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इजरायल-फिलिस्तीन जंग: फ्रांस का UNSC से प्रस्ताव पारित करने की अपील, अमेरिका के रुख पर सबकी नजर

इजरायल के हवाई हमले के बाद ग़जा़ शहर के अल-शरोक बिल्डिंग से निकलता धुआं. (एएफपी फाइल फोटो)

Israel Hamas War Gaza City: इजरायल और ग़ाज़ा के हमास चरमपंथी शासकों के बीच संघर्ष 2014 के बाद से सबसे भीषण स्तर पर है और अंतरराष्ट्रीय आक्रोश भी पैदा हो रहा है.

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    संयुक्त राष्ट्र. संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत ने कहा कि फ्रांस इजरायल और ग़ज़ा को नियंत्रित करने वाले फिलिस्तीनी चरमपंथियों के बीच संघर्षविराम के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से प्रस्ताव पारित करने का आग्रह कर रहा है. परिषद के मौजूदा अध्यक्ष झांग जून ने पुष्टि की है कि संयुक्त राष्ट्र में फ्रांस के राजदूत निकोलस डे रिवियरे ने मंगलवार को संघर्ष के मुद्दे पर विचार-विमर्श के तीसरे दौर में परिषद को सूचित किया कि एक प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है.

    अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बरकरार रखने वाले, संयुक्त राष्ट्र के सबसे शक्तिशाली निकाय को हिंसा रोकने का आह्वान करने वाला प्रेस बयान जारी करने से रोक दिया है. उसके अनुसार, यह इजरायल और हमास के बीच संघर्ष को समाप्त करने के कूटनीतिक प्रयासों में मददगार नहीं होगा.

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    राजनयिकों ने कहा कि परिषद के 14 अन्य सदस्यों ने चीन, ट्यूनीशिया और नॉर्वे की तरफ से प्रस्तावित बयान का समर्थन किया है, लेकिन सुरक्षा परिषद प्रेस एवं अध्यक्ष की ओर से जारी बयानों को सभी 15 सदस्यों की मंजूरी की जरूरत होती है. हालांकि, कानूनी रूप से बाध्य प्रस्तावों के लिए मंजूरी जरूरी नहीं है. इनके लिए पक्ष में नौ मतों की और स्थायी सदस्य द्वारा वीटो न किए जाने की जरूरत होती है. इससे अमेरिका संघर्षविराम के आह्वान के पक्ष में, या इसे टालने या वीटो करने की स्थिति में है.

    झांग ने संवाददाताओं को बताया कि चीन, ट्यूनीशिया और नॉर्वे 'ने हमारे प्रयासों को छोड़ा नहीं है और मसौदा बयान अब भी चर्चा के लिए है. हम हमारे प्रयास जारी रखेंगे...., यह सुनिश्चित करेंगे कि सुरक्षा परिषद अपना जनादेश एवं जिम्मेदारियां पूरी करे.'

    इजरायल और ग़ज़ा के हमास चरमपंथी शासकों के बीच संघर्ष 2014 के बाद से सबसे भीषण स्तर पर है और अंतरराष्ट्रीय आक्रोश भी पैदा हो रहा है, लेकिन अमेरिका की विदेश नीति में पश्चिम एशिया और अफगानिस्तान से ध्यान हटाने को संकल्पित बाइडन प्रशासन ने संघर्ष में इजरायल की भूमिका की निंदा करने या क्षेत्र में एक उच्चस्तरीय राजनयिक को तैनात करने से अभी तक इनकार ही किया है. अन्य देशों की अपील का भी कोई असर नहीं दिखाई दे रहा.

    इजरायल और ग़ाज़ा के हमास चरमपंथियों के बीच तब भारी संघर्ष शुरू हो गया जब हमास ने 10 मई को फिलिस्तीनी प्रदर्शनों के समर्थन में यरुशलम पर रॉकेट दागे. अल-अक्सा मस्जिद परिसर में सुरक्षा बलों की सख्ती तथा यहूदियों द्वारा दर्जनों फिलिस्तीनी परिवारों को वहां से निकाले जाने की कोशिशों के खिलाफ ये प्रदर्शन किये जा रहे थे.