US ने कहा- चीन को जवाब देने का वक़्त आ गया है, भारत से किए वादों से भी मुकरा

US ने कहा- चीन को जवाब देने का वक़्त आ गया है, भारत से किए वादों से भी मुकरा
अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ (फाइल फोटो)

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ (Mike Pompeo) ने कहा कि अब समय आ गया है कि दुनिया चीन (China) की कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से पेश की जा रही चुनौतियों का जवाब दे.

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वाशिंगटन. अमेरिका (US) और चीन (China) के बीच कोरोना संक्रमण (Coronavirus), साउथ चाइना सी (South China Sea) और हांगकांग (Hong Kong) के मुद्दे पर तनाव बढ़ता ही जा रहा है. अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ (Mike Pompeo)  ने कहा कि अब समय आ गया है कि दुनिया चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से पेश की जा रही चुनौतियों का जवाब दे. पोम्पिओ ने कहा कि दुनिया को बताने से काफी पहले ही चीन की सरकार को कोरोना वायरस के एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने के बारे में पता था. उधर अमेरिका के एक प्रभावशाली द्विदलीय कांग्रेसनल कॉकस ने कहा कि चीन ने भारत से किए वादों का पालन नहीं किया है इसलिए उसकी बातों पर भरोसा नहीं किया जा सकता.

पोम्पिओ ने 'फॉक्स न्यूज' के बिल हेमर को बृहस्पतिवार को दिए एक साक्षात्कार में कहा, 'दक्षिणपूर्वी एशिया में ही नहीं बल्कि एशिया में, यूरोप में देशों को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा पेश की जा रही चुनौतियों के बारे में पता चल गया है. अमेरिका ने भी काफी लंबे समय तक इस पर गौर नहीं किया.' उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि उन सभी ने भी यही किया और मुझे लगता है कि अब वे सभी एक संयुक्त निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि इसे सही करने का समय आ गया है.' पोम्पिओ ने कहा, 'दुनिया में लोकतंत्र और स्वतंत्रता से प्रेम करने वाले लोगों के लिए यह जरूरी है कि हम चीन की कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा पेश की जा रही चुनौतियों का जवाब दें.' उन्होंने कहा कि लगातार 40 साल तक अमेरिकी प्रशासन दूसरी ओर देखता रहा और चीन को अमेरिका का फायदा उठाने का मौका दिया.

ट्रंप ने कहा- अब और नहीं
पोम्पिओ के मुताबिक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा 'अब और नहीं.' विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका निष्पक्ष, पारस्परिक व्यापारिक संबंध बनाएगा और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से अमेरिकियों के साथ उसी तरह से व्यवहार करने की मांग करेगा जैसा अमेरिका वहां जाने वाले लोगों के साथ करता है. हेममर ने पोम्पिओ से हांगकांग आधारित वायरस विशेषज्ञ डॉ. यान ली-मेंग के उस दावे के बारे में भी पूछा, जिसमें उन्होंने कहा था कि बीजिंग को इस वायरस के एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने की जानकारी सार्वजनिक करने से तीन सप्ताह पहले ही इसके बारे में पता था.
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पोम्पिओ ने इसके जवाब में कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी ऐसा ही किया और विश्व को इस खतरे से निपटने के लिए जो जानकारी हासिल होनी चाहए थी, वह उसे नहीं दी गई. विश्व में कोरोना वायरस के सबसे अधिक 35 लाख से अधिक मामले अमेरिका में हैं और 1,37,000 से अधिक लोगों की इससे जान जा चुकी है. पोम्पिओ चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों और उनके परिवार के अमेरिका आने पर रोक लगाने की खबरों पर टिप्पणी करने से बचते दिखे.

भारत के साथ हुए समझौतों के विपरीत काम कर रहा है चीन
अमेरिका के एक प्रभावशाली द्विदलीय कांग्रेसनल कॉकस ने कहा कि चीन सीमा पर यथास्थिति बदलने और भारतीय सेना को चुनौती देने के लिए उसके साथ किए समझौतों के विपरीत काम कर रहा है और उसने उम्मीद जताई कि बीजिंग वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अत्यधिक हथियारों तथा बुनियादी ढांचे को कम करेगा. भारत और भारतीय अमेरिकियों पर कांग्रेसनल कॉकस ने गलवान घाटी में शहीद हुए सैन्यकर्मियों के प्रति भी गुरूवार को शोक जताया. भारत और चीन की सेना के बीच पांच मई से पैंगोंग सो, गलवान घाटी और गोगरा हॉट स्प्रिंग समेत पूर्वी लद्दाख के कई इलाकों में आठ हफ्तों से अधिक समय से गतिरोध चल रहा है. पिछले महीने गलवान घाटी में झड़पों में 20 भारतीय सैन्यकर्मियों के शहीद होने के बाद हालात बिगड़ गए.

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कॉकस के सह-अध्यक्ष सांसद जॉर्ज होल्डिंग और ब्रैड शरमन ने बृहस्पतिवार को एक बयान में कहा, 'भारत और भारतीय अमेरिकियों पर कॉकस के सदस्य होने के नाते हम 15 जून को गलवान घाटी इलाके में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर हुई घटनाओं से बहुत निराश हैं.' उन्होंने अमेरिका में भारत के राजदूत तरणजीत सिंह संधू को लिखे पत्र में कहा कि पिछले कुछ महीनों में चीनी अधिकारियों ने एलएसी पार करने की कोशिश की जिसके बाद छह जून को एलएसी से सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया लागू करने के लिए कूटनीतिक चर्चा हुई.

इस पत्र पर सात अन्य सांसदों ने भी हस्ताक्षर किए हैं. पत्र में कहा गया है, 'समझौते के महज नौ दिनों बाद चीन ने एलएसी पर भारतीय सीमा की ओर नया ढांचा खड़ा करने की कोशिश की.' इसमें कहा गया है, 'हम शहीद सैनिकों के परिवारों के प्रति संवदेनाए जताते हैं. हम निराश हैं कि चीन सीमा पर यथास्थिति बदलने और भारतीय सेना को चुनौती देने के लिए भारत के साथ अपने समझौतों के विपरीत काम कर रहा है.' पत्र में कहा गया है, 'हम उम्मीद जताते हैं कि वे वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अत्यधिक हथियारों और बुनियादी ढांचों को कम करेंगे और भारत के साथ समझौतों को बरकरार रखेंगे.'
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