद्ध समाप्त करने के लिए मॉस्को से आह्वान करने वाले प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए कहा था. लेकिन पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में रूस के खिलाफ प्रस्ताव पर वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया था और यूक्रेन संकट को बातचीत और कूटनीति के माध्यम से हल करने की मांग की थी

Tags: America, Imran Khan Government, Pakistan latest news

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